हुलिया देख के हुनर का अंदाज मत लगाना
ये है UP देवरिया की पूनम देवी
यूट्यूब पर मैथ्स और फिज़िक्स पढ़ाती है (60K SUBS)
साधारण बोर्ड , बिना मेकअप, साधारण कपड़े पहनकर पढ़ाती है
यहा कंट्रोवर्सी नहीं , केवल पढ़ाई होती है
शिक्षक फैजल खान जेसे नहीं...पूनम देवी जेसे होते है
बड़े भाई रमेश सुथार (बुआ आले) को राजस्थान फार्मासिस्ट में अंतिम चयन होने की बहुत-बहुत बधाई। यह सफलता आपके वर्षों के संघर्ष, धैर्य, मेहनत और समर्पण का परिणाम है। जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ आई हों, आपने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। इस यात्रा में जिन परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने आपका साथ दिया, उनका भी हृदय से धन्यवाद। आपकी यह उपलब्धि हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। ईश्वर आपको आगे भी निरंतर सफलता, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करे। एक बार फिर ढेरों शुभकामनाएँ भाई 🌹👏
मौलाना साब जो फरमा रहे हैं उसे हर हिन्दू को सुनना और समझना बहुत ही जरूरी है...
बात सिर्फ आपके देश और धर्म की नहीं.... बात अब आपके घर बच्चों तक पहुँच चुकी है
मौलाना का कहना है :
"मेरा जन्म भारत में हुआ और मेरी परवरिश भी भारत में हुई। लेकिन मैं पूरी तरह पाकिस्तान और आज़ाद कश्मीर का समर्थन करता हूँ। मुसलमान होने के नाते, ईमान वाले होने के नाते, हम सब एक जिस्म की तरह हैं। हमारी वफादारी किसी पासपोर्ट या किसी सीमा से नहीं है। हमारी वफादारी अल्लाह, पैगंबर मुहम्मद और अपने साथी मुसलमानों के प्रति है।"
हिन्दू बात को समझ लें तो बेहतर है
श्याम मीठा सिंह का इलाज कर दिया ...?🤣
कॉकरोचो के समर्थन मे जंतर-मंतर गया था
एक भाई ने पहचान लिया... फिर क्या था ....😀
@ShyamMeeraSingh बर्फ से सिकाई करना आराम मिलेगा
@YogeshP05193127@AnujShukla00009 अगर आप ब्लर फोटो क़ो AI से एडिट करोगे तो वो अपने मन से कुछ भी टेक्स्ट ऐड कर देता है
और जो उसने एड्रेस डाला वो गलत है तभी ब्लर नहीं किया 😂
"मेट्रो में बंदर"...
दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन (सराय काले खां स्टेशन) पर दिलचस्प घटनाक्रम यात्रियों ने देखा।
दरअसल, एक "बंदर" उनका सहयात्री बना और वह भी बिना टिकट। इस सीट से उस सीट पर उछलकूद करता एक लड़की की गोद में जा बैठा। उसे "किस" भी कर दिया।
जाहिर है, बंदर पैनिक नहीं हुआ। अन्यथा कुछ यात्री घायल जरूर होते। हालांकि, कुछ पैसेंजर्स के चेहरे पर डर जरूर दिख रहा था।
प्रश्न यह है कि मेट्रो में बंदर आखिर आया कैसे?
क्या इस तरह बंदर या अन्य जानवरों का मेट्रो में पाया जाना, यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं है?
यदि बंदर पैनिक होकर हमला कर देता, तो जिम्मेदार कौन होता?
...और काटो जंगल। इनका घर खत्म होगा, तो तुम्हारे घरों में डेरा डालेंगे।
राम मंदिर पर आरोप लगाने वालों से एक सीधा सवाल है।
अखिलेश यादव आज तक भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद एक बार भी प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए अयोध्या नहीं गए, लेकिन राम मंदिर और उससे जुड़े हर विषय पर आरोप लगाने में सबसे आगे दिखाई देते हैं।
यदि अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी और पूरा विपक्ष इतना ही आश्वस्त है कि कोई घोटाला या चोरी हुई है, तो उनके पास जो भी सबूत हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रोपेगेंडा चलाने के बजाय सीधे एसआईटी को सौंपना चाहिए। केवल आरोप लगाना और सुर्खियां बटोरना किसी को दोषी साबित नहीं करता।
करोड़ों रामभक्तों की आस्था के केंद्र राम मंदिर को बार-बार विवादों में घसीटना आखिर किस राजनीति का हिस्सा है? पहले भूमि पूजन पर सवाल, फिर निर्माण पर सवाल और अब चढ़ावे को लेकर आरोप। यह सिलसिला संयोग नहीं, एक सुनियोजित राजनीतिक नैरेटिव प्रतीत होता है।
यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसे कठोरतम दंड मिलना चाहिए। लेकिन यदि आरोप निराधार और झूठे साबित होते हैं, तो झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। कानून में किसी व्यक्ति पर झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाना भी गंभीर विषय है, और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
देश को अफवाह नहीं, तथ्य चाहिए। फैसला सोशल मीडिया की राजनीति से नहीं, एसआईटी की जांच और प्रमाणों से होगा।
जय श्री राम। 🚩🚩