राज्यसभा चुनाव में 'संख्या बल' और 'नैतिकता' का रोना रोने वाले पवन खेड़ा जरा अपनी चाटुकारिता और चमचागिरी कम कर और आंखें खोलकर अपनी ही पार्टी का इतिहास देख ले! जब केंद्र में 10 साल तुम्हारी सरकार थी, तब तुम्हारी पार्टी और कांग्रेस ने किस तरह के खेल खेले थे, उसके ये बड़े उदाहरण देख ले:
1. जून 2006 (महाराष्ट्र) - निर्दलीय राहुल बजाज:
महाराष्ट्र में संख्या बल कम होने के बावजूद कांग्रेस-NCP ने पर्दे के पीछे से निर्दलीय उम्मीदवार राहुल बजाज को खड़ा किया, पूरा समर्थन दिया और जोड़-तोड़ करके उन्हें राज्यसभा पहुंचाया।
2. मार्च 2006 (उत्तर प्रदेश) - कपिल सिब्बल:
यूपी में कांग्रेस के पास अपने दम पर एक सीट निकालने लायक भी विधायक नहीं थे। फिर भी कपिल सिब्बल को मैदान में उतारा गया और दूसरों के घरों में सेंधमारी व क्रॉस-वोटिंग कराकर उन्हें जिताया गया।
3. जून 2010 (झारखंड) - निर्दलीय धीरज साहू:
झारखंड में विधायकों की संख्या कम होने के बावजूद कांग्रेस ने दिमाग लगाया और निर्दलीय उम्मीदवार धीरज साहू पर दांव खेला। बाकी दलों के वोट मैनेज करके कम संख्या बल में भी जीत हासिल की।
4. फरवरी 2014 (आंध्र प्रदेश) - 3 उम्मीदवार:
आंध्र में बगावत के चलते कांग्रेस के पास जरूरी विधायकों का आंकड़ा नहीं था, फिर भी 3 उम्मीदवार (के.वी.पी. रामचंद्र राव, टी. सुब्बारामी रेड्डी और एम.ए. खान) उतार दिए गए और विपक्ष के वोटों में बिखराव का फायदा उठाकर तीनों को जबरन जिताया गया।
पवन खेड़ाजब तुम्हारी खुद की पार्टी संख्या बल कम होने पर निर्दलीय और अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर खेल किया था तब अपने इटली के बर्तन बेच कर उम्मीदवार जिताता था तब तो बहुत मजे लिए तुमलोगों ने तो दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपना खुद का 2004 से 2014 का इतिहास पढ़ ले ज्ञान देना बंद कर।
झारखंड और मध्य प्रदेश में संख्या बल ना होते हुए भी एक बार फिर ख़रीद फ़रोख़्त की मंशा से भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। देश के लोगों को कम तेल खाने और सोना ना खरीदने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री जी अब विधायकों की शॉपिंग करने निकलेंगे।
लेकिन जैसे हरियाणा राज्य सभा चुनाव में करोड़ों रूपये लगाने के बावज़ूद भाजपा ने मुंह की खाई थी, आगामी चुनाव में भी उनका यही हाल होगा। भाजपा के छल-बल का जवाब इंडिया गठबंधन परिवार मजबूती से देगा।