उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूल बंद करने के शिक्षा विरोधी फैसले के खिलाफ "AAP के स्कूल बचाओ आंदोलन" में शामिल होने के लिए जनता का हुजूम उमड़ना शुरू
"मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए"
#स्कूल_बचाओ_आंदोलन
जिस देश में शिक्षार्थी भी सड़क पर आंदोलन करने पर मजबूर हों साथ ही शिक्षित और शिक्षक भी, उस देश की सरकार न केवल देश के वर्तमान को बल्कि भविष्य को भी बर्बाद करने की दोषी होती है।
नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं!
शिक्षित कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
भाजपा जाए तो रोज़गार आए!
#SSC
#sscprotest
#SSCProtest2025
#Unemployment
#JusticeForAspirants
#युवा_विरोधी_भाजपा
मधुशाला नही, पाठशाला चाहिये।
BJP सरकार द्वारा यू पी में 27 हज़ार सरकारी स्कूल बंद किए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आज ललितपुर में बुंदेलखंड प्रांत अध्यक्ष विवेक जैन और जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह के नेतृत्व में AAP कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन।
#SaveSarkariSchools
आज फिर एक आम छात्रा की स्टोरी आम जनमानस तक लाया गया😢
हम सब डटे हुए हैं, जब तक विज्ञापन नहीं तब तक शांत नहीं होंगे,
यह स्टोरी मध्यप्रदेश के रीवा जिले से आई वंदना जायसवाल का है, जो प्रयागराज में पिछले 7 साल से भर्ती का इंतजार कर रही है, लेकिन यूपी सरकार अभी तक ख़ामोश है ।
आज़मगढ़ में तहसीलदार “शैलेश कुमार” को चढ़ा सिंघम बनने का बुख़ार
काला चश्मा, पुलिस सुरक्षा और रील बनवाते हुए गुमटी की जाँच करने पहुँचे तहसीलदार
पहले गुमटी के पेपर माँगे, मोबाइल पर पेपर दिखाने से पहले जड़ा “झन्नाटेदार तमाचा”
दुकान के CCTV में क़ैद हुआ तहसीलदार शैलेश कुमार के जाँच करने का तरीक़ा
@dmazamgarh@CMOfficeUP @ChiefSecy_UP
उप्र शिक्षा चयन आयोग को भंग करके उसके सभी सदस्यों से जो धनराशि इतने सालों में उन पर खर्च की गयी है, उसकी वसूली हो। वेतन और भत्ते काम करने के दिये जाते हैं, आराम करने के नहीं।
#97000_प्राथमिक_शिक्षक_भर्ती#डीएलएड#डीएलएड_शिक्षक_भर्ती
"गुरु बनना चाहा था, गुनहगार बना दिए गए!"
प्रिय उत्तर प्रदेश,
तुम्हारी गलियों में आजकल सिर्फ़ इम्तिहान के नोट्स नहीं, गुस्से की चिट्ठियाँ भी घूम रही हैं। हाथों में किताबें नहीं, नाराज़गी के पोस्टर हैं। और हो भी क्यों ना? ये कोई नई मांग नहीं है, बल्कि पुरानी उम्मीदों की राख़ से निकला हुआ धुआं है—जो अब आंखों में जलन बनकर भर गया है।
बेरोज़गारी कोई आंकड़ा नहीं होता, जनाब। ये सुबह 6 बजे उठकर एडमिट कार्ड ढूंढने वाली बेचैनी होती है, ये ट्रेन की जनरल बोगी में धक्के खाते हुए परीक्षा देने जाने वाली उम्मीद होती है, ये पसीने में लथपथ होकर खाली लौट आने की चुप्पी होती है।
और यूपी के नौजवानों ने ये सब सहा है- सालों तक। हर बार परीक्षा होती है—और हर बार रद्द हो जाती है। हर बार पेपर छपता है—और हर बार लीक हो जाता है। हर बार सरकार आश्वासन देती है—और हर बार विश्वास टूट जाता है, लेकिन मैं ख़त पेपर लीक से नाराज़ होकर नहीं लिख रहा हूं, बल्कि इसलिए लिख रहा हूं, क्योंकि तुम्हारी सड़कों पर आजकल नारे हैं—
“हम शिक्षक बनना चाहते हैं, पर सरकार हमें लाठी बना रही है।” "हम उत्तरप्रदेश के बच्चों का भविष्य संवारना चाहते है, लेकिन सरकार भर्ती नहीं देती।"
एक ओर बेरोज़गारी की आग है, दूसरी ओर उस पर घी डालता शिक्षक भर्ती घोटाला।
कभी पेपर लीक, कभी सूची गायब, कभी मेरिट में हेरफेर, और कभी लाठियाँ- तुमने इन युवाओं को क्या दिया, सिवाय इंतज़ार, अपमान और अधूरे सपनों के।?
2019 में घोषित इस 69000 शिक्षक भर्ती में इतनी गड़बड़ियाँ हुईं कि कोर्ट ने कई बार रोक लगाई। मेरिट लिस्ट में अंक जोड़ने में घपला किया गया। RTI से पता चला कि कई अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति मिल गई जबकि असली मेधावी बाहर रह गए।
फिर बात आती है, 17000 सहायक अध्यापक भर्ती (2018) की, जो
अभी तक पूरी नहीं हो पाई। सरकार की सुस्ती और काउंसलिंग में घपलों ने हजारों युवाओं को अटका दिया।
फिर अगर बात UP TET और SUPER TET की करें तो तुम्हारी पवित्र धरती पर चल रहे घोटाले से तुम्हारा होश उड़ जाएगा।
हर साल परीक्षा के नाम पर युवाओं का भरोसा लिया जाता है, और फिर पेपर लीक कर सब कुछ ज़ीरो से शुरू करा दिया जाता है। 2021 में TET पेपर लीक होने से 20 लाख छात्र प्रभावित हुए।
तुम्हारी सुबहें अब स्कूल की घंटियों से नहीं, धरना स्थलों के नारों से शुरू होती हैं। कभी लखनऊ की सड़कों पर, कभी प्रयागराज के गलियारों में- जहाँ पहले बच्चों की किलकारियाँ गूंजती थीं, अब वहां बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ें गूंज रही हैं- “हमें हमारा हक़ चाहिए!”
प्राथमिक शिक्षक भर्ती - एक टूटी हुई उम्मीद की कहानी, 69,000 शिक्षक भर्ती, जिसे तुमने “बड़ी उपलब्धि” बताया था,वहीं से शुरू हुई एक ऐसी दास्तान, जो अब थक चुकी है, पर रुकी नहीं। कहते हो ‘शिक्षा का मंदिर’,
पर वहाँ तक पहुँचने से पहले ही,अध्यापक को तोड़ देते हो तुम।
जब शिक्षक ही सड़क पर है…तो छात्र कहाँ जाएगा।? आज जो अभ्यर्थी शिक्षक बनना चाहता है,वो बेरोज़गार भी है, अपमानित भी, और उपेक्षित भी।उसने B.Ed किया, D.El.Ed किया, TET पास किया,हर शर्त पूरी की…सिर्फ ये नहीं किया कि किसी मंत्री के रिश्तेदार बने।
लेकिन सरकार, जिसके पास “बुलेट ट्रेन” का सपना है,पर एक शिक्षक की नियुक्ति की ट्रेन 5 साल से प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी है।
आपके पास “विश्वगुरु” बनने की योजना है,पर गुरु को ही सड़कों पर बर्बरता से कुचला जाता है, एक जमाने में इंसान गुरु का शिष्य बनने के लिए हर तपस्या पूरा करता था, लेकिन आज इंसान गुरु बनने के लिए भरी दोपहर में पसीना पोछते हुए सड़क पर लड़ते है।
आप कहते हैं—"शिक्षा प्राथमिकता है",पर लगता है, सिर्फ प्राथमिक शिक्षक ही प्राथमिक नहीं हैं।
लेकिन,एक सवाल जो हर गले में फंसा है:“सरकार क्यों डरती है योग्य शिक्षक से?” क्यों हर बार कोर्ट के दरवाज़े खटखटाने पड़ते हैं?
क्यों सैकड़ों सीटें खाली पड़ी हैं, पर नियुक्तियाँ नहीं होती।?
प्रिय प्रदेश,जो युवा “पढ़ाने” आया था,अब “संघर्ष” सिखा रहा है।
आप चाहे जितना दबा लें,हर गिरे हुए नियुक्ति पत्र से एक आंदोलन खड़ा हो रहा है। और एक दिन इतिहास पूछेगा कि जब इस देश के युवाओं ने chalk और blackboard उठाने की ठानी थी,
तो सरकार ने उन्हें लाठियां और मच्छरों से भरा हुआ रात और सड़कों का बिछावन दिया था।
खैर! एक गाना मेरे कमरे में गूंज रही है, " सारी उम्र तो मर - मर के जी लिए, एक पल तो हमें जीने दो, जीने दो...."
एक बेचैन छात्र।
चाय इश्क और राजनीति।
डीएलएड परिवार के किसी जयचंद ने पुलिस प्रशासन को कोचिंग संस्थानों के नाम देकर शिकायत दर्ज कराया..
सभी कोचिंग संस्थानों को 6 जून शिक्षक भर्ती महाधरना को लेकर नोटिस और दबाव बनाया जा रहा है ।
हम लोग डरने वाले नहीं हैं हम लड़ेंगे और जीतेंगे
इंकलाब ज़िंदाबाद