@alokrajRSSB एक घन्टे की एंट्री एक घण्टे का अतिरिक्त समय, बैठना फिर Examination टाइम, मानसिक तनाव बना हुआ है, एक घंटे अतिरिक्त समय परेशानी का सबब बना हुआ हे.....इसका समाधान निकाले।
आपका लगता है यह परेशानी केवल मुझे है तो आप इस पर पोल करवा सकते हैं, फीडबैक ले सकते हैं...
@alokrajRSSB एक घन्टे की एंट्री एक घण्टे का अतिरिक्त समय, बैठना फिर Examination टाइम, मानसिक तनाव बना हुआ है, एक घंटे अतिरिक्त समय परेशानी का सबब बना हुआ हे.....इसका समाधान निकाले।
आपका लगता है यह परेशानी केवल मुझे है तो आप इस पर पोल करवा सकते हैं, फीडबैक ले सकते हैं...
Telecom Companies ऐसे Recharge Plans offer करती हैं जिनमें ‘Daily Data Limits’ जैसे 1.5GB, 2GB या 3GB per day होती हैं, जो हर 24 hours में reset हो जाती हैं। बचा हुआ data midnight पर expire हो जाता है, जबकि उसके पूरे पैसे पहले ही दिए जा चुके होते हैं।
आपको 2GB के लिए charge किया जाता है। आप 1.5GB use करते हैं। बचा हुआ 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है। कोई refund नहीं। कोई rollover नहीं।
मैंने आज यह मुद्दा Parliament में उठाया की जिस data के लिए हमने पूरी payment की है, वो दिन समाप्त होने पर Expire नहीं होना चाहिए।
बचा हुआ data अगले दिन की data limit में carry forward होना चाहिए, ताकि users Data इस्तेमाल कर सकें जिसके लिए उन्होंने पहले ही pay किया है।
संसद में आज मेरी demands हैं -
1.सभी users के लिए Data carry-forward / Data rollover की सुविधा दी जाए। जो data दिन के अंत तक use नहीं होता, उसे अगले दिन की limit में add किया जाए, न कि validity खत्म होते ही ख़त्म कर दिया जाए।
2.अगले महीने के recharge amount में unused data का adjustment का option दिया जाए। अगर कोई user लगातार अपना data under-utilise करता है, तो अगले monthly recharge में उस value का adjustment या discount मिलना चाहिए। users को बार-बार उस लिमिट के लिए pay नहीं करना चाहिए जो वे use ही नहीं करते।
3.Unused data को relatives और friends को transfer करने का option दिया जाए। Unused data को user की digital property माना जाना चाहिए। उपभोक्ता को अपने daily data limit से unused data दूसरों को transfer करने की permission होनी चाहिए, बिल्कुल उसी तरह जैसे पैसे transfer किए जा सकते हैं।
आज मोबाइल डेटा कोई luxury नहीं, Digital oxygen बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियों की ये लूट बंद होनी चाहिए।
@alokrajRSSB जी ये अच्छा है बिना document attached किए form submit ho gya or ab 300 Rs add Documents 🤔 😔
पहले तो कभी बिना डॉक्यूमेंट submit नहीं होता था
Otr me mother name mistek devi ki जगह meena लिख दिया है @alokrajRSSB जी
Edit केसे होगा help me
Last date नजदीक है, काफी बार मेसेज mail किया है लेकिन कोई उत्तर ही नहीं दिया गया है @Radhemahwa @
Otr me mother name mistek devi ki जगह meena लिख दिया है @alokrajRSSB जी
Edit केसे होगा help me
Last date नजदीक है, काफी बार मेसेज mail किया है लेकिन कोई उत्तर ही नहीं दिया गया है @Radhemahwa @
@alokrajRSSB जी OTR मे पहले भर दिया था सही था फिर वापस वहीं विंडों शो हो गई जिसमें फिर से जानकारी भरवाई गई जिसमें अब हिंदी मे भरना था जब ही आगे फॉर्म की प्रोसेस की जा सकती है पहले सही था फिर दुबारा भरा उसमे माँ के नाम में मिस्टेक हो गई लिखने मे, 😔 help @alokrajRSSB जी
@alokrajRSSB जी OTR मे पहले भर दिया था सही था फिर वापस वहीं विंडों शो हो गई जिसमें फिर से जानकारी भरवाई गई जिसमें अब हिंदी मे भरना था जब ही आगे फॉर्म की प्रोसेस की जा सकती है पहले सही था फिर दुबारा भरा उसमे माँ के नाम में मिस्टेक हो गई लिखने मे, 😔 help @alokrajRSSB जी
@alokrajRSSB फॉर्म धीमी गति से भरे जा रहे हैं आपको कारण पता होगा @alokrajRSSB जी
बार बार क्या अपडेट...., कभी अंग्रेजी कभी हिन्दी, फिर... समझ से परे है नवाचार है या तमाशा, फिर update,
@alokrajRSSB फॉर्म धीमी गति से भरे जा रहे हैं आपको कारण पता होगा @alokrajRSSB जी
बार बार क्या अपडेट...., कभी अंग्रेजी कभी हिन्दी, फिर... समझ से परे है नवाचार है या तमाशा, फिर update,
एक बार फिर दोहरा रहा हूं..कर्मचारी चयन बोर्ड के अंदर के सिस्टम से बार बार OMR के बदलने को लेकर सवाल युवा उठा रहे हैं।।
क्यों न एक ऐसा सिस्टम डेवलप करे एग्जाम सेंटर पर ही OMR स्कैन हो वो भी अभ्यर्थियों के सामने 10 मिनट में एक रूम में हो जाएगी, फिर वो पब्लिक हो जाए कोई भी कभी भी डाउनलोड कर सके।
इसके लिए मोबाइल फोन का न उपयोग हो जो समय बच्चों को 5वें ऑप्शन भरने के लिए दिया जा रहा है इस समय में ही यह कार्य संपादित हो सकता है जैसे स्कैनिंग पूरी हो सारी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाए जो सभी के सामने हो जाए इस समय अभ्यर्थी पूरे राजस्थान की एक साथ डाउनलोड करके देख सके ताकि बाद में कोई अपडेट ना हो..
इसके लिए सरकार को सर्वर और संसाधनों की उचित व्यवस्था करनी चाहिए, हो सकता है एक बार थोड़ी महंगी पड़े लेकिन आगामी सभी भर्तियों में काम आएगी।
10 मिनट अभ्यर्थी अपने करियर और पारदर्शी एग्जाम के लिए इतंजार भी कर लेगा जो घंटे भर पहले एग्जाम सेंटर तथा एक दिन पहले एग्जाम देने के लिए अन्य जिलों में जा रहा है।
@alokrajRSSB जी आप इन बातों पर विचार करें..
इस से युवा जो एक्टिव होगा वो बाद में खुद रिजल्ट बना लेगा और चैक कर लेगा साथ में बैक डोर से एंट्री का सवाल भी नहीं उठाएगा..
कई लोग ऑनलाइन OMR का जिक्र कर रहे हैं इसमें केवल खुद के ही एसएसओ आईडी पर मिलेगी जो अभ्यर्थी अकेला ही देख पाएगा अन्य नहीं ऐसा ना हो सभी को मिले और वह भी तुरंत मिले।।
अगर OMR देरी से स्कैन होगी तो सवाल बाद में भी बनेंगे...
इसलिए ये कार्य युवा हित में जरूरी है।।
आप मेरे टेलीग्राम से जुड़ सकते हैं।।👇
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आप व्हाट्सएप कम्युनिटी से भी जुड़ सकते हैं।।
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@rajrm01
OMR SHEET घोटाले के आरोप
प्रत्येक छात्र और जिम्मेदार संस्था, विभाग और सरकार को अवश्य पढ़ना चाहिए।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से यह गंभीर आरोप लगाया जाता रहा है कि अंदरखाने OMR शीट बदली जाती हैं। इन आरोपों में कितनी सत्यता है और कितनी नहीं, यह तो गहन जाँच का विषय है, किंतु संस्थानों को इन शंकाओं से ऊपर उठते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इन आरोपों से बचने और व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए हरियाणा मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। हरियाणा में OMR शीट के साथ दो कार्बन कॉपियाँ संलग्न रहती हैं—एक कार्बन कॉपी परीक्षार्थी को दी जाती है और दूसरी उस परीक्षा केंद्र के पास सुरक्षित रखी जाती है, जहाँ संबंधित अभ्यर्थी ने परीक्षा दी होती है।
इस व्यवस्था से पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सेंटर की कार्बन कॉपियों को सील-पैक कर स्थानीय परीक्षा केंद्र पर ही सुरक्षित रखा जाना चाहिए तथा इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी अनिवार्य होनी चाहिए। जिस लिफाफे में ये कार्बन कॉपियाँ एकत्र की जाएँ, उस पर संबंधित कक्ष के दो परीक्षार्थियों के इस प्रकार हस्ताक्षर कराए जाएँ कि यदि भविष्य में सील से किसी प्रकार की छेड़छाड़ हो, तो वे हस्ताक्षर भी स्पष्ट रूप से क्षतिग्रस्त दिखाई दें।
इस प्रणाली के लागू होने से यदि भविष्य में किसी अभ्यर्थी को OMR शीट को लेकर संदेह हो, तो वह बोर्ड अथवा SOG में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद स्टूडेंट कॉपी, सेंटर कॉपी और मूल OMR शीट के आपसी मिलान के माध्यम से निष्पक्ष जाँच कर आरोपों की सत्यता स्पष्ट की जा सकती है, जिससे अभ्यर्थियों में पारदर्शिता और विश्वास दोनों को बल मिलेगा।
अधीनस्थ बोर्ड, RPSC तथा राज्य सरकार को चाहिए कि वे अन्य राज्यों में क्रमवार अध्ययन दल भेजें और वहाँ अपनाई जा रही श्रेष्ठ प्रक्रियाओं (Best Practices) को समझकर उन्हें राजस्थान में लागू करें। साथ ही केंद्र सरकार को भी भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करने वाले समस्त बोर्ड अध्यक्षों की एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करनी चाहिए, जिसमें परीक्षाओं के संचालन में आ रही समस्याओं, उनके संभावित समाधानों, विभिन्न राज्यों में सफल रही प्रक्रियाओं, भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने, फर्जी दस्तावेजों की पहचान तथा तकनीक की भूमिका जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाए।
इस प्रकार के समन्वित प्रयासों से न केवल भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि युवाओं के बीच व्यवस्था के प्रति भरोसा भी मजबूत होगा।
@narendramodi@PMOIndia@BhajanlalBjp@alokrajRSSB@RPSC1@RajCMO
मिस्टर आलोक राज जी आप कह रहे हो बच्चे पढ़ने लग गए इसलिए कट ऑफ ज्यादा जा रही है..जब आप चेयरमैन नहीं थे तब क्या बच्चे नहीं पढ़ते थे..तब क्या बच्चे अनपढ़ थे क्या ? ये सफाई देकर युवाओं के सपने चकनाचूर कर रहे हो @alokrajRSSB