छात्र लाइब्रेरी में मेहनत करते रह गए इधर सब मिलकर लुटते रहे।
SOG की FIR के अनुसार, बोर्ड में पिछले 9 वर्षों से अंकों में बढ़ोतरी का संगठित खेल चल रहा था। तत्कालीन अध्यक्ष बी.एल. जाटावत को इसकी पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने नियुक्तियाँ दीं।
कॉन्स्टेबल अनिल चौधरी द्वारा JEN भर्ती के टॉपर के अंक भी बढ़ाए गए थे। अनिल चौधरी पर REET-2021 तथा द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के पेपर लीक करने का भी आरोप है। इसके अलावा प्रयोगशाला सहायक भर्ती में भी अंकों में हेराफेरी की गई थी।
JEN भर्ती-2020 का पेपर पहले लीक हुआ, उसके बाद परीक्षा दोबारा कराई गई, लेकिन वह पेपर भी लीक हो गया।
गलत काम का गलत नतीजा।
एक न एक दिन सच सामने आ ही जाता है। सभी जिम्मेवार कर्मचारियों को और युवा मित्रों को मेरी सलाह, अपना सुकून गिरवी मत रखो, खुद अपने सिर पर नंगी तलवार मत लटकाओ।
बाकी आपकी मर्जी।
OMR SHEET घोटाले के आरोप
प्रत्येक छात्र और जिम्मेदार संस्था, विभाग और सरकार को अवश्य पढ़ना चाहिए।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से यह गंभीर आरोप लगाया जाता रहा है कि अंदरखाने OMR शीट बदली जाती हैं। इन आरोपों में कितनी सत्यता है और कितनी नहीं, यह तो गहन जाँच का विषय है, किंतु संस्थानों को इन शंकाओं से ऊपर उठते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इन आरोपों से बचने और व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए हरियाणा मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। हरियाणा में OMR शीट के साथ दो कार्बन कॉपियाँ संलग्न रहती हैं—एक कार्बन कॉपी परीक्षार्थी को दी जाती है और दूसरी उस परीक्षा केंद्र के पास सुरक्षित रखी जाती है, जहाँ संबंधित अभ्यर्थी ने परीक्षा दी होती है।
इस व्यवस्था से पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सेंटर की कार्बन कॉपियों को सील-पैक कर स्थानीय परीक्षा केंद्र पर ही सुरक्षित रखा जाना चाहिए तथा इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी अनिवार्य होनी चाहिए। जिस लिफाफे में ये कार्बन कॉपियाँ एकत्र की जाएँ, उस पर संबंधित कक्ष के दो परीक्षार्थियों के इस प्रकार हस्ताक्षर कराए जाएँ कि यदि भविष्य में सील से किसी प्रकार की छेड़छाड़ हो, तो वे हस्ताक्षर भी स्पष्ट रूप से क्षतिग्रस्त दिखाई दें।
इस प्रणाली के लागू होने से यदि भविष्य में किसी अभ्यर्थी को OMR शीट को लेकर संदेह हो, तो वह बोर्ड अथवा SOG में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद स्टूडेंट कॉपी, सेंटर कॉपी और मूल OMR शीट के आपसी मिलान के माध्यम से निष्पक्ष जाँच कर आरोपों की सत्यता स्पष्ट की जा सकती है, जिससे अभ्यर्थियों में पारदर्शिता और विश्वास दोनों को बल मिलेगा।
अधीनस्थ बोर्ड, RPSC तथा राज्य सरकार को चाहिए कि वे अन्य राज्यों में क्रमवार अध्ययन दल भेजें और वहाँ अपनाई जा रही श्रेष्ठ प्रक्रियाओं (Best Practices) को समझकर उन्हें राजस्थान में लागू करें। साथ ही केंद्र सरकार को भी भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करने वाले समस्त बोर्ड अध्यक्षों की एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करनी चाहिए, जिसमें परीक्षाओं के संचालन में आ रही समस्याओं, उनके संभावित समाधानों, विभिन्न राज्यों में सफल रही प्रक्रियाओं, भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने, फर्जी दस्तावेजों की पहचान तथा तकनीक की भूमिका जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाए।
इस प्रकार के समन्वित प्रयासों से न केवल भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि युवाओं के बीच व्यवस्था के प्रति भरोसा भी मजबूत होगा।
@narendramodi@PMOIndia@BhajanlalBjp@alokrajRSSB@RPSC1@RajCMO
चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा की अप्रत्याशित कट-ऑफ ने लाखों पढ़ने वाले युवाओं के मन में संदेह पैदा कर दिया है। इससे पहले की कई भर्तियों में आई ऐसी कट-ऑफ ने मेहनती युवाओं को बेचैन कर रखा है। सरकार भर्तियों का ढोल तो बजा रही है, पर बेरोज़गारों में फैली हताशा एक अलग ही कहानी बयां कर रही है।
@_lokeshsharma@alokrajRSSB
चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा कट ऑफ
कहीं न कहीं जब इतने प्रश्न उठ रहे हैं, तो उनका उत्तर देने वाला भी कोई होना चाहिए।
120 प्रश्नों की परीक्षा में सामान्यतः कोई भी अभ्यर्थी लगभग 10 प्रश्न तो छोड़ ही देता है। शेष 110 प्रश्नों में से 10–12 प्रश्न गलत हो जाते हैं। 1/3 नकारात्मक अंकन के कारण 12 गलत प्रश्नों पर लगभग 4 अंकों की अतिरिक्त कटौती हो जाती है। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 96 प्रश्न ही शुद्ध रूप से शेष बचते हैं।
यह आकलन उन प्रतिभाशाली छात्रों के संदर्भ में है, जो शीर्ष दस हजार अभ्यर्थियों में स्थान बना सकते हैं। किंतु यहाँ भर्ती प्रक्रिया में लगभग दोगुनी संख्या में, अर्थात कम से कम एक लाख अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। ऐसे में जब चयनित अभ्यर्थियों की मेरिट लगभग 87 प्रश्नों के आसपास बताई जा रही है, तो यह उच्च कट-ऑफ स्वाभाविक रूप से गंभीर संशय को जन्म देती है।
पूर्व में, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, तब डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जैसे सजग और सक्रिय विपक्षी नेता प्रत्येक भर्ती प्रक्रिया की गहराई तक जाकर ठोस प्रमाणों के साथ संदेहों को उजागर करते थे और उन्हें जनहित का मुद्दा बनाते थे। उस समय सरकार भी दबाव में आकर जांच कराती थी, जिससे कई परतें खुलकर सामने आती थीं। आज का विपक्ष इतना कमजोर प्रतीत होता है कि उसने जनता को लगभग ईश्वर भरोसे छोड़ दिया है।
यदि छात्रों के बीच इतना गहरा असंतोष और संदेह व्याप्त है, तो संबंधित संस्था और सरकार का दायित्व बनता है कि वह पूर्ण पारदर्शिता के साथ अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखे।
यदि किसी के पास संदिग्ध चयन या अनियमितताओं से जुड़ी कोई ठोस जानकारी है, तो उसे अवश्य ही SOG तक पहुँचाया जाना चाहिए और इस विषय को मुखरता के साथ उठाया जाना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्र नेताओं, अनेक परीक्षार्थियों और संबंधित विषय के जानकारों के बीच इस उच्च कट-ऑफ को लेकर लगातार विभिन्न स्तरों पर चर्चाएँ चल रही हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना आवश्यक है।
कुछ कैंडिडेट्स जो कि दूर दराज ठिकानों से आते हैं ने फीडबैक दिया था कि हो सके तो हम परीक्षा का टाइम चेंज करें ताकि उनको रात आकर शहर में रुकना पड़े। अब एकल शिफ्ट परीक्षाएं हम 10 बजे की जगह 11 बजे शुरू करने का प्लान करेंगे।
कुछ कैंडिडेट्स जो कि दूर दराज ठिकानों से आते हैं ने फीडबैक दिया था कि हो सके तो हम परीक्षा का टाइम चेंज करें ताकि उनको रात आकर शहर में रुकना पड़े। अब एकल शिफ्ट परीक्षाएं हम 10 बजे की जगह 11 बजे शुरू करने का प्लान करेंगे।