#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@dpradhanbjp@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@priyankagandhi@Aamitabh2@bstvlive
देश में 25 लाख शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता लागू करने के विरोध एवं शिक्षकों को न्याय दिलाने हेतु मा @MPDharmendraYdv जी के नेतृत्व में मा सांसदों ने लोकसभा के अन्दर एवं बाहर जोरदार आबाज उठाई ।भारत सरकार को तत्काल प्रभाव से आवश्यक क़ानून बनाना चाहिए ।
सरकार ने चोरी–छिपे 2017 में संशोधन करके पुराने शिक्षकों पर 7 वर्ष बाद धोखा करते हुए टीईटी लागू किया है, जो कि सरासर ग़लत है।
हम शिक्षकों की यही माँग है कि आरटीई एक्ट की धारा 23(2) के प्रोवाइज़ो में पुनः संशोधन किया जाए और शिक्षकों को तनावमुक्त किया जाए।
#काला_कानून_वापस_लो
#freeTeachersfromBLO
चुनाव आयोग को चाहिए चुनाव के लिए अलग से BLO नियुक्त करें और उन्हें सम्मान जनक वेतन दे
मानदेय नहीं,क्योंकि BLO चुनाव में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है और वर्ष दर वर्ष चलने वाला काम है...
#FreeTeachersFromBLO
बंद कमरे में बैठकर मात्र संख्या के आधार पर विद्यालय बंद करने वाले जमीनी हक़ीक़त से कोसों दूर हैं ।युग्मन या पेयरिंग जैसे शब्दों का प्रयोग करके बंद विद्यालय को छिपा नहीं सकते ।अब अभिभावकों या ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर आ रहा है ।विद्यालय बंद होने से छात्र दूसरे विद्यालय में नहीं जा रहे हैं जिससे उपस्थिति गिर रही है ।जोकि विद्यालय बंद करने की नीति की विफलता बता रही है ।आँख मूँद कर काम करने वाले अधिकारी इस नीति की विफलता पर पर्दा डालने के लिये शिक्षकों पर दबाव बना रहे हैं कि वो छात्र को उसके घर से बुला कर लायें और इसके लिए शिक्षक को नोडल अधिकारी का नाम दिया जा रहा है ।शिक्षकों की मंच से आलोचना करके उन्हें अपमानित किया जाता है लेकिन जब उनसे ग़ैर शैक्षणिक कार्य लेना होता है तो उनके आगे अधिकारी लगाया जाता है जैसे नोडल अधिकारी ,बूथ लेवल अधिकारी,मतदान अधिकारी इत्यादि ।शिक्षक की नियुक्ति पढ़ाने के लिए हुई है ।घर घर से बच्चे बुलाने के लिये नहीं हुई है ।वार्ता में जिन नामचीन विद्यालयों से तुलना की जाती है क्या उन स्कूलों के प्रिंसिपल घर चक्कर लगाते हैं?शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है ।शिक्षक को 75% से कम उपस्थिति पर वेतन रोकने के पत्र जारी किए जा रहे हैं ।यह ताना शाही है ।इसके विरोध में जल्द ही शिक्षक राजधानी लखनऊ में आंदोलन करेंगे ।
#stopschoolmerger
#justiceforschoolchildren
#Harharmahadev
सैलरी1,5 लाख, केवल आना जाना और काम कुछ नहीं, जब हम यह बात एक सम्मानित शिक्षक के बारे में कहते हैं तब हमें पता होना चाहिए की 150000 यह संख्या बताना, आना जाना कुछ न करना, इन सारे शब्दों का ज्ञान हमें एक शिक्षक ने ही दिया है, जब हम कहते हैं कि एक शिक्षक काम नहीं करता, कामचोर है स्कूल में नहीं जाता जाता बच्चों को नहीं पढ़ाता तो हमें पता होना चाहिए यह विवेक और यह ज्ञान उसी शिक्षक ने हमें दिया है कि हम उसके बारे में ये टिप्पणी करने लायक हो गए हैं, या कर रहे, हैं जिस गुरु के दिए ज्ञान से हमें इस चर, अचर जगत के बारे में जानकारी मिलती है उसी गुरु के बारे में इतनी हल्की बात कहना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है ज्ञान की महत्ता तब भी थी, आज भी है, और कल भी रहेगी, ज्ञान तब भी राज करता था, आज भी राज कर रहा है, कल भी करेगा, ज्ञान की किसी से तुलना नहीं हो सकती है और ज्ञान को कोई उपदेश देने लायक इस जगत में कोई नहीं है, ज्ञान को उपदेश देने का अर्थ है कि अपने दामन में खुद झाँककर देख लेना चाहिए जब हम किसी पर एक अंगुली उठाते हैं तो 3 अंगुलियाँ कहती हैं पहले अपने आप को देखो और एक अंगुली ऊपर की तरफ इशारा करती है कहती है कम से कम ईश्वर से डरो जिन लोगों के मन में शिक्षकों के प्रति ये भाव हैं उनको अपने भी आत्मा में झांक के देखना चाहिए, और ईश्वर से डरना चाहिए , राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ 15/7/25