ओ३म।।
अपूर्वः कोऽपि कोशोड्यं विद्यते तव भारति।
व्ययतो वृद्धि मायाति क्षयमायाति सञ्चयात्।।
हे सरस्वती! आपका खजाना वास्तव में अवर्णनीय है; यह खर्च के साथ बढ़ता है, और संभालने से घटता है।
#भारतीयशिक्षाबोर्ड@yogrishiramdev@rakesh_bstpyp@pyptharidwar
ओ३म।।
अपूर्वः कोऽपि कोशोड्यं विद्यते तव भारति।
व्ययतो वृद्धि मायाति क्षयमायाति सञ्चयात्।।
हे सरस्वती! आपका खजाना वास्तव में अवर्णनीय है; यह खर्च के साथ बढ़ता है, और संभालने से घटता है।
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