रजौली अम्बेडकर छात्रावास में बोला जा रहा है:
"यहां राधे-राधे नहीं चलेगा! जय भीम -जय संविधान चलेगा!"
सोच लीजिए,
हिन्दू देश में अब लोगों को भगवान का नाम लेने पर भी पाबंदी लगाई जा रही है!
और ये सब हिन्दू-विरोधी सोच को सर चढ़ाने से हो रहा है!
अभी कुछ दिन पहले #देवेंद्र#फडणवीस की सरकार इस रेलवे के जमीन को खाली करवाया हैं ।
झोपड़पट्टी का निर्माण फिर से शुरू किया जा रहा है वेल्डिंग का काम हो रहा है
ये जिहादी देश के लिए जहर है कभी नहीं सुधरेंगे
इनको योगी जी जैसा सख्त कार्रवाई की जरूरत है😡
इस वीडियो को शेयर करें ताकि इस कीड़ों को फिर से बुलडोजर के तले कुचला जा सके
अगर यह बीमारी फिर से बढ़ गई तो फिर कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ेगी रेलवे को।
#devendra @MumbaiPolice
#mumbai #महाराष्ट्र #maharastra
हम बच्चे ??
इसकी उम्र करीब 38 साल होगी नरेंद्र मोदी 12 साल से प्रधानमंत्री हैं
यानी 26 साल की उम्र तक इसे कांग्रेस सरकार में रोजगार नहीं मिला
यह बुजुर्ग हो गया अब यह मोदी सरकार को कोस रहा है
जब से क्रांतिकारी प्रबल प्रताप यादव जी ने माननीय सुप्रीम कोर्ट को ज्यूडिशियल सर्वेंट पुकारा है देश में ये चिंगारी उठ चुकी है, माननीयों को उनकी औकात दिखाने की। अब प्रयागराज के वकीलों ने माननीय ज्यूडिशियल सर्वेंट जी को उनकी औकात का ज्ञान कराया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुछ हिंदू युवाओं ने कुनाल कामरा के खिलाफ पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया।
पोस्टर में कुत्ता कुणाल कमरा पर मूत्र कर रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था, “हम छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंदू धर्म के प्रति नफ़रत फैलाने वालों का कभी समर्थन नहीं करेंगे।”
Cut Copy Paste 🔥
अभिजीत दीपके पर एक महिला ने
स्याही फेंककर उसका मुँह काला कर दिया है..
महिला का कहना है कि दीपके ने सोनम के साथ
गद्दारी की है,, उसे टेंट में मच्छरों में छोड़कर खुद AC कमरों में चला जाता है दीपके ✍️
क्या कहते हो भाई लोग.. स्क्रिप्ट केसी लगी ?
मोहम्मद यासीन दिल्ली की सड़क किनारे लगे पिलर तोड़कर कबाड़ निकालते पकड़ा गया। पूछने पर बोला, “भूखा हूँ।”
जब ईमानदारी से मेहनत करके कमाने की बात कही गई, तो उसके पास कोई जवाब नहीं था।
ये है देश के असली कीड़े जो देश को अंदर से ही खा रहे है।
यह है रंजीश की कहानी।
वह 38 वर्ष का एक बस कंडक्टर था। उसने अपनी पसंद की लड़की से प्रेम विवाह किया और उनकी एक बेटी हुई।
दो साल बाद उसकी पत्नी उसे और उनकी बेटी को छोड़कर खाड़ी देश चली गई। वहाँ उसे एक दूसरा पुरुष मिला, उससे प्रेम हो गया और उसने रंजीश तथा अपनी बेटी—दोनों को छोड़ दिया।
रंजीश ने अगले 8 वर्षों तक अपनी बेटी को अकेले पाला। उसने अपना सारा प्यार, समय और मेहनत उसी की परवरिश में लगा दी।
फिर उसकी पूर्व पत्नी ने अदालत में मुकदमा दायर किया। रंजीश ने अपनी उस बेटी की अभिरक्षा (कस्टडी) के लिए पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी, जिसे उसने अपने हाथों से पाला था। लेकिन अदालत ने बेटी की कस्टडी उसकी माँ और उसके सौतेले पिता को दे दी।
पहले उसने अपनी पत्नी को खोया। फिर व्यवस्था ने उससे उसकी बेटी भी छीन ली।
पूरी तरह टूट चुके रंजीश ने अंततः आत्महत्या कर ली।
क्या पुरुष के लिए भी कोई क़ानून की खिड़की खुली बची है कहीं
आरक्षण व्यवस्था पर एक गरीब सामान्य वर्ग (GC) के ऑटो-रिक्शा चालक पिता के भावुक सवाल
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"आख़िर आरक्षण व्यवस्था के कारण कितने बच्चों को अपने सपनों की कुर्बानी देनी पड़ेगी?"
पिता बोल रहा है कही एडमिशन नहीं हो पा रहा है
इनसे मिलिए ये हैं 13 साल के अभिषेक गुप्ता,
लखीमपुर खीरी में समाधान दिवस पर अकेले ही DM के सामने अपनी समस्या लेकर हाज़िर हुए,
कहां मेरी मां 3 हज़ार की नौकरी करती है हम भाई बहन की पढ़ाई का खर्च और घर का भी खर्च है जो मां की 3000 की सैलरी से नहीं हो पाता,
मेरे घर के एक रूम में ताई ने ताला लगाकर रखा है जो मेरे पिता के हिस्से का है, मै चाहता हूं कि उस ताले को आप लोग खुलवा दें
ताकि रेंट पर चढ़ा कर घर का खर्च निकल सके,
तभी अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ठीक है करवा देंगे,
अभिषेक ने पलट कर कहां करवा देंगे नहीं करवा दीजिए,
उसके बाद अभिषेक ने एक और बात कही कि आप लोगों का क्या आपको तो कमीशन मिल जाता है आपका हो जाता है,
और हम लोग तो गरीब हैं,
अधिकारियों ने अभिषेक को ज्यादा न बोलने की सलाह दी और चुप करा दिया लेकिन बच्चे से ये पूछने की हिम्मत नहीं की कि अधिकारियों के बारे में उसके मन में कमीशन लेने की बात कहां से आई?
एक बार Dm साहब को बच्चे को चुप कराने के बजाय उसे विश्वास दिलाना था कि अधिकारी भ्रष्टाचारी नहीं होते,
DM साहब चुप कराने से बच्चे के दिमाग़ से सवाल नहीं मिट जायेंगे,
जिस अपार्टमेंट में अभिजीत दिपके रह रहे थे, उसके मालिक ने एक बड़ा खुलासा किया है 🚨🙏
मालिक - मेरा अपार्टमेंट जंतर-मंतर से सिर्फ़ 100 मीटर दूर है। यह 3 BHK है। मैंने एक कमरा रोशन कुमार को दिया था। पिछले दो हफ़्तों से मैं देख रहा था कि मेरे अपार्टमेंट में कई लोग आ रहे हैं, लेकिन मुझे दखल देने की कोई ज़रूरत नहीं लगी, इसलिए मैंने उन्हें कभी नहीं रोका।
फिर पिछले हफ़्ते मुझे पता चला कि अभिजीत दिपके अपने पाँच-छह दोस्तों के साथ यहाँ आ रहे हैं। मैंने पुलिस को इस बारे में बताया, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। मैंने पुलिस को इसलिए बताया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि CJP की वजह से यहाँ कोई गड़बड़ हो।
रिपोर्टर - क्या आपको डर नहीं लगा? CJP के विरोध प्रदर्शन में गुंडे भी शामिल होते हैं।
मालिक - मैं एक जाट परिवार से हूँ। मुझे परवाह नहीं है कि यह किस तरह का विरोध प्रदर्शन है। अभिजीत दिपके आज विरोध प्रदर्शन वाली जगह के आस-पास भी नहीं थे। पुलिस ने मुझे फिर से फ़ोन किया और पता पूछा। मैंने उन्हें पता बता दिया और फिर उन्हें अभिजीत दिपके और उनके सभी दोस्त यहाँ मिले। आज जब मैंने फ़्लैट देखा, तो मुझे वहाँ बहुत सारी बीयर की बोतलें मिलीं जहाँ वे रह रहे थे। यह कैसा विरोध प्रदर्शन है, जहाँ सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं और CJP के ये सभी सदस्य बीयर का मज़ा ले रहे हैं?
बस इस विरोध प्रदर्शन को बंद कर दीजिए,
वे सिर्फ़ ध्यान खींचने के लिए छात्रों की भावनाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।"
साभार
वांगचुक के मरने इंतजार कर रहें इन कॉक्रोचों के आलाकमानों का, दिल्ली पुलिस और हाईकोर्ट ने प्लान फेल कर दिया।
इस मुर्ख दिप्के को नही मालूम कि वो खुद एक मोहरा है और, वांगचुक की ब_ली चढाकर इसके आलाकमान अपनी राजनीति की रोटियां सेंकना चाहते थे।
भाईसाहब! डिट्टो कॉपी पेस्ट कर दिया! 😂
इतिहास खुद को दोहराता है या ये भाई साहब इतिहास को दोहरा रहे हैं? अरविंद केजरीवाल जी के उन पुराने आइकॉनिक पलों की याद दिला दी।
'Same to Same' वाली बात बिल्कुल सच बैठती है! 🎯👇
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया है और उनकी जान बचाना बहुत ज़रूरी है।
इस कदम से हमारे संवैधानिक मूल्यों को कोई चुनौती नहीं मिलती।
संविधान ही इस देश के लोगों के मौलिक अधिकारों का सबसे बड़ा रक्षक है।
भारत एक ऐसा देश है जहाँ इस तरह का ध्यान रखा जाता है।
लोगों को अपनी समस्याओं और ज़िम्मेदारियों के बारे में जागरूक होना चाहिए; तभी सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा की जा सकती है।
: के.जी. बालकृष्णन, पूर्व CJI