माननीय @SCofIndia ने संविधान की आत्मा को जीवित रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है और आयु या शैक्षणिक योग्यता में कोई छूट नहीं लेता, तो उसे Open मेरिट में ही गिना जाएगा।
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Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi, in his article “Somnath Swabhiman Parv: 1,000 Years of Unbroken Faith”, reflected on the enduring spiritual and civilisational significance of the Somnath Temple. He highlighted how Somnath stands as a powerful symbol of India’s resilience, self-belief, and unwavering faith, having risen time and again over a millennium despite repeated adversities.
The Prime Minister underscored that Somnath embodies the timeless spirit of Bharat that is rooted in heritage, guided by faith, and strengthened by collective resolve.
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राजस्थान के पूर्वी भाग के ग्रामीण क्षेत्रों का दिल है कन्हैया दंगल! यह सिर्फ लोकगीत नहीं, बल्कि मीणा और गुर्जर समुदाय की एकता, भाईचारे और समृद्ध संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन है।
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भारत के सभी न्यायालयों में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषितों-वंचितों एवं महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की तस्वीर लगाने के संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्रद्धेय भूषण रामकृष्ण गवई जी को पत्र लिखकर निवेदन किया।
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संघर्ष सबका होता है, लेकिन भारत की आदिवासी महिलाओं का संघर्ष सबसे अलग और सबसे कठिन है। वह कठिन परिस्थितियों में भी घर, बच्चे और समाज सब सँभालते हुए भी हिम्मत और उम्मीद की मिसाल बनी रहती हैं।
ये वीडियो पंजाब के पटियाला स्थित रेलवे कारखाने का है, जहां एससी, एसटी कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक़ और मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज करा रहे थे। तभी अचानक PLW की PCPO प्रीति कटियार अपनी गाड़ी लेकर वहां से निकलीं और स्थिति ने खतरनाक रूप ले लिया। गाड़ी अचानक तेज़ रफ़्तार से भगाई गई, जिससे हिट एंड रन जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई। एक कर्मचारी गाड़ी की चपेट में आते-आते बचा और कुछ दूरी तक बोनट पर लटकता रहा, लेकिन प्रीति कटियार ने ज़रा भी ध्यान नहीं दिया और गाड़ी लगातार भगाती रहीं। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने दौड़कर उस कर्मचारी की जान बचाई, वरना यह लापरवाही एक बड़ी दुर्घटना और जनहानि में बदल सकती थी। इस घटना ने न सिर्फ रेलवे प्रशासन की गैरजिम्मेदारी और असंवेदनशील रवैये को उजागर किया है, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हैरानी की बात है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद न तो स्थानीय प्रशासन ने प्रीति कटियार पर मुकदमा दर्ज किया और न ही रेलवे विभाग ने इस जातिवादी मानसिकता वाली अधिकारी को सस्पेंड करने की ज़रूरत समझी। प्रीति कटियार पर पहले से ही आरोप हैं कि उन्होंने SC/ST कर्मचारियों के प्रमोशन पर पाबंदी लगाकर उनके अधिकारों का हनन किया है और उनके कामकाज को जानबूझकर प्रभावित किया है। ऐसे में यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भेदभावपूर्ण सोच और सत्ता के दुरुपयोग का भी प्रमाण है। अब यह आवश्यक है कि रेलमंत्री स्वयं संज्ञान लेकर प्रीति कटियार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में न तो किसी कर्मचारी की जान से खिलवाड़ हो और न ही किसी वर्ग के अधिकारों का दमन हो सके।
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✊ सच्चाई को ज्यादा दिन दबाया नहीं जा सकता।
8 महीने बाद Naresh Meena जी को न्याय मिला।
“अंधेरा कितना भी गहरा हो,
पर सुबह होकर ही रहती है।”
🙏 इंकलाब जिंदाबाद
#WelcomeNareshMeena@NareshMeena__