ब्रेकिंग न्यूज़ | ख़ास रिपोर्ट
अगर कहीं बुर्क़े की आड़ में अपराध होता नज़र आए, तो ज़रूरी नहीं कि उसके पीछे कोई मुस्लिम महिला ही हो। जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर
या तो कोई नामर्द बुर्क़ा पहनकर गुनाह को अंजाम देता है,
या फिर ग़ैर-मुस्लिम महिलाएँ बुर्क़े का ग़लत इस्तेमाल करती पाई गई हैं।
बुर्क़ा इबादत और हया की पहचान है, अपराध का औज़ार नहीं।
आज के हालात में ज़रूरी है कि मुसलमान होशियार और सतर्क रहें, ताकि पाक लिबास की आड़ में कोई शरारती अनासिर हमारी पहचान को बदनाम न कर सके।
👉 समाज से अपील: हया के निशान को गुनाह से न जोड़ें, सच्चाई को पहचानें।