अखलाक का जलता हुआ घर देख रहा हूं।
देखा नही जाता मगर देख रहा हूं। मज़लिस का सिपाही
Big fan of @asasowaisi Sahab
@aimim_national कार्यकर्त्ता
बिहारी बाबू ❤️
20 जुलाई, जिस दिन दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर पुलिस का बर्बरता दिखाई, उस दिन ANI ने सुबह 7 बजे से आधी रात तक 'X' पर 404 पोस्ट किए. लेकिन इनमें से एक भी पोस्ट में छात्रों के घायल होने का ज़िक्र तक नहीं था.
@Shinjineemjmdr का विश्लेषण
https://t.co/E689ZfksNe
तेजस्वी जी ने बंटी यादव के परिवार को 5 लाख दिया अच्छी बात है,RJD का झंडा उठाने वाले सीतामढ़ी के दो मुसलमान मारे गए उनके लिए भी कुछ सोंचिए 20% आबादी है @yadavtejashwi
असम जहां मुसलमानों से बेइंतहा नफ़रत दिखाई गई, जहां मुसलमानों को सबसे बदतरीन हालत में दिखाया गया आज वहीं के मुसलमान सैलाब में डूबे और आर्थिक लिहाज़ से बर्बाद होने वाले हिंदू गांव वालों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहें हैं..
असम में विधायक बदरुद्दीन अजमल साहब ने अभी हाल ही में 100 करोड़ का राहत का सामान देने का ऐलान किया वहीं मोहम्मद कैफ़ और हुसैन मंसूरी जैसे लोग भी लगातार वहां मदद में लगे हैं लेकिन अफ़सोस इस ख़बर के बारे में ना ही कहीं शोर है और ना बात हो रही है
यह मध्य प्रदेश सरकार का विज्ञापन है जिसमें अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए दो लाख राशि दी जा रही है!
अब अंतरजातीय विवाह को तो भाजपा की सरकार खुद बढ़ावा दे रही है और अगर कोई बालिग लड़का लड़की अंतर धार्मिक विवाह कर ले तो यही सरकार उनके पीछे पड़ जाती है जेल तक भेज दिया जाता है जिहाद की थ्योरी बनाई जाती है मगर इधर....
वैसे कोई हिंदू धर्म का ज्ञाता मुझे यह बता सकता है कि शास्त्रों के अनुसार अंतरजातीय विवाह हो सकता है?
ये यूपी के शिक्षा मंत्री @thisissanjubjp हैं। इनके दादा यूपी के मुख्यमंत्री थे। इनके पिता यूपी सरकार में मंत्री रहे, और सांसद रहे। जब इनके दादा मुख्यमंत्री थे तब भाजपा का प्रचारतंत्र गली-गली में कहता घूमकर प्रचार करता था कि कल्याण सरकार ने नकल पर रोक लगा दी है।
खैर! अब आप यूपी के शिक्षा मंत्री का संबोधन सुनिए। वो इस तरह हिंदी पढ़ रहे हैं, जैसे कोई दूसरी कक्षा का छात्र क्लासरूम में हिंदी का पाठ पढ़ रहा हो, और मास्टर साहब उसे बार-बार करेक्ट कर रहे हों। फिर दोहराता हूँ, संदीप सिंह यूपी के शिक्षा मंत्री हैं। शिक्षा मंत्री समझते हैं ना आप!
संदीप सिंह का यह संबोधन साल भर पहले का है। उत्तर प्रदेश के Gen-Z में अगर शिक्षा के प्रति ज़रा भी बेहतरी की ललक होती तो, भाजपा सरकार ने शिक्षा मंत्रालय ऐसे शख्स को बिल्कुल ना सौंपा होता जिसे ढंग से हिंदी पढ़ना भी नहीं आता। बुलडोज़र के ‘मज़े’ और ‘दूसरों’ को ‘ठीक’ करने की लालसा ने शिक्षा के नाम पर ऐसे लोगों को शिक्षा मंत्रालय में बैठाया है।
अगर @SwetaSinghAT अतीक अहमद की हत्या को ढेर न बोलकर पुलिस हिरासत में हत्या लिखती तो आपकी पत्रकारिता बच जाती।
लेकिन अफ़सोस कि आज मीडिया रात को रात कहने की कुव्वत नहीं रखती हैं।
ये भाई साहब रामपुर में पुलिस कप्तान है जो "सच्चे मुसलमान" और "हरामी मुसलमान" की परिभाषा बता रहे है!
शायद मुसलमान को बोला है तो रिटायरमेंट से पहले कुछ प्रमोशन मिल जाए मगर "हिंदू" की परिभाषा बताते तब तो कुछ होता न!
आज इलाहाबाद हाई कोर्ट में जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर मोहम्मद आज़म ख़ान और उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्लाह आज़म की जमानत की मांग की जाने वाली याचिका पर सुनवाई होनी थी लेकिन जस्टिस विक्रम डी चौहान ने सुनवाई के वक़्त ख़ुद को सुनवाई से अलग कर मामले को मुख्य न्यायधीश को ट्रांसफर कर दिया।
जज साहब ने 15 जुलाई को सुनवाई की थी और अगली तारीख़ 6 अगस्त दे दी, आज़म ख़ान के वकीलों और परिजनों ने 20 दिन इंतिज़ार किया और आज अदालत पहुंचे तो जज साहब ने बिल्कुल मौके पर ख़ुद को सुनवाई से अलग कर लिया, जज साहब चाहते तो मामले को पिछली तारीख़ यानी 15 जुलाई को ही इस मामले से अलग कर सकते थे ताकि अब तक मामला की सुनवाई हो जाती, लेकिन साहब ने ऐसा नहीं किया क्योंकि मामले को खींचना भी था।
ख़ैर जज साहब की मामले से दूरी बनाने की मजबूरी जो भी रही हो लेकिन साफ़ जाहिर है कि अदालतों में सरकारों का खौफ़ है, इसलिए जज अब मामलों से दूरी बनाना ही बेहतर विकल्प समझते हैं, और यह दूरी उन्हीं केसों में बनाई जाती हैं जिनमें पहली ही सुनवाई में जमानत देने का आधार बनता हैं लेकिन दबाव के कारण जज फ़ैसले देने का भी फैसला नहीं ले पा रहे हैं, और फैसला लिया जाता है तो मामलों से दूरी बनाने का।
यह पहला मामला नहीं जब किसी जज ने आज़म ख़ान और उनके बेटे के मामले की सुनवाई से दूरी बनाई हो, इससे पहले 21 नवंबर 2025 को यतीमखाना केस में भी जो कि आज़म ख़ान से ही जुड़ा हुआ था, उसकी सुनवाई से भी जज समीर जैन ने ख़ुद को अलग कर मामले को मुख्य न्यायधीश के पास भेज दिया था।
साबित हैं जज साहब आज़म ख़ान के मामले को भांप चुके हैं जिसमें आज़म ख़ान और उनके बेटे को बरी या जल्द जमानत देने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, लेकिन जज साहब ने जमानत न देकर ख़ुद को मामले की सुनवाई से अलग कर मुख्य न्यायधीश के पास भेजना मुनासिब समझा। अगर जज साहब को इस मामले से ख़ुद को अलग ही करना था तो अलग होने वाला फैसला कई महीनों में क्यों लिया गया? क्यों न ख़ुद को मामले की शुरुआत या जब मुख्य न्यायधीश ने अदालत में भेजा था उसी दौरान क्यों नहीं लौटाया गया? अब नागरिक अदालतों का नहीं बल्कि अदालत ही नागरिकों का समय बर्बाद करती हैं, अदालत का नागरिक समय बर्बाद करता है तो अदालत द्वारा नागरिकों पर जुर्माना और FIR तक दर्ज कर देती हैं लेकिन नागरिकों अगर अदालत ही नागरिकों का समय बर्बाद करें तो किस पर जुर्माना और किस पर FIR होनी चाहिए यह भी अदालतों को बताना चाहिए।
क्या सरकार पश्चिम बंगाल में सामने आए Nipah Virus के मामलों से वाकिफ़ है? इस खतरनाक वायरस को जानवरों से इंसानों में फैलने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? प्रभावित इलाकों में निगरानी, जांच (Screening), इलाज की बेहतर व्यवस्था और वायरस को फैलने से रोकने के लिए क्या तैयारी की गई है? साथ ही, लोगों को Nipah Virus के लक्षण, बचाव और साफ़-सफ़ाई के बारे में जागरूक करने तथा मुतास्सिर इलाकों से विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए क्या सलाह (Travel Advisory) जारी की गई है?
लोकसभा में AIMIM अध्यक्ष बैरिस्टर @asadowaisi साहब ने HEALTH AND FAMILY WELFARE Minister से जवाब मांगा।
संभल में हिंसा कैसी भड़की यह ‘सरकारी आयोग’ ने उसका पता लगा लिया है। संभल हिंसा में चार लोग मार दिए गए, वो किसने मारे यह पता नहीं लगा? संभल हिंसा के दौरान जिस पुलिस अधिकारी को गोली मारो बे कहते हुए सुना गया, उस पुलिस अधिकारी को गुनहगार माना जाएगा? उस पुलिस अधिकारी पर हत्या का मुकदमा चलेगा? या ‘सरकार’ का ‘आयोग’ सरकार को खुश करने के लिए, सरकार के फेवर में ही रिपोर्ट देता रहेगा?
मोहम्मद शमी शानदार गेंदबाज़ है। उनके नाम कई रिकॉर्ड हैं। अपनी गेंदबाज़ी की बदौलत शमी ने अपना एक अलग मुकाम बनाया है। लेकिन वो पिछले काफी दिनों से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें चयनकर्ताओं से निराशा मिली है। उनका सलेक्शन ना किए जाने पर चयनकर्ताओं की नीयत पर भी सवाल उठे हैं। कुल मिलाकर शमी ‘खिलाड़ी’ हैं।
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैय्यद असीम वकार साहब ने कल एक ट्वीट किया था, जिसके बाद मीडिया और पत्रकार इसे बगावत व पार्टी में फूट बता रहे हैं।
वकार साहब एक वरिष्ठ व काबिल नेता है जिसमें कोई शक नहीं है, लेकिन पिछले 1–2 महीने से उनकी कांग्रेस पार्टी में जाने की चर्चा चल रही है, जिसका वकार साहब ने कोई खंडन नहीं किया है, लेकिन वो अभी भी डिबेट में बतौर AIMIM के प्रवक्ता ही बैठ रहे हैं।
वकार साहब कांग्रेस पार्टी में जानी की खबरों का खंडन करे, उनकी आगर कोई शिकायत है, तो पार्टी उस पर बिल्कुल तवज्जो देगी।
फिलहाल AIMIM उत्तर प्रदेश में कोई भी बगावत या फूट जैसा कुछ नहीं है..!
इस एक घटना से देखिए कि सियासी महत्तवाकांक्षा इंसान को ‘बड़ा’ बनाकर भी कितना छोटी बना देती है। काँग्रेस के एक सांसद हैं, जब वो ‘शाइर’ थे तब उनके लिए अतीक अहमद ‘बाप की हैसियत’ रखते थे। अतीक़ अहमद और उनके भाई की पुलिस कस्टडी में ऑन कैमरा हत्या हुई, लेकिन वो शख्स ‘बाप की हैसियत’ रखने वाले नेता की मौत पर ग़म का इज़हार भी नहीं कर पाया। और तो और सार्वजनिक तौर से "इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैही राजिऊन" भी नहीं कह पाया। ठीक है! उनकी कोई ‘निजी’ मजबूरी रही होगी।
आज उन्हीं उन्हीं अतीक़ अहमद के एक बेटे की सड़क दुर्घटना में जान चली गई। जिस शख्स के लिए अतीक अहमद ‘बाप की हैसियत’ रखते थे, वह शख्स आज भी खामोश है। आज भी उस शख्स में सार्वजनिक तौर पर "इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैही राजिऊन" तक कहने की हिम्मत नहीं है।
First Lancer, Nampally mein ek shakhs ke heart attack se inteqal ki ittelaa milte hi AIMIM Nampally MLA @Md_MajidHussain Sahab fauran mauqe par pahunche aur marhoom ke ghar walo'n se mulaqaat kar ta'ziyat pesh ki.
Unhone ghamzada khandaan ko tasalli dete hue yaqeen dilaya ki is mushkil waqt mein AIMIM Party unke saath mazbooti se khadi rahegi. Marhoom ki bachchiyo'n ki taaleem se lekar unki shaadi tak har mumkin madad ki jayegi.
पूर्व सांसद मरहूम अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद का झांसी के क़रीब एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में इंतिकाल हो गया।
अल्लाह तआला मरहूम अबान अहमद की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और उनके तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।
#AbaanAhmed