जब वोट ही नहीं होगा तो वोट डालोगे कैसे?
SIR एक बेहद जरूरी और अहम मुद्दा है। कृपया इसे शालीनता से समझें और अपने वोट की हिफाज़त करें। क्योंकि वोट एक अमानत है वोट एक लोकतांत्रिक अधिकार है।
अब समझे कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया क्या है?
विस्तार से समझिए:-
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) है। यह एक विशेष अभियान है जो चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची (Electoral Roll) को अपडेट, शुद्धिकरण और पारदर्शी बनाने के लिए चलाया जा रहा है। यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से वैध है और चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
1.SIR का उद्देश्य (Objective) :-
A.मतदाता सूची को सटीक बनाना:-
फर्जी, डुप्लीकेट, मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना।
B.नए मतदाताओं को जोड़ना:- 18 वर्ष से ऊपर के योग्य नागरिकों को सूची में शामिल करना।
C.चुनावी गड़बड़ियों को रोकना:- फर्जी वोटिंग या डुप्लीकेशन को कम करना, ताकि चुनाव निष्पक्ष हों।
D.पारदर्शिता बढ़ाना:- BLO (Booth Level Officer) के माध्यम से घर-घर सत्यापन।
यह विशेष परिस्थिति में किया जाता है, जैसे जब वार्षिक पुनरीक्षण (Annual Revision) पर्याप्त न हो या बड़ी गड़बड़ियां पाई जाएं।
नोट: बिहार में 2025 की शुरुआत में SIR शुरू हुआ था, और अब पूरे देश में विस्तार हो रहा है।
चुनाव आयोग 24 जून 2025 के आदेश में पूरे देश में SIR शुरू करने का निर्णय ले चुका है।
उत्तर प्रदेश में 28 अक्टूबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक SIR का काम चलेगा।
2.अब दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह कि SIR प्रक्रिया कैसे चलती है? (Step-by-Step Process)
SIR एक समयबद्ध अभियान है, जो आमतौर पर 2-3 महीने चलता है।
मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:-
A.घोषणा और तैयारी (Announcement & Preparation):-
चुनाव आयोग राज्यवार तिथियां घोषित करता है।
BLO को सूचीबद्ध मतदाताओं की जानकारी दी जाती है।
B.घर-घर सत्यापन (Door-to-Door Verification):-
BLO घर जाकर Form-4 (नया नामांकन) भरवाते हैं।
सभी मौजूदा मतदाताओं को दस्तावेज सत्यापन की आवश्यकता नहीं होती। केवल संदिग्ध मामलों (जैसे नाम स्थानांतरित, मृत्यु) में।
नए मतदाता Form-6 भरते हैं।
C.आवश्यक दस्तावेज (Required Documents):-
नए मतदाता:-आधार कार्ड, वोटर ID, पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र आदि।
मौजूदा मतदाता:- केवल अगर नाम हटाने या अपडेट की जरूरत हो (Form-7 या Form-8)।
आधार अनिवार्य नहीं, लेकिन सत्यापन के लिए सहायक।
D.ड्राफ्ट सूची का प्रकाशन :-
सत्यापित डेटा से ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार की जाती है। 7-10 दिनों के लिए सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित।
E.आपत्तियां और दावा :-
कोई भी व्यक्ति नाम जोड़ने/हटाने की आपत्ति दर्ज करा सकता है (ऑनलाइन/ऑफलाइन)।
सुनवाई के बाद अंतिम सूची तैयार।
F.अंतिम सूची का प्रकाशन :-
प्रक्रिया समाप्ति पर अंतिम सूची जारी।
अब आप सभी मतदाओं को इसके लिए क्या करना है उस पर ध्यान दें -
नीचे दी गई लिंक पर जाकर अपना विधानसभा सेलेक्ट करे, उ प्र Election Commission ने वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट साइड पर डालदी है यानी UP में SIR की तैयारी शुरू हो गई हैं इसमें कुछ नहीं करना है , सीधे साईट पर जाकर वहां से अपने बूथ की pdf डाउनलोड करनी है और अपना या अपने बड़ो का वोट ढूंढना है मिल जाता है तो उसका स्क्रीन शॉट लेकर प्रिंट निकलवाना है l
SIR के फॉर्म में सिर्फ इसी प्रिंट को लगाना है अगर आपके पास ये है तो और कोई कागज नहीं देना l
और जो लोग उस समय नाबालिग थे तो वो अपने माता या पिता का 2003 की वोटर लिस्ट में नाम का स्क्रीन शॉट का फोटो लगा दें तो उनको भी इसके सिवा कुछ नहीं देना l
लेकिन अगर किसी का नाम लिस्ट में नहीं है तो उनको वही डॉक्युमेंट्स देने होंगे जो बिहार मे मांगे गए हैं l
तो अभी समय है उन डॉक्युमेंट्स को भी आप लोग तैयार कर सकते है l
लिंक https://t.co/v6TYvj5IEN…
✍️ एड. वाजिद अहमद
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@AzamSocialist@parvezahmadj@yasarshah_SP@YouthAgnstHate
बसपा वाले बड़े अजीब प्राणी है भाई मैं जरा भी कुछ लिख दूं तो तिलमिला जाते है लेकिन सच को सच मानने को तैयार ही नहीं होते। चलो कोई न एक आखिरी बार आपको समझाने की कोशिश करते है सुनिए -
सभी लोगों ने मिलकर एक पेड़ लगाया सभी ने खून पसीने से सीच कर पेड़ को बड़ा किया,पेड़ में जब फल लगने लगे, पेड़ छायादार हो गया तो एक परिवार का कब्जा हो गया जिसको चाहे छाया में बिठाया जिसको चाहे फल खिलाया।
चलो मुद्दे पर आता हूं मैने बसपा के खिलाफ लिखना बंद कर दिया है,लेकिन चलिए फिर से आज सच्चाई लिख रहा हूं।
तो सुनो इस पेड़ को सभी ने सीचा है तो फल छाया सभी को मिलना चाहिए बात क्यों किसी और पार्टी की करें।
अब कुछ मंद बुद्धि के लोग कहते हैं सारे पार्टी बनाते जा रहे एक जगह क्यों नहीं है तो सुनो और समझो।
1.एड.भाई चंद्रशेखर आजाद जी तेज तर्रार युवा के तौर पर समाज के बीच आए भीम आर्मी भारत एकता मिशन नामक संगठन बनाया, समाज के लिए लड़ाई लड़ने लगा, मनुवादी लोगों ने जेल तक कराई, हमारे लोगों ने उन्हें अपनाने के बजाय RSS का एजेंट बताया, जब लगातार समाज के मुद्दे उठाने लगा जिसके बदले उन्हें जेल की सजा मिलने लगी, तो कुछ समाज के बुद्धजीवी लोगों ने अपनी पार्टी बनाने की सलाह दी, तो बहन जी ने RSS का एजेंट बता दिया। तब भाई चंद्रशेखर आजाद ने मजबूर होकर के आजाद समाज पार्टी बनाई अगर बहन जी ने अपनाया होता तो आजाद समाज पार्टी पैदा नहीं होती।
२.भाई उपकार बावरा जैसा एक तेज तर्रार कद काठी का वास्तव में नेता जैसा मान्यवर कांशीराम साहब जैसा हष्ट पुष्ट भीम आर्मी छोड़ बसपा के लिए प्रचार करने लगा, बहन जी की रैलियों के चक्कर लगाता रहा,आज तक बहन जी ने नहीं अपनाया, एक शेर आज गुमनाम होता जा रहा है
3.भाई मंजीत सिंह नौटियाल अच्छी कद काठी का युवा तेज तर्रार ये भी भीम आर्मी छोड़कर बसपा के लिए प्रचार प्रसार करने लगा,सिर्फ बसपा के चुनाव निशान से चुनाव लड़ना चाहा सभी गिरे से गिरे लोगो को टिकट दिया पर मंजीत सिंह नौटियाल भाई को टिकट तक नहीं दिया और भईया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
4.एक और तेज तर्रार नवाब सतपाल तंवर युवा आया भीम सेना नाम का संगठन बनाया मनुवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहा बहुत सालों तक उसने भी बसपा से चुनाव की इच्छा जताई साफ इनकार हुआ भाभी को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, आज उसने भी पार्टी बनाने का ऐलान किया
5.एक और ऐसे ही युवा की दास्तान बसपा का पूर्व कोडिनेटर जय प्रकाश सिंह जबसे पार्टी से निकाल दिया गया वापस ही नहीं लिया दोष इतना है कि कोई दलाली मक्कारी नहीं सच बोल दिया आज करीब 7 साल से बसपा और बहन जी का गांव गांव सड़क पर प्रचार कर रहा है,मगर वापस नहीं लिया। वही सगा भतीजा आकाश आनंद को दो बार निकाल दिया फिर वापस ले लिया
अपने रिश्तेदार मेवालाल गौतम को राष्ट्रीय महासचिव बना सकती हैं पर जय प्रकाश सिंह को पार्टी में वापस नहीं ले सकती हैं बहन जी।
कल को अगर ये भी मजबूर हुआ तो यह भाई भी पार्टी बना सकता है कोई बड़ी बात नहीं होगी।
ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें अपनाया नहीं गया क्योंकि वह रिश्तेदार नहीं हैं या परिवार के नहीं हैं, करोड़ों देने वाले नहीं हैं, पर ईमानदार हैं, तेज तर्रार हैं, बुद्धिमान हैं।
अगर बहन जी वास्तविक में अब भी समाज हितैषी होती तो भईया भतीजा रिश्तेदार मेवालाल गौतम जैसों को राष्ट्रीय पद दे सकती हैं तो समाज को क्यों नहीं
अभी ईशान आनंद आने बाकी हैं ये खाली कुर्सी पड़ी है
मेवालाल गौतम सतीश चन्द्र मिश्रा भईया भतीजा मंजूर है पर समाज के तेज तर्रार बेटे नहीं ।
मैं अलल ऐलान डंके की चोट पर कहता हूं, अगर आज समाज अलग है और होता जा रहा है तो इसकी जिम्मेदार सिर्फ बसपा की नीतियां और नेतृत्व और साथ में यह दलाल कॉर्डिनेटर व्यवस्था हैं, लेकिन बहन जी आज चाहे तो एक पल में सबकुछ ठीक कर सकती हैं मगर नहीं ।
मिश्रा जी जिंदाबाद हो सकते हैं परिवार जिंदाबाद हो सकता है पर समाज को कोई जिंदाबाद न कहे
मान्यवर साहब के देहांत के बाद बसपा भी अब अन्य पार्टियों की तरह है कोई बसपा में बाबा साहब मान्यवर कांशीराम साहब का मिशन नहीं है,
पैसा लाओ टिकट के साथ साथ बड़े बड़े पद घर लेकर जाओ।
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विधायिका रागिनी विधायिका पूजा पाल को जवाब देते हुए एक लंबा चौड़ा फेसबुक पोस्ट लिखकर कहती हैं कि हमको पिता के विरासत की राजनीति नहीं मिली हैं,
असल मुद्दा क्रॉस वोटिंग का हैं जिस क्रॉस वोटिंग पर विधायिका @poojaplofficial को सपा से निष्कासित किया गया वैसी ही एक क्रॉस वोटिंग रागिनी सोनकर जी के पिता ने विधायक रहते सहयोगी बीजेपी की सरकार को धोखा देते हुए @samajwadiparty के पक्ष में की थी जिसके पुरस्कार के रूप में शादी के बाद स्थाई रूप से दिल्ली वासी बन चुकी रागिनी सोनकर को सपा का टिकट मिला, और सिर्फ एक नहीं बदले में दो टिकट मिला उनकी बहन को भी मिला,
रागिनी जी राजनीति में आज जो हैं पिता के विरासत पर ही हैं यहां तक कि चुनाव आयोग को हलफनामा भी पति के बजाय पिता के ही नाम और पते पर दिया हैं, जिसे वो लंबा चौड़ा फेसबुक पोस्ट लिखकर झुठला नहीं सकती हैं, विधायिका पूजा पाल ने एकदम सही नस दबाई हैं!
खैर मोहतरमा को अब तो पता चल ही गया होगा कौन हैं पूजा पाल।
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@WazidQureshi_ सभी साथी ज्यादा से ज्यादा इस एकाउंट को फॉलो करें। समाजवादी पार्टी की असल सच्चाई से मुस्लिम समाज और बहुजन समाज के लोगों को जागरूक करने एवं बहुजन राजनीति को मजबूत करने में एडवोकेट वाजिद के द्वारा दिन और रात मेहनत की जाती है।
मुसलमानों इनको पहचानते हो ये जो आपके भैया के साथ खड़े है इनका नाम सुनील सिंह है इन्होंने मुस्लिम महिलाओं को कब्र से निकाल कर बलात्कार करने की अपील की थी। लेकिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर किसी भी छुटभैय्ये नेता की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि इनको थप्पड़ मार सके। और सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव जी से पूछ सके की ऐसे सड़े हुए और महिलाओं के प्रति इतनी घिनौनी मानसिकता रखने वाले इंसान को 2022 के विधानसभा चुनाव के समय क्यों अपनी पार्टी में शामिल किया था और अभी तक कर रखा है । इतना ही नहीं भैया के बहुत करीबी भी है प्रेस कॉन्फ़्रेंस और रैली में जहां अक्सर मुसलमानों को धक्का दिया जाता है पहली लाइन में बैठते है, लेकिन मज़ाल है किसी सपाई मुस्लिम नेता ने उफ़्फ़ तक किया हो बल्कि बड़ी बेशर्मी से साथ फोटो खिंचाते है, यही वजह तो है हमारे हर जगह ज़लील होने की है!
✍️ वाजिद अहमद
@parvezahmadj@Imran_Shakeel_@ProfNoorul
हैलो @RahulGandhi जी, तो ये है आपकी मोहब्बत की दुकान? जहां 40 साल की निष्ठा को लात मारकर अस्पताल में पिटाई की जाती है? आपकी पार्टी के नेता तो बीजेपी को भी पीछे छोड़ रहे हैं—बुलडोजर की जरूरत ही नहीं, लाठी-डंडे से काम चला रहे हैं! और वो भी अपने ही कार्यकर्ता पर! वाह, क्या धर्मनिरपेक्षता है, क्या समावेशिता है! शायद अब समय आ गया है कि आप अपनी "भारत जोड़ो" यात्रा को "कांग्रेस जोड़ो" यात्रा में बदल लें, क्योंकि अगर आपके नेता ही आपस में मारपीट करेंगे, तो भारत तो दूर, आगरा भी नहीं जोड़ा जा सकता।
बंटी खान, जो पिछले 40 वर्षों से @INCIndia के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं और मुस्लिम समुदाय के बीच पार्टी का एक मेहनती और ईमानदार चेहरा हैं, के साथ अस्पताल में हुई इस मारपीट ने न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि पूरे मुस्लिम समाज में एक गहरा आक्रोश भी पैदा किया है।
अगर पार्टी के ही शहर अध्यक्ष अपने कार्यकर्ता को, वह भी एक अस्पताल में, पीट रहे हैं, तो यह "मोहब्बत" कहां है? यह तो वही पुरानी कहानी है—जब संगठन और सत्ता की कुर्सी पास आती है, तो नैतिकता और सिद्धांत खिड़की से बाहर फेंक दिए जाते हैं।
@RahulGandhi जी, और @priyankagandhi जी आपकी पार्टी के नेता अगर अपने ही कार्यकर्ताओं को इस तरह अपमानित करेंगे, तो आप बीजेपी पर "नफरत की राजनीति" का आरोप कैसे लगा सकते हैं? पहले अपने घर को तो संभालिए! यह घटना न केवल बंटी खान का अपमान है, बल्कि उन सभी मुस्लिम कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अपमान है जो कांग्रेस को अपना भरोसा देते रहे हैं।
एक आखिरी सवाल आखिर, अगर पार्टी के अपने ही कार्यकर्ता, जो मुस्लिम समुदाय से हैं, सुरक्षित नहीं हैं, तो वह आम मुस्लिम वोटरों का भरोसा कैसे जीतेगी? यह घटना उस समय हुई है जब कांग्रेस 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस तरह की हरकतें पार्टी की छवि को और कमजोर करने का काम कर रही हैं।
मैं उम्मीद करता हूं कि पार्टी इस घटना पर जरूर उचित कार्यवाही करेगी!
✍️ वाजिद अहमद
@Imranmasood_Inc@ShayarImran@ansarimransr
क्या बसपा एक अनुशासित पार्टी है?
बसपा भाजपा की बी टीम है इस बात को जनता के बीच साबित करने में खासकर के मुस्लिम समुदाय के बीच में फैलाने में कुछ बसपा के नेताओं और पार्टी में मिशन का फर्जी नकाब ओढ़े बैठे नेताओं का हाथ नहीं ?
@journalist_syed@vkjatav84
हालांकि मेरा बसपा से कोई ताल्लुक नहीं है लेकिन उस विचारधारा से बड़ा गहरा रिश्ता है जो बाबा साहब और मान्यवर साहब की विचारधारा है और उसी विचारधारा आज मुझे यह लिखने के लिए मजबूर किया है!
"बसपा पार्टी की नींव को खोखला करने वाला रोग है - मिशन का नकाब ओढ़े बैठे कुछ चापलूस और दलाल प्रवृत्ति के लोग!"
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक ऐसी पार्टी रही है, जिसने सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को आधार बनाकर देश की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई। इस पार्टी ने दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को आवाज दी, और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की। लेकिन आज, यह पार्टी अपने ही कुछ कार्यकर्ताओं कुछ नेताओं और पदाधिकारियों की चापलूसी और दलाली के कारण अंदर ही अंदर खोखली होती जा रही है। इसका ताजा उदाहरण है आगरा जिले की फतेहपुर सीकरी विधानसभा के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह जी का इस्तीफा, जिन्होंने मेहनत और ईमानदारी से पार्टी को मजबूत किया, लेकिन कुछ दलालों और चापलूसों के कारण उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पुष्पेंद्र सिंह जी जैसे कार्यकर्ता किसी भी राजनीतिक दल की रीढ़ होते हैं। उन्होंने फतेहपुर सीकरी विधानसभा में बसपा को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत की। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता और समर्पण ने पार्टी को नई ऊर्जा दी थी। लेकिन उनकी मेहनत को कुछ स्वार्थी तत्वों ने नजरअंदाज किया, और चापलूसी और दलाली की सियासत ने उन्हें पार्टी से अलग होने के लिए मजबूर कर दिया।
बसपा में कुछ ऐसे लोग हैं, जो अपने नंबर बढ़ाने के लिए कोऑर्डिनेटरों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की चापलूसी करके अपनी स्थिति मजबूत करते हैं। ये लोग न तो कार्यकर्ताओं के हितों की चिंता करते हैं और न ही पार्टी के मूल सिद्धांतों को समझते हैं। इनका एकमात्र उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ और सत्ता का सुख भोगना है। ये चापलूस और दलाल मेहनती कार्यकर्ताओं की मेहनत को कमजोर करते हैं, उनकी आवाज को दबाते हैं और पार्टी के भीतर एक अस्वस्थ माहौल बनाते हैं। ऐसे लोग न केवल पार्टी के नेतृत्व को गलत सलाह देते हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी तोड़ते हैं।
पुष्पेंद्र सिंह जी जैसे मेहनती और ईमानदार कार्यकर्ता जब इस तरह के माहौल में काम करते हैं, तो उनकी ऊर्जा और समर्पण का गलत इस्तेमाल होता है। ये चापलूस और दलाल, जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए नेतृत्व के सामने झूठी तारीफों का पुल बांधते हैं, पार्टी की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं। वे उन कार्यकर्ताओं को हाशिए पर धकेल देते हैं, जो वास्तव में पार्टी के लिए जमीन पर काम करते हैं।
बसपा की स्थापना बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर और कांशीराम जी के विचारों पर हुई थी, जिन्होंने सामाजिक समानता और न्याय की लड़ाई लड़ी। लेकिन आज कुछ लोग इस विचारधारा को भूलकर केवल अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में लगे हैं। ये लोग पार्टी को एक मंच के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जहां वे सीनियर पदाधिकारियों की नजरों में अपने नंबर और प्रभाव को बढ़ाने के लिए चापलूसी और दलाली का सहारा लेते हैं। यह आंतरिक भ्रष्टाचार और स्वार्थ पार्टी को कमजोर कर रहा है, जिसके कारण कार्यकर्ताओं का विश्वास टूट रहा है।
पुष्पेंद्र सिंह जी का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि जब मेहनती और ईमानदार लोग उपेक्षित होते हैं, तो पार्टी का आधार कमजोर होता है। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं का अपमान है, जो बसपा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
✍️ वाजिद अहमद
@journalist_syed@Mayawati@bspindia@vkjatav84@AnandAkash_BSP@PalVishwnathbsp
इटावा में कथावाचक के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने समाज में गहरा आक्रोश पैदा किया है, जिसकी झलक इस तस्वीर में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। एक युवा, हाथ में पेंट और ब्रश लिए, सार्वजनिक स्थान पर अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है। तस्वीर में लिखा संदेश—"इस गांव में ब्राह्मणों को पूजा-पाठ कराना सख्त मना है"—न केवल एक विरोध का प्रतीक है, बल्कि यह सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों पर हमले के खिलाफ जनता की दृढ़ भावना को भी दर्शाता है।
यह युवा, जो तस्वीर में अपने गुस्से को अभिव्यक्त कर रहा है, पीडीए के उस दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जो कहता है कि सभी वर्गों को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान और प्रयोग करने का समान अवसर मिलना चाहिए। इस तरह के विरोध समाज में असहिष्णुता को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया हैं, और इसे दबाने के बजाय इसके पीछे की पीड़ा को समझना जरूरी है।
यह तस्वीर पीडीए के लिए एक शक्ति का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो सकती है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकती है।
✍️ वाजिद अहमद
@DrLaxman_Yadav@samajwadiparty@yadavakhilesh@BhimArmyChief