हर महीने वेतन से RGHS के नाम पर कटौती होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर बहुत सारे हॉस्पिटल में इलाज की सुविधा नहीं मिलती,हर बार टालमटोल कर दिया जाता हैं,कर्मचारी कोई एहसान नहीं, अपना हक मांग रहे हैं।
कृपया RGHS व्यवस्था को और मजबूत बनाइए ताकि हर कर्मचारी को समय पर बेहतर स्वास्थ���य सेवाएं मिल सकें।
#RGHS_कर्मचारियों_का_हक
@RajCMO
@BhajanlalBjp
Phone Pay के CEO समीर निगम जी कह रहे हैं कि
"UPI पर MDR Charge लगने के बाद भी 96% ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे"
अरे समीर निगम जी आप तो ये सब बात करो ही मत क्योंकि आपके कारनामे पहले से ही सबको पता हैं।
आपके Phone Pay से 399 का रिचार्ज करने पर आप 404 रुपए काटते हो, यानी 5 रुपए अतिरिक्त लेते हो आप प्लेटफॉर्म फी बोलकर।
आप लोगों ने लोगों को पहले आदत डलवाई और अब उसी का फायदा उठा रहे हो।
40% के नियम का सबसे ज्यादा असर आर्ट्स के अभ्यर्थियों पर 🙏🙏
40% का नियम सभी अभ्यर्थियों के लिए समान दिखाई देता है, लेकिन इसकी वास्तविक चुनौती आर्ट्स के अभ्यर्थियों के लिए अलग है।
आर्ट्स का अभ्यर्थी शुरू से ही इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, ह���ंदी जैसे विषयों पर ज्यादा मेहनत करता है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं में जब अंग्रेजी, विज्ञान और गणित का कठिन स्तर सामने आता है, तो उसके लिए 40% का आंकड़ा पार करना काफी मुश्किल हो जाता है।
दूसरी तरफ साइंस के अभ्यर्थी पहले से ही विज्ञान और गणित, रीजनिंग जैसे विषयों की तैयारी करके आये होते है। वह जीके में रात-दिन मेहनत करके कुछ अंक जुटा लेते हैं (बल्कि आर्ट्स का स्टूडेंट कितनी भी मेहनत करके साइंस, ���ंग्रेजी, गणित और रिजनिंग में चाह कर भी अंक नहीं जुटा पाते) और विज्ञान और गणित में मिले अतिरिक्त अंकों के सहारे 40% की सीमा किसी तरह पार कर लेता है।
यही कारण है कि एक ही 40% का नियम दोनों वर्गों के विद्यार्थियों पर व्यवहार में समान प्रभाव नहीं डालता।
हम यह नहीं कहते कि 40% का नियम पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि पेपर क�� स्तर पदों की संख्या और अभ्यर्थियों की वास्तविक तैयारी के अनुरूप रखा जाए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध हो सके।
क्योंकि एक बेरोजगार अभ्यर्थी एक परीक्षा के लिए सालों तक मेहनत करता है। यदि अत्यधिक कठिन पेपर के कारण वह 40% भी प्राप्त नहीं कर पाता और दूसरी ओर पद भी खाली रह जाते हैं, तो यह निश्चित रूप से गंभीर चिंतन का विषय है।
नियम ऐसा हो जो गुणवत्ता सुनिश्चित करे, लेकिन मेहन�� करने वाले हजारों युवाओं के भविष्य का रास्ता बंद न करे।
खासकर आर्ट्स के विद्यार्थियों की इस समस्या को समझना और उस पर संवेदनशीलता से विचार करना जरूरी है। 🙏
मीडिया वालों अब स्कूल आकर बताओं.....
अब कक्षा कक्ष क्षतिग्रस्त हो या ना हो, अब स्कूल में सुविधा हो या असुविधा, अब शिक्षक पढ़ाएं या ना पढ़ाएं, अब बच्चें सुरक्षित रहे या ना रहें, स्कूल में पानी की व्यवस्था हो या ना परंतु अब ये समस्याएं लोगों को दिखाई नहीं देगी।
अब यह सब दिखाने व���ले पर पॉक्सो एक्ट, राजकार्य में बांधा समेत अनेक धाराएं लगाई जायेगी।
https://t.co/wiPexg5tN5
आखिर सवाल अभ्यर्थियों की योग्यता पर ही क्यों?
स्कूल व्याख्याता (राजनीति विज्ञान) के 645 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में महज 67 अभ्यर्थियों का सफल होना बेहद चिंताजनक है। सबसे पीड़ादायक बात यह है कि राजनीति विज्ञान में लगातार तीसरी भर्ती में पद ���िक्त रहने की स्थिति बन रही है।
योग्य उम्मीदवारों की तलाश के लिए सरकार पूरा भर्ती तंत्र खड़ा करती है। परीक्षा आयोजित होती है हजारों अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं, कर्मचारी व अधिकारी लगाए जाते हैं और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
इतना सरकारी तंत्र और सार्वजनिक धन खर्च होने के बाद भी यदि वैकेंसी के अनुपात में योग्य अभ्यर्थी ही उपलब्ध नहीं हो पाते, तो ���र बार सिर्फ अभ्यर्थियों की योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
एक बार ऐसा हो सकता है कि योग्य उम्मीदवार कम मिले, दो बार हो तो समीक्षा की जरूरत है लेकिन ��गातार तीसरी बार वही स्थिति बने तो सवाल परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया पर भी उठना स्वाभाविक है।
क्या ऐसा प्रश्नपत्र तैयार नहीं किया जा सकता जिसमें विषय की वास्तविक समझ, शिक्षण क्षमता और अभ्यर्थी की योग्यता परखी जाए और 645 पदों के मुकाबले कम से कम 2-3 गुना अभ्यर्थी सफल होकर उपलब्ध हो सकें?
क्योंकि जब पद खाली रह जाते हैं तो नुकसान सिर्फ नौकरी चाहने वाले युवा का नहीं होता। ��ुकसान उस विद्यार्थी का भी होता है जो सरकारी स्कूल में शिक्षक का इंतजार कर रहा है।
सबसे दर्दनाक स्थिति उन युवाओं की है जिन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक किया, फिर मास्टर डिग्री की, वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और अब लगातार रिक्तियां खाली जाने के कारण अपना विषय छोड़कर दूसरी मास्टर डिग्री करने को मजबूर हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों को दोष देने से पहले प्रश्नपत्र निर्माण और परीक्षा प्रणाली की भी ईमानदारी से समीक्षा करने की आवश्यकता है।
क्योंकि सरकारी धन, युवाओं के समय और प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य को इस तरह दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
यह सिर्फ 645 पदों की भर्ती का मामला नहीं है,
यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो योग्य शिक्षक खोजने के लिए बनी है, लेकिन योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध कराने में लगातार असफल हो रही है। 🙏
#स्कूल_व्याख्याता #राजनीति_विज्ञान
एक आंदोलन मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के खिलाफ किया जायेगा।
गांव देहात से लेकर शहर के सामान्य यूजर हर महीने 5G के लिए 400-500 रुपए का रिचार्ज करवाते हैं और नेटवर्क 2G का आता है।
इससे बड़ा स्कैम और क्या होगा 🙏🙏🙏🙏
सालों से घर से दूर बैठे तृतीय श्रेणी शिक्षक साथी ट्रांसफर की राह देख रहे हैं।
इसी राह को लेकर आज जयपुर में 10000 शिक्षक साथी आंदोलन कर रहे हैं। संवेदनशील सरकार को संज्ञान लेना चाहिए।🙏🙏
#महाआंदोलन_05_अगस्त
थर्ड ग्रेड शिक्षकों का #ट्रांसफर होना चाहिए, विशेष category के साथ-साथ सबका ट्रांसफर होना चाहिए, सिर्फ 2018 से पहले वाले नहीं 2026 तक के सभी साथियों का ट्रांसफर होना चाहिए।
माननीय राजस्थान सरकार से पूरी उम्मीद है कि घर से दूर बैठे साथियों की जरूर सुनी जाएगी।
राजस्थान एकीकृत शिक्षक महासंघ इस मांग में अध्यापक साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाक�� खड़ा है।
Third grade transfer
@RESMA_7 @Dadarwal7 @JATbera1
माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी से शिक्षक साथियों की ओर से विनम्र निवेदन।
शिक्षा विभाग की मुख्य वेबसाइट शाला दर्पण पर विभाग के लगभग 90% कार्य जैसे—ऑनलाइन उपस्थिति, परीक्षा परिणाम अपलोड, स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC), प्रपत्र-10, अपार (APAAR) सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होते हैं।
दुर्भाग्यवश, यह पोर्टल अधिकांश समय तकनीकी समस्याओं से जूझता रहता है। वर्तमान में प्रपत्र-10 भरने की अंतिम तिथि 20 जुलाई निर्धारित है, लेकिन वेबसाइट न दिन में ठीक से चल रही है और न ही रात में। ऐसे में शिक्षक समय पर कार्य कैसे पूर्ण करें?
माननीय मंत्री जी से विनम्र आग्रह है कि शाला दर्पण पोर्टल की तकनीकी क्षमता और सर्वर व्यवस्था में शीघ्र सुधार कराया जाए, ताकि शिक्षक अनावश्यक परेशानी से बचें और विभागीय कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे हो सकें।
समय पर कार्य की अपेक्षा तभी उचित है, जब व्यवस्था भी समय पर साथ दे।
@RajCMO@rajeduofficial@Dadarwal7@JATbera1@UdtaPanchi__@MohanSihag24@RESMA_7@Ramududi07
#shala_darpan