जापान पहुंची एक मुस्लिम महिला ने गुस्से से कहा:
“जापान में हलाल खाना लगभग न के बराबर ही मिलता है।”
सोशल मीडिया पर जापानियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी:
“कृपया अपने देश वापस चले जाइए।”
“बिल्कुल सही। आपको आने की ज़रूरत नहीं है।”
देश में भयवाह स्थिति है-
भारत में 40,000 रजिस्टर्ड मद-रसे है और बाक़ी हजारों अवैध-
उनमें से एक मद-रसे में सर्वे हुआ, छात्रों से पूछा क्या बनाना चाहते हो तो सबने एक सुर में कहा की सिर्फ़ “मौ/लवी”
मतलब पचास हज़ार मद-रसों में से सब में सौ भी तैयार हो रहे है तो 50 लाख मौलवी 😳
विकसित भारत नहीं मौ/लवी भारत की तरफ़ से मजह-ब हमे ले जाना चाहता है?
@DrDCSHARMAUPPSS शिक्षक आंदोलन किसी वेतन या सुविधा की लड़ाई नहीं है।
यह सम्मान, स्थिरता और शिक्षा की गरिमा की लड़ाई है।
जब राष्ट्र निर्माता अपनी आवाज़ उठाता है,
तो उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
#JusticeForTeachers@DrDCSHARMAUPPSS
साथियों, हार हमारी डिक्शनरी में नहीं है।
कल टीईटी (TET) अनिवार्यता के संबंध में न्यायालय से आए आदेश से हमें तनिक भी निराश या हतोत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ रहा है।
हमारे अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा को इस परिस्थिति का पूर्वानुमान पहले से था। उन्होंने शुरुआत से ही स्पष्ट रूप से कहा है कि इस विषय का स्थायी और अंतिम समाधान संसद के माध्यम से ही संभव है।
स्पष्ट नेतृत्व -
1). शुरुआत से स्पष्ट दृष्टिकोण:
माननीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जी लगातार यह कहते रहे हैं कि इस प्रकरण का स्थायी समाधान संसद में कानून या नीतिगत निर्णय के माध्यम से ही निकलेगा।
2). जनशक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति:
संसद में वही जनप्रतिनिधि बैठते हैं जिन्हें हम चुनकर भेजते हैं। उन्हें समय-समय पर जनता के बीच आकर समर्थन और विश्वास प्राप्त करना होता है।
3). हमारी आवाज़ अनसुनी नहीं होगी:
जनप्रतिनिधि लाखों शिक्षकों और अभ्यर्थियों की भावनाओं, अपेक्षाओं और भविष्य के महत्व को भली-भांति समझते हैं। हमें विश्वास है कि हमारी बात उचित मंच तक पहुंचेगी।
4). संसद-केंद्रित रणनीति:
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) का आंदोलन प्रारंभ से ही संसद और नीति-निर्माताओं तक अपनी बात पहुँचाने की रणनीति पर आधारित रहा है। इसलिए हमें अपने मार्ग और उद्देश्य पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए।
साथियों, संघर्षों की राह में चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन यही चुनौतियाँ जीत का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। न्यायालय के आदेश से हमारा मनोबल कमजोर नहीं होगा। हम एकजुट हैं, संगठित हैं और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
एकता हमारी ताकत है, धैर्य हमारा हथियार है और सफलता हमारा लक्ष्य है। ✊🇮🇳
संघर्ष जारी रहेगा, जीत हमारी होगी।
- कल्पना राजौरिया (सचिव TFI)
#JusticeForTeachers #TFI #UPPSS1921 @DrDCSHARMAUPPSS
#TET अनिवार्यता का विरोध आखिर क्यों?
क्या कोई समझने को तैयार है कि एक #शिक्षक किन परिस्थितियों से गुजर रहा है?
वर्षों की सेवा, अनुभव और मेहनत के बावजूद बार-बार नई शर्तें… क्या यही न्याय है?
कभी भर्ती की अनिश्चितता, कभी नियमों में बदलाव, और अब फिर TET का दबाव—आखिर कब तक?
शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज का निर्माता है।
अगर वही असुरक्षित और परेशान रहेगा, तो शिक्षा व्यवस्था कैसे मजबूत होगी?
मेरी बातों से असहमति हो सकती है, लेकिन सवालों से भागा नहीं जा सकता।
अगर कुछ गलत लगे, तो जरूर बताइए—संवाद ही समाधान का रास्ता है।
कल्पना राजौरिया, राष्ट्रीय सचिव
@TFI_2025
@DrDCSHARMAUPPSS@CMOfficeUP #NoTetBeforeRteAct
छोटी सी जिंदगी है, खुशी के साथ रहिए।
जो मिला है उसे मुस्कुराकर स्वीकार कीजिए।
न कल की चिंता में आज खोइए,
न बीते हुए लम्हों का बोझ ढोइए।
रिश्तों को समय दीजिए, अपनों को प्यार दीजिए,
क्योंकि जिंदगी बहुत खूबसूरत है, इसे दिल खोलकर जीएं।
Good evening
बच्चों के स्कूली Syllabus में एक नया पाठ जोड़ देना चाहिए। उस पाठ का नाम होना चाहिए—"अनिश्चितता - यहाँ कभी कुछ भी सीधा और स्थायी नहीं है"।
नए शिक्षक भर्ती के लिए TET अनिवार्य हो, इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है। नया युवा नियम जानकर ही मैदान में उतरेगा।लेकिन असली अन्याय तो उन पुराने और इन-सर्विस शिक्षकों के साथ हो रहा है, जो 15-20 सालों से पूरी निष्ठा के साथ स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अचानक उन पर भी TET पास करने का दबाव बना दिया गया है।जब खेल के बीच में, या खेल खत्म होने की कगार पर पहुँच चुके खिलाड़ियों के लिए अचानक नियम बदल दिए जाएं... तो उनकी दशकों की सेवा और अनुभव का क्या मतलब रह जाता है? नौकरी के बीच में से अचानक नई शर्तें थोप देना सीधे तौर पर उनके मान-सम्मान और रोजगार की सुरक्षा पर हमला है।अगर इसी तरह Retrospective से पुराने लोगों पर नियम थोपने का ढर्रा चलना है, तो बच्चों के स्कूली Syllabus में भी एक नया पाठ जोड़ देना चाहिए। उस पाठ का नाम होना चाहिए—"अनिश्चितता - यहाँ कभी कुछ भी सीधा और स्थायी नहीं है"।
कम से कम आने वाली पीढ़ी पहले से मानसिक रूप से तैयार रहेगी कि इस देश में आपके अनुभव, आपकी बरसों की सेवा और मौजूदा नियम कभी भी रातों-रात बदले जा सकते हैं।
वरिष्ठ शिक्षकों के साथ यह मानसिक उत्पीड़न कब बंद होगा?#TET #InServiceTeachers #EducationSystem #SupremeCourt #TeachersProtest #Employment
#NoTetBeforeRteact
टीईटी नहीं, न्याय चाहिए!
#Tfi के जरिये आज शिक्षक अभ्यर्थियों की आवाज़ देश के रक्षा मंत्री तक पहुँची।
टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा जी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर टीईटी से जुड़े मुद्दे पर राहत की मांग उठाई। साथ ही प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संसद से कानून बनाकर स्थायी समाधान निकालने की मांग भी रखी।
जब समाधान संसद से निकल सकता है, तो लाखों शिक्षकों को वर्षों तक इंतज़ार क्यों?
अब आधे-अधूरे आश्वासन नहीं, कानून के जरिए न्याय चाहिए।
#JusticeForTeachers @DrDCSHARMAUPPSS 60 Cr
*◾'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए'*
बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी..जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था.
चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था...
हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा...
भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था..फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा...
राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी...
वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया...
चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को गिराने को तैयार नहीं...
राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...पेड़ दाना देने को राजी नहीं।
हाथी बिगड़ गया...उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?
चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ...चींटी ने चिड़िया से कहा, "चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली।
अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ...
चींटी डर गई...भाग कर वो हाथी के पास गई...हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा...महावत राजा के पास कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा...बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा...बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो.मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...!!
*"निष्कर्ष....👨✈️*
आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी...हर शेर को सवा शेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...
आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा यकीन कीजिए. हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं. हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!!
बड़े सपनो को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है.
पहले लोग मजाक उड़ाएंगे,फिर लोग साथ छोड़ेंगे, फिर विरोध करेंगे फिर वही लोग कहेंगे हम तो पहले से ही जानते थे की एक न एक दिन तुम कुछ बड़ा करोगे!
रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा,
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..!
*थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!
*#Kyun
शिक्षा दान सबसे बड़ा दान है। ❤️📚
सालों पहले मेरी मुलाकात शिखा से हुई थी। पढ़ाई में वह बेहद होशियार थी, लेकिन उसके सिर पर माता-पिता का साया नहीं था। आर्थिक तंगी उसके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही थी।
उस दिन मैंने तय किया कि उसकी पढ़ाई कभी पैसों की वजह से नहीं रुकेगी। तभी से हर साल मैं उसकी पढ़ाई में सहयोग कर रही हूँ—कभी किताबें, कभी फीस, तो कभी ज़रूरत का अन्य सामान।
उससे मैंने सिर्फ़ एक वादा लिया था—"मेहनत नहीं छोड़नी है, एक दिन अपने सपनों को सच करके दिखाना है।"
आज भी मेरा विश्वास उतना ही मज़बूत है कि शिक्षा किसी का जीवन बदल सकती है।
आप भी इस मुहिम का हिस्सा बनिए।
अपने आसपास किसी एक ज़रूरतमंद बच्चे की शिक्षा की ज़िम्मेदारी उठाइए। आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के भविष्य को अंधेरे से उजाले की ओर ले जा सकता है।
आइए, मिलकर शिक्षा का दीप जलाएँ। क्योंकि शिक्षा दान ही सबसे बड़ा दान है। 🙏📖
श्री हरि विष्णु
"बेटियों को केवल शास्त्र का ही नहीं, शस्त्र का ज्ञान भी होना चाहिए।"
जब समाज में कुछ लोग भेड़िये की मानसिकता लेकर घूम रहे हों, तब बेटियों को केवल संस्कार और शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, साहस और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का आत्मविश्वास भी देना होगा।
समय की मांग है कि हमारी बेटियां ज्ञान में भी आगे हों और अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम भी।
"शास्त्र से संस्कार, शस्त्र से सुरक्षा।"
@ShainaNC@DrDCSHARMAUPPSS@Uppolice@firozabadpolice@GiantsWelfare
जय श्री राम
ना फिसलो इस उम्मीद में
कि कोई हमें उठा लेगा...
सोच कर मत डूबो दरिया में
कि तुम्हें कोई बचा लेगा...
ये दुनिया तो एक अड्डा है
तमाशबीनों का दोस्तों..
अगर देखा तुम्हें मुसीबत में
तो हर कोई यहां मज़ा ही लेगा
सुप्रभात🙏
#GOODMORNİNG#सुभाषितानी#सुविचार
प्रदेश के बेसिक शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने जा रही है।
बेसिक शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू होने की दिशा में सरकार का यह निर्णय अत्यंत स्वागतयोग्य है। यह लंबे समय से हमारे @UPPSS1921 के प्रदेश अध्यक्ष
@DrDCSHARMAUPPSS
जी के नेतृत्व में शासन स्तर पर निरंतर उठाई जा रही मांग का सकारात्मक परिणाम है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का हृदय से आभार, जिन्होंने शिक्षकों के स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर संवेदनशीलता दिखाते हुए सार्थक पहल की।
आशा है कि यह व्यवस्था शीघ्र प्रभावी रूप से लागू होगी और प्रदेश के लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों को इसका लाभ मिलेगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार। #CashlessTreatment
Good morning
शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों एवं रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए सरकार का हार्दिक धन्यवाद।
हम मांग करते हैं कि विद्यालयों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाए। वे भी शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं और समान सुविधा के हकदार हैं।
सभी के लिए समान सम्मान, सभी के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा।
कल्पना राजौरिया
महानगर अध्यक्ष, @UPPSS1921@DrDCSHARMAUPPSS@CMOfficeUP
#NoTetBeforeRteAct
तुम्हारे साथ रहते हैं, तुम्हीं को आज़माते हैं
वो जो लोग सस्ते हैं, सबक #महंगा सिखाते हैं...
Plz subscribe my youtube #channel 😊#कविता GOOD MORNİNG
https://t.co/dXZZVERgjp