गुर्जर आरक्षण आंदोलन में संघर्ष के साथी रहे पूर्व विधायक एवं कोटा लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी श्री @PrahladGunjal जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं प्रकृति से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
छः फिट के एक व्यक्ति को तौलिये से गला घोंट मार दे..वो भी हाई सिक्योरिटी जेल में..इतनी कड़ी सुरक्षा में आसानी से मार दिया, अजमेर जेल प्रशासन पर सवाल खड़े होना लाजिमी है ?
सम्भव नहीं हैं राजस्थान सरकार,,,
जगन गुर्जर की हत्या साफ़ दर्शाती हैं राजस्थान प्रदेश क़ानून व्यवस्था जर्जर हालत किस कदर है ज़िम्मेदार कौन ?
राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर जेल में बंद जगन गुर्जर की हत्या होना जेल प्रशासन और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
अगर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर भी किसी की जान सुरक्षित नहीं है, तो आखिर सुरक्षा व्यवस्था कहां है?
राजस्थान जेल और पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में देश में दूसरे स्थान पर है। एक साल में करीब 20 लोगों की कस्टडी में मौत अपने आप में बताती है कि प्रदेश की जेलें सवालों का अड्डा बन चुकी हैं। जेलों से रंगदारी की धमकियां, नशे का कारोबार, अपराधियों द्वारा गैंगवॉर चलाना और संदिग्ध मौत.. क्या भाजपा सरकार ने जेलों का नियंत्रण अपराधियों के हवाले कर दिया है?
राजस्थान की जेलों से मुख्यमंत्री को धमकियां दिए जाने, आम नागरिकों एवं व्यापारियों से रंगदारी और वसूली की धमकियां देने, नशे के कारोबार संचालित होने तथा संगठित अपराधों के संचालन जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि कई माफिया एवं हार्डकोर अपराधी जेलों के भीतर से भी अपना आपराधिक नेटवर्क संचालित करते हुए राजस्थान में समानांतर सरकार चला रहे है जो कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती है।
यह घटना प्रथम दृष्टया जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करती है। साथ ही, इस पूरे मामले में किसी प्रकार की मिलीभगत या साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर संगठित साज़िश का खुलासा एवं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जेलों में कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
@RajCMO
ना खाऊँगा ना खाने दूँगा, सदी का सबसे बड़ा जुमला साबित हुआ है भाजपा और आरएसएस के नेताओं की खुली लूट मची है..
यहां सब्सिडी तो बहाना है, असली मज़ा तो ‘पावर’ के इस्तेमाल में है! 14 दिन में अप्रूवल? आम किसान इसी पॉली-हाउस फाइल अप्रूवल के लिए 2-3 साल इंतज़ार करना पड़ता हैं।
काश आम किसान की फाइल भी इतनी तेज़ दौड़ती। खैर, ये ‘डाका’ सरकारी ख़ज़ाने में सिर्फ सत्ता के गलियारों में ही मुमकिन है।
@PMOIndia@AgriGoI
खीरे की खेती..सरकारी ख़ज़ाने पर डाका..राजस्थान के भाजपा नेता और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी का “सब्सिडी स्कैम”!
खीरे की खेती के लिए केंद्रीय मंत्री ने अपने विभाग से 99 लाख 60 हज़ार सब्सिडी ले ली
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार से जुड़े जमीन-सौदों पर उठे सवाल अभी सार्वजनिक स्मृति में ताजा ही हैं कि अब राजस्थान के नेता और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी का मामला सामने आ गया है। दोनों मामलों में एक साझा सूत्र है सत्ता, संपत्ति और सार्वजनिक पद के नैतिक इस्तेमाल का सवाल। फ़र्क़ इतना है कि मध्यप्रदेश में ज़मीन और सरकारी परियोजनाओं के आसपास हित-संघर्ष की गंध उठी तो राजस्थान में सीधे कृषि मंत्रालय की योजना से केंद्रीय मंत्री को मिली सब्सिडी ने लोकतांत्रिक नैतिकता को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने आज हरिकिशन शर्मा की व्यापक जाँच पर आधारित एक ख़बर की है, जिसके अनुसार राजस्थान भाजपा के बड़े नेता भागीरथ चौधरी को डीडवाना-कुचामन जिले में अपने खीरे के फार्म प्रोजेक्ट के लिए लगभग एक करोड़ रुपए की सरकारी सब्सिडी मिली। उनके पीह गांव स्थित फार्म पर लगे बोर्ड में परियोजना की कुल लागत 1 करोड़ 99 लाख 20 हजार रुपए, मंत्री का अपना हिस्सा 49 लाख 80 हजार रुपए, HDFC बैंक से ऋण 1 करोड़ 49 लाख 40 हजार रुपए और सरकारी सहायता 50 प्रतिशत यानी 99 लाख 60 हजार रुपए बताई गई है। रिकॉर्ड में 30 मार्च 2026 को 99.03 लाख रुपए “कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी” के रूप में उनके HDFC ऋण खाते में जमा होने की बात सामने आई। यानी यह पैसा नकद जेब में नहीं गया, लेकिन उनके निजी कृषि-प्रोजेक्ट के बैंक ऋण पर सरकारी राहत के रूप में गया। यही इस मामले का असली राजनीतिक अर्थ है।
यह योजना नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के तहत आती है, जो कृषि मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। भागीरथ चौधरी इसी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और बोर्ड में पदेन उपाध्यक्ष भी। तकनीकी तौर पर कहा जा सकता है कि अंतिम मंजूरी देने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी में मंत्री सीधे सदस्य नहीं थे। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने असली प्रश्न यहीं उठाया है—क्या कोई मंत्री अपनी ही मंत्रालयीय संरचना के अधीन चल रही योजना का लाभार्थी बन सकता है और फिर भी इसे हित-संघर्ष नहीं माना जाएगा?
वे कठघरे में चार जगह खड़े होते हैं। पहला, जिस बोर्ड की योजना से सब्सिडी मिली, उसी बोर्ड में वे पदेन उपाध्यक्ष हैं। दूसरा, उनके प्रोजेक्ट को आवेदन के सिर्फ चौदह दिन बाद इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल गई—जबकि ऐसी योजनाओं में जांच, निरीक्षण और कागजी प्रक्रिया आम किसानों के लिए अक्सर लंबी यातना बन जाती है। तीसरा, फार्म का बोर्ड तो NHB सहायता बताता है, लेकिन यह नहीं बताता कि लाभार्थी वही मंत्री हैं जिनके मंत्रालय के अधीन यह बोर्ड है। चौथा, PMO में उनकी संपत्ति घोषणा में जमीन का जिक्र है, पर इस NHB प्रोजेक्ट का स्पष्ट उल्लेख नहीं दिखता; उनके सहयोगी ने कहा कि जानकारी सरकार को दी जाएगी। सवाल है—कब और क्यों बाद में?
यह मामला केवल एक मंत्री की सब्सिडी का नहीं है। यह उस व्यवस्था का आईना है जिसमें छोटे किसान कर्ज, मौसम और कागजों में मरता है, और सत्ता-संपन्न किसान सरकारी योजना की छतरी के नीचे लगभग एक करोड़ की राहत पा लेता है। भाजपा अगर सचमुच नैतिकता की पार्टी होने का दावा करती है तो उसे भाषण नहीं, स्वतंत्र जांच से जवाब देना चाहिए। सार्वजनिक पद पर बैठे आदमी को सिर्फ नियमों के पीछे नहीं छिपना चाहिए; उसे जनता को यह भरोसा भी देना चाहिए कि नियम उसके लिए निजी खेत की मेड़ नहीं हैं।
@harikishan1@saurabhtop@IEhindi
https://t.co/O5PTcuqca4…
AICC सचिव एवं पूर्व IYC अध्यक्ष श्री @srinivasiys जी को कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक पर नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
कोरोना काल में आपकी निस्वार्थ सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं को देश ने देखा है।
राजनीति से परे, एक बेहतर इंसान को बड़ी ज़िम्मेदारी मिलना सुखद है।आप कांग्रेस पार्टी की विचारधारा एवं जनसेवा संकल्प को सेवा दल के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का कार्य पूरी लगन और निष्ठा के साथ करेंगे।
आपके सफल कार्यकाल और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
"छात्रों की गूंज" अभियान का आगाज़, NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @VinodJakharIN बोले-“छात्रों की गूंज” सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि देश की टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ 40 दिनों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन है।
लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की विफलताओं और शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ते संकट के खिलाफ यह अभियान छात्रों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद करेगा।
कांग्रेस पार्टी और NSUI छात्रों के भविष्य, उनके अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी पूरी मजबूती से करती रहेगी।
हमारी मांग स्पष्ट है कि पेपर लीक पर सख़्त कानून बनाओ और धर्मेन्द्र प्रधान को पद से हटाओ ।
#ChhatronKiGoonj
अगर देश के सभी किसान संगठन दिल से एकजुट हो जाए तो हमारा दावा है कि देश में तानाशाह नाम की कोई चीज़ देखने व सुनने को कभी नहीं मिलेगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि समझौते के विरोध में देश के किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में इकठ्ठे होकर साँझा लड़ाई लड़ने का ऐलान किया ।
‘जय किसान’
देश के सभी किसान संगठनों एकता की आज सुखद तस्वीर सामने आई है..किसान संगठनों की एक अच्छी पहल जो देश का किसान भी चाहता था आज चंडीगढ़ 35 सेक्टर किसान भवन में एक साथ जुड़ना शुरू हो गये है उम्मीद बहुत ज्यादा है किसानों को एक होकर लड़ेंगे आपसी मतभेद भुलाकर एक होकर लड़ेंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि समझौते के विरोध में देश के किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में इकठ्ठे होकर साँझा लड़ाई लड़ने का ऐलान किया ।
गौरतलब है की भारत का वार्षिक कृषि बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है और अमेरिकी विदेश मंत्री के एक ब्यान के अनुसार इस व्यापार समझौते के तहत भारत हर साल अमेरिका से 3 लाख करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद ख़रीदेगा. जिसका भारत के किसान और कृषि पर बहुत गहरा असर पड़ने वाला है।
किसानों ने आगे की रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा के लिए 1 जुलाई, 2026 को चंडीगढ़ में देश के सभी किसान संगठनों की मीटिंग रखी है।
आज कोटा में श्री @PrahladGunjal जी के नेतृत्व में संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन में किसानों, पशुपालकों के हक और अधिकारों की आवाज को मजबूती मिली।
KDA एवं वन विभाग की ज्यादतियों के विरोध में ग्रामीणों की मांगों को समर्थन दिया। यह संघर्ष ग्रामीणों के सम्मान और न्याय की लड़ाई है।
@INCIndia@RahulGandhi@INCRajasthan
📍 सी.ए.डी सर्किल, कोटा
पांचना के मुद्दे पर गुर्जर-मीणा समुदाय में संघर्ष नहीं, समाधान की आवश्यकता!!
मेरा राजस्थान सरकार @RajGovOfficial को सुझाव है; राजस्थान सरकार हाईकोर्ट में 1 जुलाई से पहले रिव्यू पिटीशन दायर कर एक हलफ़नामा देकर हाईकोर्ट को आश्वस्त करे किसानों की फ़सलों में पानी की ज़रूरत नवंबर माह होंगी आपके आदेश की पालना करेगी राज्य सरकार..क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को नहर के पानी की ज़रूरत अक्टूबर-नवंबर तक होगी और मानसून आने वाला बारिश के मौसम में पानी की उपलब्धता हो जाएगी।
मैं किसान नेता हूँ सामाजिक सौहार्द, किसान हित सर्वोपरि रखता हूँ और पूर्वी राजस्थान के दीर्घकालिक विकास के दृष्टिकोण से राजनैतिक नेताओं को व्यक्तिगत अहम और राजनैतिक महत्वाकांक्षा किसानों की भलाई से बड़ी नहीं होनी चाहिए, ऐसी परिस्थिति समाधान के बजाय टकराव पैदा करती हैं।
किसान भाईयों को पानी की जरूरत अभी अक्टूबर नवंबर तक होगी कमांड एरिया को और लिफ्ट एरिया को भी तभी ज़रूरत होगी..सरकार को लिफ्ट निर्माण काम तेज़ी करना चाहिए..तब तक दोनों समुदायों को आपस में संवाद करके आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहिए जिससे उनकी मांग पूरी हो जाए और तब भी सरकार नहीं मानती हैं तो दोनों किसान क़ौम को मिलकर रेल रोकनी है या कोई और आंदोलन करना चाहिए वो निर्णय लेना चाहिए।
संवाद करके एकता से अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए ताकि अपनी और अपनी आने वाली पीढ़ी को एक सौहार्दपूर्ण और आर्थिक राजनैतिक रूप से एक मजबूत पूर्वी राजस्थान मिले।
मुझे पांचना जल के मुद्दे पर नेतृत्व कर रहे आंदोलनकारियों के बीच विभिन्न प्रकार की महत्वाकांक्षा के लोग दिखाई दे रहे हैं।
कुछ ऐसे हैं जो बड़े राजनीतिक नेताओं और पार्टियों के इशारों पर पांचना के पानी के मुद्दे पर शह-मात का खेल खेल रहे हैं और एक दूसरे को गिराने में लगे हुए हैं एवं पानी जैसे गंभीर मुद्दे को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बना रहे हैं।
कुछ लोग इस आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक पहचान और भविष्य की संभावनाएं तलाश रहे हैं मतलब इस आंदोलन को अपनी राजनैतिक पहचान और भविष्य के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में देख रहे हैं।
व्यक्तिगत रूप से मैं पूर्वी राजस्थान के दो बड़ी किसान क़ौम के बीच इस प्रकार के टकराव का समर्थक नहीं हूं।
पूर्वी राजस्थान पहले भी इस अविश्वास के दौर को झेल चुका है अब वो फिर एक बार उस दौर में नहीं वापिस जाना चाहेगा जहाँ डर के वातावरण ने पूर्वी राजस्थान की फ़िज़ाओं में अपनी जगह बना ली थी। इसलिए इस प्रकार के विवादों में लाभ व्यक्ति का होता है लेकिन घाटा समुदाय का होता है।
@1stIndiaNews@DainikBhaskar@zeerajasthan_@Rajasthan_Tak@ANI@rpbreakingnews
हाईकोर्ट के एक फ़ैसले ने मणिपुर को बर्बाद कर दिया जो एक शांत प्रदेश था अब पिछले तीन साल से जातिय हिंसा आग में सुलग रहा।
राजस्थान में भी हाईकोर्ट के फ़ैसले से मणिपुर जैसे हालात पैदा हो गए है।
गुर्जर -मीणा समाज से मेरा विनम्र अनुरोध है आप मणिपुर मत बनने देना..इस जीते-जागते समृद्ध पूर्वी राजस्थान क्षेत्र को गुर्जर-मीणा समाज ने समरसता को तोड़ने वाले ऐसे हजार दौर देखे है। आप अगर भ्रमित हो गए तो मान लेना रोज दंगे होंगे, अस्मिताएं लूटी जाएगी, घर जलाए जाएंगे, हत्याएँ होंगी जरा जरा सी बात पर..
हम सभी ने वो मंजर भी आँखों से देखा वर्ष -2013 में कॉलेज चुनाव के दौरान विधानसभा का चुनाव लड़ने का मनसूबा पाले कुछ नेताओं ने गुर्जर-मीणा समाज के युवाओं में भ्रांति फैलाने का काम किया फिर युवाओं में आपसी विवाद करवाया था..गुर्जर-मीणा समाज के युवाओं में उसी विवाद ने ऐसा उग्र प्रदर्शन किया कि चंद मिनटों में दौसा शहर आग के हवाले हो गया था..दौसा शहर की आग बुझाने ना कोई विधायक आया ना कोई सांसद आया था..उस दौरान भी हम सभी ने आपसी सामंजस्य और भाईचारा स्थापित किया था..हमारे उपर मुकदमे भी लगे पर हमने भाईचारा क़ायम रहने दिया।
नेता मंच पर भाषण देकर निकल जाएंगे, लेकिन अगर हालात बिगड़े तो चिताएँ गरीबों के घरों में जलेंगी..राजनीति करने वाले आगे नहीं आते, कीमत सिर्फ आम जनता चुकाती है..जो लोग भीड़ को भड़का रहे हैं, वे अपने बच्चों को घर में सुरक्षित रखेंगे और गरीब का बेटा सड़क पर मरने के लिए छोड़ देंगे।
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“मैंने खुली आँखों से गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान 2007-08 में गुर्जर और मीणा समुदायों के बीच हुई झड़पों के कारण व्यापक हिंसा हुई थी और कई लोगों की जान गई थी। पाँचना बांध पर पानी के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने वाले दोनों समुदायों के नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भड़काऊ भाषण न हो या हिंसा को उकसाया न जाए। राज्य सरकार को लंबे समय से लंबित पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के ज़रिए चंबल का पानी जगर बांध से जलग्रहण और डूँगरी बांध जलग्रहण क्षेत्र और कमांड क्षेत्र और अनकंमाड के दोनों ही क्षेत्रों के गांवों में पानी की आपूर्ति का समाधान निकालना चाहिए,”
भाजपा सरकार को दोनों समुदायों के पंच -पटेलों एवं आंदोलन कर रहे नेताओं से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए। ~@thewire_in@thewirehindi ]
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पूर्व सांसद आदरणीय संजय गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
“पिता’’ इस छोटे से शब्द में समस्त ब्रह्माण्ड का विस्तार समाहित है।पितामात्र जनक नहीं,बल्कि ऐसा शिल्पकार है जो व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को आकार देकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने के काबिल बनाता है।
नमन 🙏
पाँचना बांध के पानी पर राजनीति करने वाले नेता जी अपने ही गांव के सार्वजनिक सरकारी ‘एकल पॉइंट’ ‘सार्वजनिक नलकूप’ पर क़ब्ज़ा कर रखा है..अपने ही कुटुंब और ग्रामवासियों को पानी पीने नहीं देते पर पाँचना बांध पर भाषण खूब दे रहे..है ना ताज्जुब की बात।
@1stIndiaNews@zeerajasthan_
जब सत्ता बैठे हुक्मरान हठ योग करे..तो जनसंघर्षों में सह योग करें
किसान,मजदूर, पिछड़ों, आदिवासियों एवं दलितों के हक व अधिकारों के संघर्ष करना ही असली योग है..
“अंतराष्ट्रीय योग दिवस”
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