आचार्यजी द्वारा बोली गई लोकधर्म की सब बातें सामने आने लगी हैं,आचार्यजी आपका आभार की आपने हमे लोकधर्म और वास्तविक धर्म की सही परिभाषा समझाई है🙏🙏
Posted by Bhumika motwani on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/8cN45HVrRY
#AcharyaPrashant
आचार्य जी के बदौलत मै खेल के मैदान में एक अच्छा नज़जिए से जीवन मै आगे बढ़ रहा हूं। उनके ज्ञान के बदौलत खेल को एक अच्छी दिशा देकर कुछ बदलाब लाने की कोशिश पे हूं।
अभी सिख कर सात महीने ही हुआ है ओर आगे मै प्रोफेशनल के तरह खेलूंगा ओर मुझे कंपटीशन पे भाग भी लेना है क्यों कि मेरा इरादा कुछ अलग है।
मै एक वैगन हूं और मेरे यहां बहत सारे मांसाहारी है ओर उनका तर्क ये है कि स्पोर्ट्स बिना नॉनवेज के नहीं हो सकता ओर ज्यादा तरह सारे स्पोर्ट्स ओर सारे स्तर पे ये माना गया है की बिना मांस के स्पोर्ट्स नहीं हो सकता ओर ये गलत भी है। नोवाक जोकोविच भी वैगन है, ओर भी बहत है। इधर तो सीधा सीधा प्राणी पर ज्यादा क्रूरता हो रहा है ओर ज्यादा मात्रा में।
मै खेल के द्वारा आचार्य जी का ओर वैगन का प्रमोशन करना चाहता हूं जितना ज्यादा हो सके, जिससे पशु की हत्या रोकी जाए और बहत लोगों को आचार्य जी का संदेश भी पहुंचाया जा सके।
ओर आगे जाके कोच ओर कुछ भी बने तो भी यही ही करेंगे जहां आंतरिक ओर बाहरी बदलाब को लाया जा सके जो अच्छा हो सभी के लिए।
कभी नहीं पता था कि आचार्य जी को सुनने के बाद जीवन मै कुछ इतना कर पाएंगे करके, पहले तो घाटियां कम मै व्यस्थ थे बस, अभी तो जो भी करेंगे बस युद्ध ही करेंगे, वो तो लगातार चलता ही रहता है।
आसा करता हूं जो कोई भी आचार्य जी से जुड़ा है, सब मिलके कुछ अच्छा कर पाए जीवन मै ओर करने की प्रयास मै है ओर कर भी रहे है जिसे अभी का भला हो पाए।
🔥✊
Posted by Girish Majhi on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/jW6ObW1zaS
#AcharyaPrashant
🪺 गतिविधि 🪺
🐦इस कहानी से मैं बहुत रिलेटे कर पा रही हूं।
🐣मेरे साथ भी ऐसा ही होता आया है, जब एक चीज़ को ठीक करने जाऊ तो दुसरी चीज़ बिगड़ जाती है। मेरी गलती अभी तक यही होती आयी है की मैं बस बिमारी के लक्षणों को ठीक करने को कोशिश करती आयी हूं। जैसे भीतर ईर्ष्या का उठना , आलस , जिम्मेदारी
से भागना, डर इन सबको मैं अलग अलग देखती आयी हूं इसी कारण एक को ठीक करने जाऊ तो दुसरी उफान मारती है और थोड़े दिनों बाद जिसे ठीक करने के लिए जद्दोजहद से मेहनत करी थी वह भी वापस आ जाती है।
🐣यदी मुझे इन सबसे छुटकारा पाना है तो अहम से छुटकारा पाना होगा। ऐसा नहीं हो सकता की जो मुझे बहुत परेशान करता है बस उससे छुटकारा पा जाऊ, जाएगा तो सब जाएगा। एकाध भी कुछ बच गया तो वह अहंकार का ही लक्षण होगा और फिर अहंकार हरेक लक्षण बार बार दिखाता ही रहेगा।
🐣मुझे बस विशिष्ट समस्या का ही समाधान चाहिए होता है जो की मुझे बहुत परेशान करती रहती है!और बाकी जो समस्या तो है पर मुझे उतना परेशान नहीं करती मुझे उनसे कुछ दिक्कत नहीं होती। ऐसा आधा अधुरा इलाज नहीं काम करेगा , मिटना ही है तो हरेक समस्या के मूल पर ही वार करना होगा वह है अहंकार...........
✏️आटे और नमक में न उलझकर सिधे मुर्खता पर ही वार करना होगा।
Posted by Tanaz on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/xgrplIVBj6
#AcharyaPrashant
आज कबीर साहब ❤️ की जयंती है। मुझे मेरे बचपन का एक किस्सा याद आता है, जब मैं पहली बार विद्यालय गया तो बच्चे प्रार्थना बोल रहे थे। जिस बच्चे को कुछ भी नहीं पता वो बोला कि ये सारे रो क्यों रहे हैं,सारी भीड़ एक साथ विलाप कर रही है। ये भी भला कोई तरीका हुआ। वहीं पर प्रार्थना के बाद पारंपरिक कबीर वाणी की धुन में साहब के दोहे सुने। मुझे स्कूल में जो कुछ अच्छा लगा बस वहीं था। आज भी जब मैं कबीर वाणी सुनता हूं,उस स्कूल के पहले दिन पर पहुंच जाता हूं ,लगता है ज्यों जिंदगी शुरू ही हो रही हो।
फिर मैंने पिताजी से साहब के कुछ किस्से सुने,तो लगा कि ये जो है बड़े हाजिर जवाब है। ऐसी हाजिर जवाबी दुर्लभ है।
अब तो साहब जिंदगी का अहम हिस्सा हो गए हैं। काव्य में इतने कमाल का writer कोई है ही नहीं। संत शिरोमणि सारे संतों को अपने में समेट लेते हैं।
मेरा जिंदगी में जब भी कुछ टूटता है,छूटता है। तो मुझे साहब याद आते हैं "भला हुआ मोरी गगरी फूटी।
मैं पनिया भरण से छूटी।।
मोरे सर से टली बला।।"
साहब किसी भी बात के धागे खोलने में माहिर हैं। जब इश्क़ पर बोलते हैं तो एक ही ग़ज़ल लिखी "हमन है इश्क़ मस्ताना" सारा मामला निपटा दिया। ये होती है साहिबी कि कम शब्दों में ऊंची से ऊंची बात को भी खोलकर रख दिया।
एक भजन है जो मैंने सुना है और प्रचलित है" तने तो मेरा पिया मोह लिया रे! चमक चुंदड़ी वाली"
चमक और चुंदड़ी से मोह ही हो सकता है प्रेम नहीं । ये कमाल सिर्फ उनकी वाणी में ही है।
जब वो कहते हैं कि"साहिब तेरी साहिबी हर घट रही समाय " ज्यों धुएं के नीचे प्रकाश छुपा हुआ है वो वैसे ही हर घट में छुपा हुआ है।
जब कभी उदास होता हूं,बुक स्टॉल पर अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिलता है या लोगों से आहत होता हूं तो भी साहब याद आते हैं कि जगत में कैसा नाता रे!
जिंदगी के हर मुद्दे पर साहब के पद या दोहे मिल जाते हैं। वे दोहे ही बोध सूत्र हैं,बात एक दम प्रकट कर देते हैं।
"चाहत मिटी चिंता मिटी मनवा बेपरवाह"
वो बेपरवाही ही चाहिए जिंदगी में।
"फिक्र सबको खा गई फिक्र सबका पीर।
जो फिक्र का फाका करे ताकों नाम फकीर।।"
आचार्य जी का बहुत धन्यवाद हमें साहब जैसे जादूगरों से मिलाने के लिए।
कबीरा यह घर प्रेम का,खाला का घर नाहीं,
सीस उतारे भुइं धरे,तब पैठे घर माहीं !!
Posted by Yogesh Viyogi on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/jGrLcQcEMm
#AcharyaPrashant
भ्रम से आज़ाद हैं बिषयों के दास नहीं, जीते हैं आनद में संसार की आस नहीं
Posted by Harihara Samal on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/OBijxvlIXD
#AcharyaPrashant
💯💯 यह बात मुझे पहले से दिखाई देती थी।
आज आचार्य जी ने स्वयं कह दिया ।
💥हम जब इंसान ही नहीं बन पाए हैं, तो आज़ाद कैसे होंगे?
🤨हम अंधविश्वास, संकीर्ण स्वार्थ, छोटी सोच और गहरे तामस में डूबे हुए हैं।
💪आचार्य जी हमें सबसे पहले इसी स्थिति से मुक्त होने के लिए ललकार रहे हैं।
✋️ज्ञान और विज्ञान — ये तो अभी हमारे लिए बहुत दूर की बातें हैं।
Posted by Ipsita माया on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/LIKKu2Wudz
#AcharyaPrashant
नदियाँ प्राचीन कार्बन को पुनः वायुमंडल में छोड़ रही हैं:
हजारों वर्षों से भूदृश्यों में संग्रहित कार्बन नदियों के माध्यम से वायुमंडल में वापस जा रहा है, और इसके लिए मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हो सकती हैं ।
दुनिया भर की नदियाँ प्राचीन कार्बन को वापस वायुमंडल में छोड़ रही हैं। इस खोज ने वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित कर दिया है और यह सुझाव दिया है कि मानवीय गतिविधियाँ प्राकृतिक परिदृश्य को पहले अनुमान से कहीं ज़्यादा नुकसान पहुँचा रही हैं।
शोधकर्ताओं को पहले से ही पता था कि नदियाँ वैश्विक कार्बन चक्र के हिस्से के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन छोड़ती हैं - गैसों की अल्पकालिक गति जो जीवित चीजों के बढ़ने और सड़ने के दौरान होती है। माना जाता है कि वे हर साल लगभग 2 गीगाटन कार्बन उत्सर्जित करती हैं।
लेकिन जब ब्रिटेन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के जोश डीन और उनके सहयोगियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि यह कार्बन वास्तव में कितना पुराना है, तो उन्होंने पाया कि वैश्विक नदियों से होने वाले उत्सर्जन का लगभग 60 प्रतिशत हजारों वर्ष पुराने भंडारों से आता है।
टीम ने 26 देशों के 700 से अधिक नदी खंडों से निकलने वाले कार्बन और मीथेन की आयु का आकलन करने के लिए रेडियोकार्बन डेटिंग का उपयोग किया।
डीन कहते हैं, "जब हमने सभी डेटा एकत्र किए, तो हमें वास्तव में आश्चर्य हुआ कि [निकाली जा रही कार्बन का आधे से ज़्यादा हिस्सा] इन बहुत पुराने कार्बन भंडारों से आ रहा है।" "इन पुराने कार्बन भंडारों से एक तरह का निरंतर रिसाव या पार्श्व प्रवाह होता है।"
प्राचीन कार्बन चट्टानों, पीट बोग्स और वेटलैंड्स में फंसा हुआ है। निष्कर्षों से पता चलता है कि नदियों के माध्यम से हर साल इसका 1 गीगाटन वापस वायुमंडल में छोड़ा जा रहा है। इसका मतलब है कि पौधे और मिट्टी इस प्रभाव का प्रतिकार करने के लिए हर साल पहले से सोचे गए समय से लगभग 1 गीगाटन अधिक CO₂ वायुमंडल से हटा रहे हैं।
न्यूयॉर्क के मिलब्रुक स्थित कैरी इंस्टीट्यूट ऑफ इकोसिस्टम स्टडीज के टेलर मावारा कहते हैं, "यह नदियों से निकलने वाले CO2 उत्सर्जन की आयु का पहला वैश्विक संश्लेषण है, जो बहुत अच्छा है।"
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नदियाँ इतना पुराना कार्बन क्यों छोड़ रही हैं। यह जलवायु परिवर्तन और अन्य मानवीय कारणों से हो सकता है।डीन कहते हैं कि प्राकृतिक परिदृश्य को बाधित करने वाली गतिविधियाँ, इस ओर इशारा करती हैं कि नदियों द्वारा छोड़ा जा रहा कार्बन 1990 के दशक से "पुराना होता जा रहा है"।
वे कहते हैं, "संभावना है कि हम इन दीर्घकालिक कार्बन भंडारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, और परिणामस्वरूप, हम इस मार्ग से अधिक पुराने कार्बन को बाहर निकलते हुए देख रहे हैं।"
उदाहरण के लिए, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान के कारण पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से कार्बन का उत्सर्जन हो सकता है या चट्टानों के अपक्षय की दर में तेज़ी आ सकती है। पीटलैंड की निकासी या वेटलैंड्स के सूखने जैसी अन्य गतिविधियाँ भी इसमें योगदान दे सकती हैं। डीन इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ज़्यादा काम करने की ज़रूरत हैयह निर्धारित करना आवश्यक है कि किस हद तक मानवीय गतिविधियां इस प्रक्रिया को संचालित कर रही हैं, तथा समय के साथ कार्बन उत्सर्जन में किस प्रकार परिवर्तन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह एक जरूरी शोध प्रश्न है। "अगर हमें लगता है कि हम इन जलाशयों में पुराना कार्बन जमा कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, तो यह जानना वाकई महत्वपूर्ण है," उन्होंने कहा। निष्कर्षों का इस बात पर प्रभाव पड़ेगा कि राष्ट्र अपनी जलवायु योजनाएँ कैसे बनाते हैं, उदाहरण के लिए, यह निर्धारित करके कि वे चल रहे CO2 उत्सर्जन को हटाने के लिए प्राकृतिक परिदृश्य पर कितना निर्भर हैं।
"यह कार्य इस बारे में दिलचस्प प्रश्न उठाता है कि प्राचीन कार्बन को किस प्रकार और किस हद तकमिशिगन के रोचेस्टर हिल्स में ओकलैंड विश्वविद्यालय के स्कॉट टाईग्स कहते हैं, " जलवायु परिवर्तन को न्यूनतम करना प्राचीन भंडारों से CO2 और मीथेन के उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।"
Posted by KRISHNA KUMAR GUPTA on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/LqLMKeTWpw
#AcharyaPrashant
धर्म शब्द समाज ने नहीं गढ़ा है , धर्म को लेके उसका विकृत अर्थ कर दिया है , मैं उन्हें धर्म का सही मतलब सिखा रहा हूं।
~ आचार्य प्रशांत
Posted by Deepika gupta on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/VC2JHrpE7o
#AcharyaPrashant
संघर्ष में हम सभी हैं; ज़िंदगी युद्ध तो है ही।
दूसरे को क्या दिखाना चाहते हो?
अपनी चोट, अपनी हार या अपना हौसला?
अपना हौसला दिखाओ न दूसरे को!
बचना ऐसे लोगों से जो बार-बार तुम्हें अपनी चोट और अपने घाव दिखाते हों।
उसके पास जाना जिसके पास चोट भी है,
घाव भी है फिर भी उसका हौसला नहीं टूट रहा।
दूसरे को सुनाना ही है तो अपने तेज की बात सुनाओ न, अपने प्रताप की बात सुनाओ न!
बताओ कि किन संघर्षों में तुम हौसले के साथ खड़े हुए हो। यह मत बताओ कि उन संघर्षों में तुम्हें घाव कितने लगे हैं और खून कितना बहा है।
~आचार्य जी🙏
Posted by Kishan chaturvedi on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/vf4UGWgDAS
#AcharyaPrashant
संघर्ष में हम सभी हैं; ज़िंदगी युद्ध तो है ही।
दूसरे को क्या दिखाना चाहते हो?
अपनी चोट, अपनी हार या अपना हौसला?
अपना हौसला दिखाओ न दूसरे को!
बचना ऐसे लोगों से जो बार-बार तुम्हें अपनी चोट और अपने घाव दिखाते हों।
उसके पास जाना जिसके पास चोट भी है,
घाव भी है फिर भी उसका हौसला नहीं टूट रहा।
दूसरे को सुनाना ही है तो अपने तेज की बात सुनाओ न, अपने प्रताप की बात सुनाओ न!
बताओ कि किन संघर्षों में तुम हौसले के साथ खड़े हुए हो। यह मत बताओ कि उन संघर्षों में तुम्हें घाव कितने लगे हैं और खून कितना बहा है।
~आचार्य जी🙏
Posted by Kishan chaturvedi on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/vf4UGWhbqq
#AcharyaPrashant
"Operation 2030: Confronting the Climate Crisis Through Inner Clarity"
Acharya Prashant's Column in NDTV
"Operation 2030: Confronting the Climate Crisis Through Inner Clarity"
✨➖✨➖✨
"The climate crisis is more than an environmental issue - it reflects an inner void. Our drive to consume stems from a sense of lack within. Operation 2030 questions the conventional definition of success, urging a shift from ownership to awareness, from dominance to harmony. True transformation begins with self-knowledge. To support this, the Foundation is popularising timeless wisdom through accessible philosophy. Though often dismissed as utopian, this path has already guided lakhs toward sustainability-drawing on Vedanta, Stoicism, Buddhism, Existentialism, and Deep Ecology."
✨➖✨➖✨
Read the full article:
https://t.co/ORIHonwXEU
~ PrashantAdvait Foundation, on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/wO5xulb9hR
#AcharyaPrashant
"Operation 2030: Confronting the Climate Crisis Through Inner Clarity"
Acharya Prashant's Column in NDTV
"Operation 2030: Confronting the Climate Crisis Through Inner Clarity"
✨➖✨➖✨
"The climate crisis is more than an environmental issue - it reflects an inner void. Our drive to consume stems from a sense of lack within. Operation 2030 questions the conventional definition of success, urging a shift from ownership to awareness, from dominance to harmony. True transformation begins with self-knowledge. To support this, the Foundation is popularising timeless wisdom through accessible philosophy. Though often dismissed as utopian, this path has already guided lakhs toward sustainability-drawing on Vedanta, Stoicism, Buddhism, Existentialism, and Deep Ecology."
✨➖✨➖✨
Read the full article:
https://t.co/ORIHonwpPm
~ PrashantAdvait Foundation, on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/wO5xulaBsj
#AcharyaPrashant
🚨 मरोगे बाद में, पहले पागल होओगे 🚨
⚠️ जो भी इस वक्त क्लाइमेट आपदा की बात नहीं कर रहा हो, उसका सिर्फ बहिष्कार मत करो, उसको जितने तरीकों से गिराया जा सकता हो, गिराओ — आचार्य प्रशांत
⚠️ ये वीडियो जितना ज्यादा हो सके, साझा करिए 🙏
🖥️ पुस्तक वीडियो सीरीज — क्लाइमेट चेंज
🎬 अभिनय — पूजा
🎥 निर्देशन — भारती, कुलदीप
🏠 होस्ट — सीता
📽️ निर्माता — ऐना अर्जुन प्रोडक्शन
युद्ध्यस्व 🤝
Posted by Kuldeep Lakheshwar on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/JYA9X9MSFg
#AcharyaPrashant
⭐💫 बकरीद ⭐💫
⭐ मुझे ये बात कभी हजम ही नहीं हुई कि बेकसूर जानवरों की कुर्बानी से ईश्वर कैसे खुश हो जायेंगे ?⭐
⭐ कुर्बानी का सारा मांस तो तुम खाते हो और ईश्वर तो उसमें से कुछ लेता भी नहीं। ⭐
⭐ कभी–कभी तो मुझे लगता कि पता नहीं कौन से धर्म में पैदा हो गया हूँ जहां पर बेकसूर जानवरों को काटना धर्म का हिस्सा बताया जाता है और ये बात सोचने में ही कितनी खतरनाक लगती है। ⭐
⭐ धर्म के नाम पर ये जो भी फर्जी चीजें चलती हैं चाहे बेकसूर जानवरों की कुर्बानी ही क्यों न हो। ये मुझे कभी समझ नहीं आई लेकिन पहले इतनी ज्यादा पीड़ा और आक्रोश नहीं उठता था जो आचार्य जी के मिलने के बाद उठा।
⭐ ईद और बकरीद के दिन घर पर सेवईं और नॉन–वेज बनता है और इस बात का मैं विरोध भी करता हूँ लेकिन पूरी तरीके से नहीं कर पाता। ⭐
⭐ घरवालों को भी इन सब बातों से जागरूक कर रहा हूँ और कुछ लोगों को थोड़ी बहुत बात समझ में भी आई है। ⭐
⭐ आचार्य जी के मिलने से बहुत सारी मान्यताएं टूट रही हैं और आगे की यात्रा जारी है। ⭐
Posted by Mohd Shoaib on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/qkf5Vuh9xe
#AcharyaPrashant
संसारिक दुनिया के बारे में जिज्ञासा करने को विज्ञान कहते हैं।
अहम( खुद ) के बारे में जिज्ञासा करने को आत्मज्ञान कहते हैं।
विज्ञान और आत्मज्ञान को अध्यात्म कहते हैं।
Posted by Sonam kumari on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/7fqhKIcK6n
#AcharyaPrashant
गीता परीक्षा = आईना
हर परीक्षा मुझे मेरी खोट को दिखा देती है।
मेरी हर साजिश को नाकाम कर देती है।
मुझे मेरा चेहरा दिखा देती है।
मेरे अज्ञान की गहराई का थोड़ा अनुमान लगा पाता हूं।
साफ दिख जाता है कि किसी जगह और कौनसी बेइमानी कर रहा हूं।
इसलिए ये परीक्षा लाइव सत्र से तनिक भी कम नहीं है।
जे आईना है आईना...!
Posted by kamlesh on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/2Wd6P30wDL
#AcharyaPrashant
एक बेवजह मुस्कुराती ज़िंदगी....
~आचार्य जी 🙏🏻🌌
Posted by Monika Sharma on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/If5kVYxDIy
#AcharyaPrashant
तुमसे मिलकर न जाने क्यों और भी कुछ याद आता है, याद आता है 🙏
Posted by Pracheta on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/qRirAWWy4f
#AcharyaPrashant
https://t.co/jZZn4vUykq
Acharya Prashant's message on the eve of Bakri- Eid in a recent interaction with ANI
Acharya Prashant's message on the eve of Bakri- Eid in a recent interaction with ANI.
Watch full video:
https://t.co/aVMxmftXin
~ PrashantAdvait Foundation, on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/bof0xIJQz6
#AcharyaPrashant
अर्जुन की लडाई तो फिर भी कौरव पक्ष और कुरुक्षेत्र तक सीमित थी। पर आचार्य जी जिस लडाई मे है वो जानते है की इसका कोई अंत नही पर फिर भी इतनी ईमानदारी से लड़ रहे है। अगर हम ये समझ पाए की ये लडाई उनकी अकेले की नही है हमारी है तो शायद इस कुरुक्षेत्र का अंत हो भी जाए। कोई है जो अंत की परवाह किये बिना बस लड़ रहा है। 🙏
Posted by सेजल on Gita Community Feed.
Join live Gita sessions and community with Acharya Prashant-
https://t.co/HzDMaADOif
#AcharyaPrashant