आपने हमारा वोट चोरी करने के लिए हमसे परमिशन नहीं ली तो हमें प्रदर्शन करने के लिए सिर्फ संविधान की परमिशन की जरूरत है और वो अधिकार हमें संविधान ने दिया है। कोई पुलिस हमें रोककर ज्ञानेश को नहीं बचा सकती।
- नेहा बोरा
मोदी जी जब भी अपनी माता जी से मिलने जाते थे, कैमरों का पूरा लाव-लश्कर साथ होता था।
यह वही लोग हैं, जिनका नारा है—
“एक पेड़ माँ के नाम”,
और —“पूरा जंगल अडानी के नाम।”
अब मोदी जी की इस सस्ती PR की राजनीति को एक्सपोज करने का समय आ गया है।
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
भैंस के तबेले में सरकारी स्कूल चलाएंगे लेकिन किसी ने अगर सच दिखाया तो उस पर हमले करेंगे.
ABP न्यूज के हवाले से जयपुर के पास चल रहे सरकारी स्कूल का हाल देखिए
सभी पूछ रहे हैं ये कौन हैं?
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं। साफ़गोई के साथ अपनी बात रख रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना ऐसे सुना रहे हैं जैसे किसी गीत की तरह याद कर रखा हो। लोकतंत्र में व्यक्ति ही गरिमा की अहमियत बता रहे हैं। सोनम वांगचुक के साथ बदसलूकी पर ख़फ़ा हैं