किसी युवा को रिकॉर्ड करने पर थप्पड़ मारना और उसके बाद यह कहना कि उसने गाली दी थी जबकि घटना कैमरे में रिकॉर्ड है बेहद गंभीर मामला है।
प्रवेश वर्मा जी, आप एक मंत्री हैं। जनता से इस तरह का व्यवहार किसी भी जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता। जनप्रतिनिधि का काम जनता की आवाज़ सुनना है, डर या दबाव पैदा करना नहीं।
और अगर जनप्रतिनिधियों के इस तरह के व्यवहार को नजरअंदाज किया गया, तो इससे आम जनता के साथ बदसलूकी को बढ़ावा मिलने का संदेश जाएगा।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किसी भी पद से ऊपर है।
@BJP4India@BJP4Delhi
अमित शाह जी ने कहा था
बिहार को बाढ़मुक्त करेंगे। आज बिहार डूब रहा है, घर-परिवार बह रहे हैं, लेकिन शाह जी और भाजपा सरकार खामोश हैं।
बिहार पूछ रहा है वो वादा कहाँ गया?
इन दिखावटी एक्शन से कुछ नहीं होने वाला।
राजनीति और व्यवस्था का हिस्सा रह चुकी हूँ, इसलिए इतना जरूर समझती हूँ कि अगर इस तरह के नियम में पारदर्शिता नहीं रखी गई, तो इसका गलत फायदा भी उठाया जा सकता है।
सत्ता में बैठे नेता और सत्ता से हट चुके ऐसे नेता, जिनके अधिकारियों से संपर्क हैं, इस व्यवस्था को भी पैसे कमाने का जरिया बना सकते हैं।
अवैध निर्माण करने वाले से पैसा लिया जाएगा, अधिकारी अपना हिस्सा रखेगा और बाकी हिस्सा उन नेताओं तक पहुँच सकता है, जिनके अधिकारियों से संपर्क हैं। फिर शिकायत, RTI और जांच के नाम पर अधिकारियों पर दबाव बनाया जाएगा।
आखिर में क्या होगा?
भ्रष्टाचार का खेल चलता रहेगा और अवैध निर्माण वहीं खड़े रहेंगे।
अगर सरकार सच में अवैध निर्माण रोकना चाहती है और जनता की सुरक्षा की चिंता है, तो व्यवस्था सिर्फ नेताओं और अधिकारियों के हाथ में मत रखिए।
जनता के हाथ में सीधी हेल्पलाइन और शिकायत का अधिकार दीजिए। कोई भी नागरिक अवैध निर्माण या जर्जर इमारत की शिकायत कर सके, उसकी जांच हो और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक हो।
वरना नियम जनता की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि कुछ लोगों के लिए कमाई और दबाव का नया रास्ता बन सकता है।
MCD अधिकारी बेहद चतुराई से सिर्फ वहीं कार्रवाई दिखाते हैं, जहाँ उन्हें ऊपर से आदेश मिलता है और फिर फोटोबाजी के जरिए यह दिखाया जाता है कि अवैध निर्माणों पर सख्त एक्शन हो रहा है।
अगर सरकार और प्रशासन वास्तव में अवैध निर्माणों के खिलाफ गंभीर हैं, तो एक सार्वजनिक हेल्पलाइन नंबर/शिकायत व्यवस्था जारी की जानी चाहिए, जहाँ कोई भी स्थानीय निवासी शिकायत दर्ज कर सके चाहे मामला अवैध निर्माण का हो, नियमों के उल्लंघन का हो या किसी ऐसी जर्जर इमारत का, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।
शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर वास्तविक कार्रवाई हो।
जनता को फोटोबाजी नहीं, जवाबदेही और जमीन पर कार्रवाई चाहिए।
#IllegalConstruction #MCD #Delhi #Accountability #PublicSafety
@gupta_rekha@BJP4Delhi
घर से दूर, परिवार से दूर, आँखों में सपने लिए ये बच्चे दिल्ली आए थे। महंगे किराये देकर अपने भविष्य की नींव रख रहे थे।
मगर आज किताबों की जगह हाथों में रेत और मिट्टी रह गई। उनके सपने अधूरे रह गए और परिवारों की आँखों में उम्र भर का दर्द।
सरकार की नाकामी, व्यवस्था की लापरवाही और अधिकारियों के भ्रष्टाचार ने अगर सुरक्षा के नियमों को कागज़ों तक सीमित कर दिया, तो इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
ये सिर्फ़ इमारत गिरने की घटना नहीं, जवाबदेही के गिरने की भी तस्वीर है।
मुआवज़ा नहीं, इंसाफ़ चाहिए।
दिल्ली में इमारत गिरने से बच्चों की मौत के बाद निगम अधिकारी अचानक अवैध निर्माणों के खिलाफ जागरूक हो गए हैं। चार-पाँच मंज़िला अवैध इमारतों पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये कार्रवाई सिर्फ उसी इलाके तक सीमित है?
पूरी राजधानी में चार-चार, पाँच-पाँच मंज़िल के अवैध फ्लोर बने हुए हैं। आरोप है कि पहले उन पर सील लगाई जाती है, फिर मकान मालिक अधिकारियों को पैसे देकर मामला रफादफा कर देते हैं। अधिकारी और नेता मिलकर इस पूरे खेल को चलाते हैं।
लेकिन जब सच में बुलडोजर चलने की बारी आती है, तो चपेट में कौन आता है? गरीब झुग्गीवासी।
मैं फिर दावे के साथ कह रही हूँ अगर इस बार भी बुलडोजर चलेगा, तो अगली खबर कहीं न कहीं झुग्गियाँ टूटने की ही आएगी, किसी चार-पाँच मंज़िला अवैध इमारत की नहीं।
वाह, अब अवैध निर्माण पर कार्रवाई की बात हो रही है! 👏
चार मंज़िल से ऊपर की इमारतें सील होंगी या नहीं, यह अभी प्रमाणित नहीं है। लेकिन उम्मीद है सरकार जल्द स्पष्ट निर्देश देगी।
और अगर कार्रवाई होगी, तो सिर्फ़ अधिकारियों तक क्यों सीमित रहे?
जिन नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण होते हैं, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रासरूट तक जाइए, तब पता चलेगा कि यह खेल सिर्फ़ अधिकारियों का नहीं, राजनीतिक संरक्षण का भी है।
वरना हर बार कुछ इमारतें सील होंगी, कुछ फोटो खिंचेंगे और फिर वही पुराना खेल शुरू हो जाएगा।
जनता को सिर्फ़ सीलिंग नहीं, भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई चाहिए।
कल प्रधानमंत्री @narendramodi जी ने नॉर्थ कैंपस का दौरा किया, लेकिन सवाल यह है कि वहाँ छात्रों के असली मुद्दों पर बात क्यों नहीं हुई?
शिक्षा पर बात नहीं हुई।
छात्रों की सुरक्षा पर बात नहीं हुई।
बाहर से आकर रहने वाले विद्यार्थियों की व्यवस्था पर बात नहीं हुई।
उन मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनका छात्रों की ज़िंदगी से शायद कोई सीधा ताल्लुक भी नहीं।
और आज जब एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें वहाँ पहुँच रही हैं, तो सवाल सिर्फ़ रेस्क्यू का नहीं, जवाबदेही का है।
छह-छह घंटे बच्चे दबे रहे, लेकिन समय पर मदद क्यों नहीं पहुँच पाई?
रेस्क्यू ज़रूर हुए, लेकिन पहले वीडियोग्राफी और फोटो, फिर बचाव यह सोचकर ही शर्म आती है।
वहाँ की व्यवस्था की गुणवत्ता जाँचने के लिए छात्रों से बात करनी होगी, उनके दर्द को समझना होगा।
राजधानी शर्मसार है। देश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी आज एक काले दिन की गवाह है।
अब भाषण नहीं, जवाब चाहिए। छात्रों की जान से बढ़कर कुछ नहीं।
PG की इमारत गिरने से जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ। घायल छात्रों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करती हूँ।
• अपना घर छोड़कर पढ़ने आए छात्रों के लिए यह हादसा बेहद दुखद और चिंताजनक है।
• PG मालिक और प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि छात्रों को सुरक्षित आवास मिले।
• सरकार और संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी है कि सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित हो और लापरवाही पर कार्रवाई की जाए।
• अगर निगरानी में लापरवाही हुई है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
• मेरी माँग है कि निष्पक्ष जाँच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और छात्रों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए।
2600 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे उज्जैन-गरोठ सड़क का उद्घाटन होने से पहले ही सड़क धंस गई।
@nitin_gadkari जी, सवाल सिर्फ सड़क धंसने का नहीं है। सवाल यह भी है कि 2600 करोड़ लिखना जितना आसान है, इन पैसों का हिसाब लगाना उतना ही मुश्किल………
इतना भ्रष्टाचार, इतनी मिलावट और इतनी लापरवाही के बीच, जहाँ सड़क चार दिन नहीं चल पा रही, वहाँ विश्वगुरु बनने के दावे कितने खोखले लगते हैं।
आखिर जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा? @narendramodi Ji
भाई, सच दिखाने की जरूरत नहीं है।@BJP4India सरकार को गुस्सा आ जाता है जब कोई उनका सच दिखाता है। 😏
कहीं ऐसा न हो कि टूटी सड़कें दिखाते-दिखाते घर पर बुलडोजर आ जाए।@ravirajprayagi
• यहाँ सड़कें टूटेंगी, पुल गिरेंगे, गड्ढे बने रहेंगे।
• करोड़ों के घोटाले और भ्रष्टाचार चलते रहेंगे।
• लेकिन हम विश्वगुरु का नारा लगाते रहेंगे।
तो आप अपने घर की सलामती देखिए, सुरक्षा देखिए। बाकी देश तो ऐसे ही चलता रहेगा। 🙏
अयोध्या राम मंदिर तक जाने वाली सड़क उद्घाटन से पहले ही ढह गई, अब उसे ढकने के लिए बालू की जरूरत पड़ रही है।
• करोड़ों का बजट बताकर सड़कें बनती हैं।
• उद्घाटन से पहले ही सड़कें टूट जाती हैं।
• जनता की जान जाए तो किसी को फर्क नहीं पड़ता।
शर्म आनी चाहिए! जनता के टैक्स का पैसा सड़कों पर लगना चाहिए, न कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ना चाहिए। यहाँ लोग एक्सिडेंट में मर रहे हैं और जिम्मेदार लोग जवाब देने को तैयार नहीं हैं।
सड़क चाहिए, दिखावा नहीं। जनता को जवाब चाहिए, बहाने नहीं। @nitin_gadkari
दिल्ली का ट्रिपल इंजन विकास मॉडल 👇
सांसद बीजेपी के
विधायक बीजेपी के
पार्षद बीजेपी के
फिर भी वज़ीरपुर, पुल का ये हाल।
सड़कें टूटी हुईं, पूरा पुल कूड़े से भरा हुआ और जनता परेशान।
सदन से लेकर विधानसभा तक, विधानसभा से लेकर एमसीडी तक बीजेपी की सरकार… फिर भी ये हाल।
@BJP4Delhi@gupta_rekha