My husband would be lucky to have a girl like me kind-hearted, well-mannered, God-fearing, prays 5 times, loves deeply, cooks well, dresses with good fashion sense, a little childish yet mature when it matters, educated, pretty, innocent face and real in this fake world.
उम्र रेत की तरह हाथों से फिसलती जा रही है, समय का प्रवाह बेहद तेज़ है। बरसों से ज़हन में बस यही एक सवाल रहा है कि कब कोई इच्छा पूरी होगी, कब जीवन का लक्ष्य करीब आएगा और कब इस घुटन भरे, कुंठित व्यक्तित्व से मुक्ति मिलेगी। मन बस इसी एक दिलासे के सहारे ज़िंदा है कि कभी न कभी, सही समय पर सब ठीक हो जाएगा; पर उस 'सही समय' का कोई अंदाज़ा नहीं है। अब न कोई मोह बचा है, न कोई आकांक्षा। जीवन पूरी तरह अनासक्त और बेपरवाह हो चुका है। कितना अजीब है न कि ज़िंदगी का सबसे कीमती दौर सिर्फ सोचने और एक कमरे की बंद दीवारों के बीच गुज़र गया। जो चीज़ बरसों पहले चाहिए थी, वो अगर अब मिल भी जाए, तो वैसी खुशी नहीं होगी। संघर्ष के रास्ते में इतने ग़मों से गुज़र चुका हूँ कि अब कोई भी हासिल मायने नहीं रखता...!!