#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
जगन्नाथ मंदिर रहस्य
जगन्नाथ मंदिर में मूर्तिपूजा नहीं होती है, मूर्तियां केवल दर्शनार्थ रखी गई हैं। और हिंदुस्तान का जगन्नाथ मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है जिसमें किसी भी प्रकार की छुआछात नहीं होती है।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
क्या आप जानते है जगन्नाथ मंदिर का निर्माण राजा इंद्रदमन ने करवाया था , परमेश्वर कबीर साहिब जी की कृपा से करवाया था , समुद्र देव ने क्यों निर्माणा धीन जगन्नाथ मंदिर 3बार तोड़ा था जानने के लिए
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
पुरी में कबीर चौरा इस बात का प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर साहेब ने जगन्नाथ मंदिर को पूरा करने में मदद की थी।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
जगन्नाथ मंदिर के पास एक चबूतरा बनवाया गया था जिसे आज कबीर मठ के नाम से जाना जाता है। वहीं पर बैठकर कबीर परमात्मा ने समुद्र को जगन्नाथ मंदिर तोड़ने से बचाया था।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
कबीर साहेब जी द्वारा जगन्नाथ का मंदिर बनवाना
राजा इंद्रदमन ने जितनी बार मंदिर बनवाया समुद्र ने उतनी बार मंदिर तोड़ दिया, फिर कबीर साहेब जी साधु वेश में प्रकट हुए और अपनी परम शक्ति से समुद्र को रोककर जगन्नाथ का मंदिर बनवाया।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने राजा इन्द्रदमन को आश्वस्त किया कि वे समुद्र को मंदिर तोडने से रोक देंगे। उन्होंने राजा को एक चबूतरा बनवाने को कहा, जिस पर बैठकर कबीर परमात्मा ने समुद्र को मंदिर तोडने से रोका था।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
वास्तव में असली जगन्नाथ कबीर साहेब जी हैं जिन्होंने समुद्र देवता को इसे नष्ट करने से रोककर जगन्नाथ मंदिर बनाने में मदद की।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
ज्यादातर लोगों का मानना है कि जगन्नाथ पुरी का मंदिर श्री कृष्ण ने राजा इंद्रदमन को आदेश देकर बनवाया था लेकिन सच्चाई तो यह है कि राजा इंद्रदमन ने जितनी बार भी मंदिर बनवाया, समुद्र ने वह मंदिर तोड़ दिया
कबीर परमात्मा ने हि दया
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
जगन्नाथ मंदिर के पास एक चबूतरा बनवाया गया था जिसे आज कबीर मठ के नाम से जाना जाता है। वहीं पर बैठकर कबीर परमात्मा ने समुद्र को जगन्नाथ मंदिर तोड़ने से बचाया था।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
एक बार कबीर परमेश्वर जी वीर सिंह बघेल के दरबार में चर्चा कर रहे थे। अचानक से परमात्मा ने खड़ा होकर अपने लोटे का जल अपने पैर के ऊपर डालना प्रारम्भ कर दिया। सिकंदर ने पूछा प्रभु! यह क्या किया, कारण बताईये।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
ज्यादातर लोगों का मानना है कि जगन्नाथ पुरी का मंदिर श्री कृष्ण ने राजा इंद्रदमन को आदेश देकर बनवाया था लेकिन सच्चाई तो यह है कि राजा इंद्रदमन ने जितनी बार भी मंदिर बनवाया, समुद्र ने वह मंदिर तोड़ दिया
कबीर परमात्मा ने हि दया कर के मंदिर बनवाया था।
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
ज्यादातर लोगों का मानना है कि जगन्नाथ पुरी का मंदिर श्री कृष्ण ने राजा इंद्रदमन को आदेश देकर बनवाया था लेकिन सच्चाई तो यह है कि राजा इंद्रदमन ने जितनी बार भी मंदिर बनवाया, समुद्र ने वह मंदिर तोड़ दिया
कबीर परमात्मा ने हि दया कर के मंदिर बनवाया था।
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
वास्तव में असली जगन्नाथ कबीर साहेब जी हैं जिन्होंने समुद्र देवता को इसे नष्ट करने से रोककर जगन्नाथ मंदिर बनाने में मदद की।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
कबीर साहेब जी द्वारा जगन्नाथ का मंदिर बनवाना
राजा इंद्रदमन ने जितनी बार मंदिर बनवाया समुद्र ने उतनी बार मंदिर तोड़ दिया, फिर कबीर साहेब जी साधु वेश में प्रकट हुए और अपनी परम शक्ति से समुद्र को रोककर जगन्नाथ का मंदिर बनवाया।
Real Jagannath God Kabir
#कैसे_बना_जगन्नाथजी_का_मंदिर
Real Jagannath God Kabir sat on a platform which is known as Kabir Chabutara and stopped the sea from demolishing the Jagannath Temple and this way He helped to make it.
#किस_किस_को_मिले_भगवान
♦️महाराष्ट्र के पुंडरपुर के महान संत नामदेव जी जिन्हें कबीर जी कलंदर नामक संत रूप में सन् 1270 (वि. सं.1327) में मिले थे उन्हें दीक्षा दी थी। उसका विवरण संत गरीबदास जी ने इस प्रकार दिया
गरीब, नामा के बीठ्ठल भये, और कलंदर रूप।
22 June God Kabir Prakat Diwas
#किस_किस_को_मिले_भगवान
♦️कबीर परमेश्वर जी जिंदा सन्त रूप में जम्भेश्वर जी महाराज (बिश्नोई धर्म प्रवर्तक) को समराथल में आकर मिले थे। अपना तत्वज्ञान समझाया। उन्होंने अपनी वाणी में प्रमाण दिया: -
जो जिन्दो हज काबे(समराथल) स्थान में आया और मुझे जगाया।
22 June God Kabir Prakat Diwas