I was a proud andhbhakt. I was so convinced that Modiji and BJP are going to lead this country the way we all deserved and desired. I had really high hopes and blind belief. Never questioned them once in all these years.
But now things look very different. RSS is corrupt, Ram Mandir Trust people are corrupt, ethnol, I don’t want to start on the CMs and other karyakartas.
Ye kya hogaya hai? Why is BJP behaving like Congress? Feeling betrayed and helpless. What are we (common man) supposed to do now. Hum kaha jaaye? Aage khai peeche kua! I hope they really fix the party and regain our trust back.
This is brilliant! 🔥
Inspired by Nitin Gadkari, dairy farmers in Jaipur have introduced M0, M50 and M100 milk.
M100 milk is best for health and can even be consumed by lactose intolerant people. Because it is pure water! 🤣
नरेंद्र मोदी जी के पास aadhar card है
नरेंद्र मोदी के पास Voter Id है
नरेंद्र मोदी के पास Passport है
नरेंद्र मोदी के पास Bank Account है
नरेंद्र मोदी के पास PAN Numbar है
नरेंद्र मोदी के पास कालेज की डिग्री है
लेकिन सुप्रीम कोर्ट और विदेश मंत्रालय के अनुसार ये डाक्यूमेंट्स Citizenship साबित नहीं करते
तो अब भारत का प्रधानमंत्री कैसे साबित करेगा की वो भारत का नागरिक है?
किसी के पास है क़ोई जवाब?
स्वर्ण मंदिर श्री हरमंदर साहिब पर 1830 में 900 किलो सोना लगाया गया था जो आज तक एक ग्राम भी कम नहीं हुआ हैं, जबकि एक लाख लोग तो वहां डेली लंगर चखते हैं।
और दूसरी तरफ हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ने श्री केदारनाथ धाम से 228 किलो सोना बदल दिया और अब श्री राम मंदिर दान चोरी प्रकरण..!!
चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं।
मनुष्यों के गिरने के
कोई नियम नहीं होते।
लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं
अपने गिरने के बारे में
मनुष्य कर सकते हैं।
~ नरेश सक्सेना
खुला पत्र (An Open Letter)
विषय: परीक्षा केंद्रों पर सनातन प्रतीकों के साथ भेदभाव और समान नियमों की माँग
प्रति,
@PMOIndia | @EduMinOfIndia | @dpradhanbjp | @NTA_Exams | @HMOIndia
महोदय,
यह खुला पत्र देश के लाखों सनातनी छात्र-छात्राओं की उस गहरी पीड़ा, मानसिक तनाव और आक्रोश की अभिव्यक्ति है, जिसका सामना वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान करने को विवश हैं।
परीक्षाओं में सुरक्षा, शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखना निस्संदेह आवश्यक है और हम इसका पूर्ण समर्थन करते हैं। किंतु प्रश्न यह है कि सुरक्षा की आड़ में केवल सनातन आस्था के प्रतीकों के प्रति ही इतनी कठोरता क्यों दिखाई जाती है?
देश के विभिन्न भागों से समय-समय पर ऐसी घटनाएँ सामने आती रही हैं, जहाँ परीक्षा केंद्रों पर छात्र-छात्राओं के हाथों से पवित्र कलावा काट दिया जाता है, उनकी दीक्षा की तुलसी कंठी और जनेऊ उतरवा लिए जाते हैं। ये वस्तुएँ कोई साधारण सजावटी आभूषण नहीं, बल्कि हमारी जीवन-पद्धति, संकल्प और श्रद्धा के अभिन्न अंग हैं। परीक्षा जैसे तनावपूर्ण वातावरण में इस प्रकार की कार्रवाई किसी भी परीक्षार्थी की धार्मिक स्वतंत्रता और आत्मसम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
और यहीं सबसे गंभीर प्रश्न खड़ा होता है।
जहाँ एक ओर बुरखा या हिजाब जैसे धार्मिक पहनावों के संबंध में सम्मानजनक मैनुअल स्क्रीनिंग अथवा पृथक जाँच व्यवस्था की जाती है, वहीं दूसरी ओर सनातन परंपरा से जुड़े कलावा, तुलसी कंठी और जनेऊ जैसे प्रतीकों को कई स्थानों पर जबरन हटाने या काटने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
यदि सुरक्षा की दृष्टि से वैकल्पिक जाँच व्यवस्था एक स्थिति में संभव है, तो वही संवेदनशीलता और सम्मान सनातन प्रतीकों के लिए क्यों नहीं अपनाया जाता?
नियमों की यह असमानता और प्रतीत होने वाला दोहरा मापदंड किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हम किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का विरोध नहीं करते और न ही किसी के लिए प्रतिबंध की माँग करते हैं। हमारी अपेक्षा केवल इतनी है कि जो सम्मान, सुविधा और संवैधानिक संरक्षण एक नागरिक को प्राप्त है, वही समान रूप से प्रत्येक नागरिक को भी प्राप्त हो। समानता का अर्थ विशेषाधिकार नहीं, बल्कि समान मानदंड और समान व्यवहार है।
अतः @EduMinOfIndia एवं @NTA_Exams से हमारी स्पष्ट माँग है कि-
1. सभी परीक्षा केंद्रों के लिए एक समान, पारदर्शी और संवेदनशील दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
2. सुरक्षा जाँच के नाम पर कलावा, जनेऊ, तुलसी कंठी अथवा अन्य धार्मिक प्रतीकों को जबरन काटने या अपमानित करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
3. यदि किसी धार्मिक पहचान से जुड़े पहनावे अथवा प्रतीकों के लिए विशेष जाँच व्यवस्था उपलब्ध है, तो वही सिद्धांत बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों पर समान रूप से लागू किया जाए।
4. सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु स्पष्ट एवं एकरूप प्रोटोकॉल तैयार किए जाएँ।
भारत का संविधान समानता और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों की गारंटी देता है। इसलिए यह अपेक्षा अनुचित नहीं कि परीक्षा व्यवस्था भी इन्हीं संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप संचालित हो।
हम किसी के अधिकारों का हनन नहीं चाहते, किंतु अपने अधिकारों के साथ भेदभाव भी स्वीकार नहीं करेंगे।
भवदीय,
कार्तिक पुरी
एक जागरूक दशनामी संन्यासी
#EqualityInExams #EqualRulesForAll #StopDoubleStandards #RightToFaith #SanatanDharma
बात करते हैं मझधार की
धाराओ को मोड़ना चाहते हैं
किनारों पे खड़े हुए लोग
बदल सकते नहीं खुद को
देशदुनिया बदलना चाहते हैं
लकीरो पे चले हुए लोग
धरती दिखती नहीं जिन्हें
आसमान उतार लाना चाहते है
सितारों के डसे हुए
अध्धो-पव्वो,पानी-बिजली
चावल-चीनी में बिक जाते हैं
कतारों में लगे हुए लोग
@shradhasumanrai One needs taste and discernment to understand and appreciate craftsmanship
The doleful lack of it and herd behaviour drives people to brands
Do You All Agree?
If The Modi Govt Truly Believes In The Efficiency Of Ethanol E85 As A Fuel;
Then They Should Use It For All VIP Jets & Helicopters Used By Modi And His Ministers.