TRIGGER WARNING: ये मेंटल हेल्थ पर डिस्कशन नहीं है, ये ब्रांड एंबेसडर बनाने की चुल्ल पर एक व्यंग्य है। इसमें मेंटल हेल्थ बावजह घसीटा गया है। इसमें मैथिली ठाकुर और सुरेश गोपी को भी लपेट लिया गया है जिनका संदर्भ से कोई संबंध नहीं है।
इस क्लिप के खत्म होने से पहले ही आपके मन में कई उत्तेजक ख्याल आएंगे, अनावश्यक क्रोध और उपयुक्त घृणा भी होगी। ये एक सामान्य प्रतिक्रिया है जो उत्तेजना से भरे कटु शब्दों को यहीं पोस्ट कर देने से ठीक हो जाता है। आप में एमपेथी है, ये अच्छी बात है। इसे नितांत घटिया व्यंग्य की श्रेणी में रखकर आप अपने नियमित कार्यों में वापस जा सकते हैं।
क्लिनिकल डिप्रेशन और समान मानसिक तकलीफ आधुनिक औषधियों और मेडिकल इंटरवेंशन से पूरी तरह ठीक हो जाती हैं। यह सब किसी विशेषज्ञ से सलाह के पश्चात ही होना चाहिए। जो वास्तविक रूप से पीड़ित हैं और संघर्ष कर रहे हैं, अगर उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि उनका मजाक उड़ाया गया है तो हमें खेद है। हालांकि दो बार उन्हें इस दायरे से बाहर रखने का प्रयास किया गया है। तीनों में से कोई विशेषज्ञ नहीं होने के कारण इनकी बातें असंवेदनशील ही लगेंगी क्योंकि विषय संवेदनशील है।
शेष आउटरेज करने वालों से निवेदन है कि आप गाली टाइप कर के रिप्लाई में पोस्ट करें और मुक्त हो जाएं। फार्मा कंपनियों के विश्वभर में योगदान पर शोध करने की आवश्यकता नहीं है। इससे आपका समय ही व्यर्थ होगा। कई देशों में नई दवाओं के आगमन के साथ ही प्रचार प्रसार संयोग मात्र है। इसका किसी एक देश या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।
ट्रिगर वार्निंग पोस्ट से लंबा ही होता है। कुछ विषयों पर व्यंग्य होना ही नहीं चाहिए। मृत्यु, भक्ति, ईश्वर, गंभीर बीमारियां, और अन्य बीमारियां हास्य और व्यंग्य से ऊपर रहिता है तो सिंपल रहिता है। पर ये कार्यक्रम प्रयास करता है कि जिस मुद्दे के दोनों पक्ष उजागर हों उसके तीसरे पक्ष पर हल्का प्रकाश डाला जाए। इसमें रिस्क रहिता है। आप जिनमें भी हों आपकी जय हो।