@dhruv_rathee Tum mera bhai tha hai aur rahega
Ye kal ke gunde ye aaj politician ban baithe h jo khud ko Maharajdhiraj samjh baithe h
Inka jada samay khatm ho gya h thoda bacha h
नई NCERT की कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब को लेकर एक दिलचस्प बहस खड़ी हो गई है। किताब में बच्चों को बताया गया है कि बस्तर के अन्नमराजा को माणिक्यदेवी/दंतेश्वरी, विजयनगर के कुमार कंपन को देवी और छत्रपति शिवाजी को तुलजा भवानी से तलवार मिलने की पारंपरिक मान्यताएँ रही हैं। देवी से मिली तलवार।
नई किताब में लगभग 1000 से 1700 ईस्वी के इतिहास को “Resistance and Resilience” के फ्रेम में रखा गया है। राजपूतों, अहोमों, विजयनगर, मराठों, सिखों और जाटों के प्रतिरोध को प्रमुखता दी गई है। यानी केवल पाठ नहीं बदला है, इतिहास को देखने और बच्चों को दिखाने का फ्रेम भी बदला है।
इसीलिए असली सवाल पाठ्यपुस्तक निर्माण की पद्धति का है। धार्मिक आस्था, लोककथा और सांस्कृतिक परंपराएँ भी इतिहास के अध्ययन का विषय हैं। उन्हें पढ़ाया जाना गलत नहीं है। लेकिन इतिहास की कक्षा में बच्चे को यह फर्क भी उतनी ही स्पष्टता से समझाया जाना चाहिए कि आस्था क्या है, किंवदंती क्या है, साहित्यिक आख्यान क्या है और स्रोतों से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य क्या है।
और यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में अंबेडकर की ‘Annihilation of Caste’ जैसे ग्रंथों को लेकर सवाल उठने की खबरें भी सामने आई हैं। एक तरफ़ धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं को स्कूली इतिहास में जगह मिल रही है, दूसरी तरफ़ सामाजिक संरचना, जाति और असमानता की आलोचना करने वाले ग्रंथों को लेकर विवाद हो रहा है। इन दोनों प्रक्रियाओं को तथ्यों के आधार पर गंभीरता से देखना चाहिए।
इतिहास का काम बच्चों को किसी एक विचारधारा में ढालना नहीं, बल्कि उन्हें सवाल करना, स्रोतों को परखना और प्रमाण के आधार पर निष्कर्ष निकालना सिखाना है।
इसलिए सवाल केवल यह नहीं कि राजा की तलवार कहाँ से आई थी।
बड़ा सवाल यह है कि हमारे बच्चों की किताबों में क्या जोड़ा जा रहा है, क्या कम किया जा रहा है और इतिहास को किस नज़र से पढ़ाया जा रहा है?
आस्था का अपना स्थान है, इतिहास का अपना।
दोनों के बीच की रेखा मिटेगी, तो बच्चे इतिहास समझेंगे या मान्यताओं को इतिहास समझने लगेंगे?
महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
भारत की आज़ादी के लिए उनका संघर्ष, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
अमृतकाल के भारत की एक और तस्वीर
IIT खड़गपुर में साल 2024 में स्थिति-
43 विभागों में आदिवासी यानी ST प्रोफ़ेसर - 0
32 विभागों में दलित यानी ST प्रोफ़ेसर - 0
23 विभागों में पिछड़े यानी OBC प्रोफ़ेसर - 0
कैसे बनेगा सबका भारत, विकसित भारत, समृद्ध भारत।
डिस्क्लेमर- मेरिट का रोना रोने वाले कृपया यहाँ नज़र न आएँ, वरना NFS के आँकड़ों से लज्जित किया जाएगा। बशर्ते कि लाज़ बची हो।
92.04 % प्रोफ़ेसर - General Category
7.96 % प्रोफ़ेसर - SC, ST और OBC
अगर इन आँकड़ों में कोई बड़े बदलाव हुए हों, तो भाजपा सरकार बताए?
OBC, SC और ST की हक़मारी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में भी जारी है।
ये आँकड़े चंद साल पुराने हैं, जिनमें साफ़ दिख रहा है कि इन वर्गों की हिस्सेदारी कितनी कम है। सरकार को अब नए आँकड़े सामने रखकर देश को बताना चाहिए कि देश की इतनी बड़ी आबादी के कितने लोग IITs और बड़े विश्वविद्यालयों तक पहुँच पाए हैं? आखिर हिस्सेदारी का सच क्या है?
#IITs
आईआईटी बॉम्बे नुसार
"हम साहिल के असामयिक निधन से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में अपने पिछले संचार में दिए गए बयानों के लिए क्षमा चाहते हैं।इस घटना से जुड़े विवरण और परिस्थितियाँ अभी भी संबंधित अधिकारियों द्वारा जाँच का विषय हैं।
डूब कर मर जाना चाहिए ऐसे संस्थानों में कीड़े हैं
भाजपा के नेता देश के युवाओं की डिग्रियों को कूड़ा बना देना चाहते हैं और अपने बच्चों को विदेशों से डिग्रियाँ दिलाना चाहते हैं।
आख़िर यहाँ के स्कूल-विश्वविद्यालय आपकी ही सरकार सँवार रही है न? फिर अपने बच्चों को यहीं क्यों नहीं पढ़ाते? अपनी बनाई ‘विश्वस्तरीय व्यवस्था’ पर इतना भी भरोसा नहीं है क्या?
आरक्षण पर बहस अक्सर आँकड़ों से नहीं, धारणाओं और पूर्वाग्रहों से की जाती है।
जबकि सच यह है कि आँकड़े सामने रख दीजिए, पूरी तस्वीर खुद बोलने लगती है कि किसे कितना मिला और कौन आज भी अपनी हिस्सेदारी से दूर है।
आरक्षण, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के इन्हीं सवालों पर पूरी बातचीत @newstakofficial पर।
@kalisenachief Jo bhi hai bahut he Acha hai mansik bimar logo ki jagah jel he honi chahiye hum to kah rahe h lage hath tum bhi ek vivadit bayan de do tumhara bhi hisab kar diya jata
Phir jake chacha bhatija vahi jel me bhajan karte
@BJP4India Kya huva nadda dar gaye hum to tyari ke the janatr mantra me ane ke liye apne adhikaro ki mang ke liye
Aur hm tum logo ne rahat nhi di h सुप्रीम कोर्ट ne diye h ti jhuthi dilasa mat do deshvasiyo ko
@JPNadda Koi arakchad ko hath laga kar to dikhaye to phir bharat me vo higa jisko koi kalpna nhi kiya hoga
Aur jald he sare jagah pe jaha log apne baap dada ki bapansi samjh kar archan khaye baithe h uske liye bhi vishal kay andolan kiya jayega