और कितनी बेटियां दहेज की बलि चढ़ेंगी और कितनी बेटियां प्रताड़ित की जायेंगी ?
ये सिलसिला तबतक नहीं थमेगा जबतक माता-पिता अपनी सोच नहीं बदलेंगे। हमें ये सोच बदलनी होगी की बेटियां पराया धन हैं और शादी कराकर गंगा नहीं नहाना है बल्कि उनका ताउम्र साथ निभाना बेटे की तरह ।