सोनम वांगचुक सर के साथ देश की जनता भी अब भूख हड़ताल पर बैठ चुकी है,
तानाशाह सरकार को युवाओं की बात मांगनी ही होगी,
कब तक युवाओं के भविष्य को कुचला जाएगा??
मध्य प्रदेश के छतरपुर में आदिवासी अपने अधिकारों के लिए चिता पर लेटकर 'जल-सत्याग्रह' कर रहे हैं, लेकिन BJP सरकार को उनकी चीखें सुनाई नहीं दे रहीं
'केन-बेतवा परियोजना' के नाम पर आदिवासियों की ज़मीन छीनना, घर उजाड़ना और उनकी आवाज़ अन्याय है
इसे विकास का फ़र्ज़ी नाम देना पाप है
श्री सोनम वांगचुक जी पिछले 19 दिनों से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर हैं। उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए हम उनसे आग्रह करते हैं कि वे अपना अनशन ख़त्म कर अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी लगातार छात्रों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा और छात्रों को हर हाल में न्याय मिलकर रहेगा।
भाजपा सरकार अब छात्रों के सवालों से बच नहीं सकती। करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली इस विफल शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा।
@RahulGandhi@Wangchuk66
#NirmalChoudhary
दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक जी का आमरण अनशन हो या मध्यप्रदेश के छतरपुर का फांसी सत्याग्रह, हर मोर्चे पर आदिवासी समाज लोकतंत्र, संविधान, जल-जंगल-जमीन, शिक्षा और देश के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।
नेहा बोरा सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग के लिए जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठी हैं। यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में इतनी गंभीर है, जैसा कि डॉक्टरों द्वारा बताया जा रहा है, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। किसी भी लोकतंत्र में ऐसी स्थिति आने से पहले संवाद और समाधान होना चाहिए। हम नेहा बोरा सहित सभी अनशनकारियों के सुरक्षित स्वास्थ्य और शीघ्र समाधान की कामना करते हैं। सरकार को उनकी मांगों पर संवेदनशीलता और गंभीरता से संवाद करना चाहिए।
'Not a Political meeting'
छात्र संवाद के लिए कोटा पहुंचे राहुल
नेता विपक्ष Rahul Gandhi 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तहत Kota पहुंचे, जहां भारी संख्या में छात्र उनको सुनने आए. राहुल गांधी ने कहा कि उनके लिए ये कोई राजनीतिक मीटिंग नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य के लिए संवाद कार्यक्रम है, इसलिए वे इस संवाद में 'भाजपा, कांग्रेस या चुनाव' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे...
अगर यह संवाद वास्तव में छात्रों की चुनौतियों, उनके मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को हल करने की दिशा में है, तो यह स्वागत योग्य कदम है। उम्मीद है कि यह मंच छात्रों को सही दिशा देगा.
#ChhatronKiGoonj
ओडिशा की सिजीमाली पहाड़ियों में कोंध आदिवासी समुदाय 311 मिलियन टन बॉक्साइट के लालच में अपनी जल, जंगल और जमीन पर हो रहे कॉर्पोरेट हमले का डटकर मुकाबला कर रहा है। 1,549 हेक्टेयर की इस खनन परियोजना के लिए जंगलों को उजाड़ने और ग्राम सभाओं की सहमति पर सवाल उठने के बावजूद सरकारें और कंपनियाँ आगे बढ़ रही हैं। 2023 से जारी विरोध 2026 में हिंसक टकराव तक पहुँच गया, लेकिन आदिवासियों का संघर्ष जारी है। विकास के नाम पर आदिवासियों का विस्थापन, जंगलों का विनाश और संविधान प्रदत्त अधिकारों की अनदेखी कब तक? सिजीमाली सिर्फ एक पहाड़ी नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व, संस्कृति और प्रकृति की रक्षा की लड़ाई है।