This is democracy. He has resigned. We have two more demands. We won't go like this.
Dharmendra Pradhan has resigned. But the families of the children who committed suicide should receive compensation of one crore rupees. They should get it.
One crore rupees compensation to all those families.
And second, these police goons who acted on the 20th.
Action must be taken against the police officers for that.
Remember, do not mess with cockroach
Abhijeet Dipke
Founder, CJP
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
लोकतंत्र पैसे की शक्ति से नहीं, चुनाव आयोग के सख्त नियमों से चलता है। ECI से हमारी स्पष्ट मांग है कि प्रशांत किशोर की डमी कंपनियों और बेनामी बैंक खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराकर बांकीपुर में बह रहे काले धन पर तुरंत रोक लगाई जाए। #धोखेबाज़PrashantKishor
एक ऐतिहासिक घड़ी के गवाह बन रहे हैं।
आज संसद की ओर जाने वाली हर सड़क पर युवा हैं। पचास साल बाद उन्होंने फिर याद दिलाया है - संसद का रास्ता सड़क से होकर जाता है।
#संसद_मार्च#DharmendraPradhanResign
मैंने भी डिम्पल यादल को इतने गुस्से में नहीं देखा। डिम्पल जो बात कह रही हैं किसी का भी सब्र जवाब दे सकता है मगर वे आपे से बाहर नहीं हैं। अपनी बात मज़बूती से रख रही हैं। एक युवा लड़की जिस भरोसे के साथ महिला सांसद से शिकायत करती है, महिला सांसद उस भरोसे को बनाए रखती हैं।
Actor Sonakshi Sinha comes out in support of @Wangchuk66 sir and the CJP’s protests saying, “Ab mujhse raha nahi gaya..”
The youth of India appreciates the support!
मैं किसी भी हालत में 20 July तक ज़िंदा रहूँगा ताकि मैं आप सब के साथ संसद तक मार्च कर सकूँ। और अगर 20 July को हमारा मार्च सफल नहीं रहा तो फिर मैं भूत बन कर वापस आऊँगा!”
सोनम वांगचुक ने अपनी ज़िन्दगी के इतने कठिन समय पर भी अपना सेंस ऑफ़ ह्यूमर नहीं खोया!
चलो संसद!
जंतर-मंतर पर चल रहे युवाओं के आंदोलन और सोनम वांगचुक के समर्थन में पहुँचे किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ़ संदेश दिया कि किसान और युवा अन्याय के ख़िलाफ़ एकजुट हैं।
उन्होंने कहा - "ट्रैक्टर-ट्रॉली तैयारी खड़ी हैं, चिंता मत करो... तानाशाह बादशाह का अंत होगा।"
जब शिक्षा, रोजगार, किसानों के अधिकार और लोकतांत्रिक आवाज़ें एक साथ खड़ी होती हैं, तो यह केवल किसी एक आंदोलन की नहीं, बल्कि जनहित और जवाबदेही की लड़ाई बन जाती है। सत्ता को विरोध की आवाज़ सुननी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र संवाद से चलता है, दमन से नहीं।
भूख हड़ताल पर बैठे @wangchuksworld, @neowsibora, @aisa_official_ और @sficec के साथियों को हमारा सलाम।
अब चुप रहने का समय नहीं है। उनकी लड़ाई न्याय, लोकतंत्र और लोगों के अधिकारों की लड़ाई है।
आवाज़ उठाइए। समर्थन कीजिए। अभी।