अखिलेश जी, तिरंगा किसी की जागीर या “एकरंगा बनाम तिरंगा” का प्रॉप नहीं है।
यह पूरे भारत का है, किसी पार्टी या कॉकरोच जनता पार्टी का नहीं।
बिना अनुमति, prohibitory orders के बावजूद, पहले हिंसा और अवैध प्रदर्शन का इतिहास रखते हुए कनॉट प्लेस में भ���ड़ जुटाना “तिरंगा प्रेम” नहीं, राजनीतिक शोर है। पुलिस ने मना किया तो एकरंगा साजिश हो गई?
आपके पास जब सत्ता थी तब तिरंगे पर राजनीति, आज विपक्ष में आकर फिर वही। CEC पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज को ढाल बनाकर कानून तोड़ना और उसे “एक रंग” कहना सिर्फ पाखंड है।
तिरंगा सबका है
इसे किसी के खिलाफ खड़ा मत करो।