जो कार्तिक मास में सूर्योदय के बाद स्नान करता है वो अपने पुण्य क्षय करता है और जो सूर्योदय से पहले स्नान करता है वो रोग और पापों को नष्ट करने वाला हो जाता है। कार्तिक मास के स्नान की बड़ी भारी महिमा है।
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इस मास में ब्रह्माजी कहते हैं कि "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" इस महामंत्र का जितना अधिक जप करें उस व्यक्ति का उतना अधिक मंगल होता है और अधिक नहीं तो कम से कम कार्तिक मास में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" 108 बार तो जपना चाहिए��
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जिससे तुम व्यवहार करते हो उसका अभी और भविष्य में भला हो, इस भाव से जो आपका व्यवहार है तो आप जिस भी धर्म में हो इस भाव से व्यवहार क��ोगे तो आपका भला होकर ही रहेगा। सनातन सत्य सर्वत्र एक रूप होता है।
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आपकी बुद्धि में ये बिठा दो कि परमात्मा का सुख पाना ही सार है, हमारा अंत नहीं होगा, शरीर का अंत होगा। हमारी मौत नहीं होती और परमात्मा एकरस और सदा है। शरीर भी बदलता है संसार भी बदलता है तो बदलने वाले के लिए मांग - मांग कर युग बीत गए अब तो अबदल की ही मांग पैदा हो।
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शक्ति की उपासना सनातन धर्म के साधकों को नितांत आवश्यक है। भगवान रामचंद्रजी ने पद-पद पर लोगों के जीवन में कैसी जरूरतें आती और कैसी-कैसी उपासना करनी चाहिए... उसका प्रतिनिधित्व किया है।
सेतुबंध रामेश्वर की स्थापना श्रीरामचन्द्रजी ने की शिव की उपासना करने के लिए और युद्ध के पहले 9 दिन चण्डी की उपासना की, उसके बाद विजयादशमी को रामचन्द्रजी ने विजय किया।
भगवान कृष्ण ने सूर्यं की उपासना की... तो इन अवतारों ने हमें बताया कि आपके जीवन में शक्ति अगर पाना चाहते हो तो उपासना को अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए।
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