सचिन पायलट जी ने 2004 में 26 साल की उम्र में पहली बार चुनाव लड़ा तो पायलट साहब के चुनावी कैंपेन को कवर करने विदेशी मीडिया आया था
गांव में चौपाल पर बैठकर गांव के लोग, गाय, भैंस, बकरी, मोर इन सबके बीच बैठकर देशी इंटरव्यू दिया
यह वाकया स्पष्ट करता है कि सचिन पायलट शुरू से ही लोकप्रिय है।
@SachinPilot
एलडीसी के उक्त मामले की रिपोर्ट बनाकर RSSB को भेज दी अब RSSB निर्णय लेगा ???
बड़ा सवाल - क्या रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए
युवाओं के सामने सच नहीं आना चाहिए
लोकतंत्र में बेरोजगारों के साथ ही तानाशाही क्यो की जा रही है लगातार ।।
न विस्तृत सिलेबस ,न अंकभार ,न परीक्षा पैटर्न की पालना ??????
कम से कम इस रिपोर्ट को तो सार्वजनिक करना चाहिए 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔
खुशखबरी! माध्यमिक शिक्षा में 1.23 लाख नए पदों का प्रस्ताव ।।
प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ी राहत!
माध्यमिक शिक्षा विभाग में 1.23 लाख पद बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार। स्कूल व्याख्याता, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी समेत कई कैडर में भारी बढ़ोतरी।
नई भर्तियों की उम्मीद बढ़ी! 🎉
#हनुमान_किसान
CET स्नात्तक अभ्यर्थी इस पोस्ट को सेव रखना - अंकभार जारी नहीं होने से कुछ भी संभव हो सकता है RAS pre से भी ज़्यादा सिलेबस आपका है वो RAS pre का पिछले दस साल का परिणाम देख लेना 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔
अंकभार जारी करने का बोर्ड 5 मिनट में निर्णय ले सकता है कोई पत्राचार किसी के आदेश सहित किसी मुख्य चरण से भी नहीं गुजरना पड़ेगा 🤔🤔🤔
1% भी पेपर पूर्व की तरह डिलीट आउट ऑफ़ सिलेबस और मनमर्जी से किसी भी भाग से कुछ भी और किसी भाग से कुछ भी नहीं अटपटा आ गया तो आने वाले सभी भर्तियों से आप हाथ धो बैठोगे 🤔🤔🤔🤔
बोर्ड का वही जवाब आयेगा हमने ब्लैकलिस्ट कर दिया हमसे ये विसंगति दूर नहीं हो रही है जबकि सच ये है की बोर्ड ख़ुद चाहता ही नहीं कभी ये विसंगति दूर हो क्यो इसका जवाब आने वाले समय में दिया जाएगा ।
बोर्ड अध्यक्ष जी चाहते तो युवा हित में निर्णय लेते जिससे विसंगति उत्पन्न होने की संभावना ही नहीं रहती
विशेष ✅✅- पिछली एग्जाम में नेगेटिव मार्किंग नहीं थी पहले लागू थी लेकिन हटवाई गई सिर्फ सिलेबस का अंकभार जारी होने के कारण
मुझे पूरा भरोसा था की इस एग्जाम में अंकभार जारी कर दिया जाएगा लेकिन 🤔🤔🤔🤔🤔🤔
इस पोस्ट सेव रखना CET परिणाम के दिन अगर RSSB की मंशा पूरी हो गई तो आपको समझ आयेगा
अंकभार जारी होना चाहिए युवाओं को इतना तो हक है की सब कुछ क्लियर हो उनके सामने 🙏🙏🙏🙏
असल मुद्दा पानी का था या दर्द आरक्षण का है!🤔
आप इतने ही हितैषी है तो एक काम करिए SC/ST मे क्रीमीलेयर और नॉन क्रीमीलेयर को लागू करवा दीजिए सुप्रीम कोर्ट ने कह रखा है😳
एक ही तरीके के लोक पूरे ST के रिजर्वेशन को खा रहे है और जो नीचे रह गए है जिनको फायदा नही मिल रहा है आप हटिए ना उस मे से
- हाकिम सिंह बैसला
माफ कीजिए मंत्री अविनाश गहलोत जी, ज़मीनों के बाद कंपनियों के काग़ज़ जुटाने में मुझे थोड़ी देरी हो गई। मैं आपकी जमीनों की बात कर रहा था लेकिन अब जनता का ध्यान उन कंपनियों की ओर खींचना चाहता हूं जो आपके मंत्री बनने के बाद आपके अकाउंटेंट, आपके बचपन के दोस्त, अकाउंटेंट की माताजी, आपके साले साहब और आपके भाई के नाम पर खड़ी की गई है। ऐसे ही मैंने आपकी तुलना सीएम मोहन यादव एंड फैमिली से नहीं किया था।
1. रिथम्बरा माइनस - 16/03/2024 को यह कंपनी बनी। इस कंपनी में आपके भाई किशोर गहलोत (डायरेक्टर), आपके अकाउंटेंट दोस्त ओमप्रकाश ( एडिशनल डायरेक्टर) और आपके साले साहब रामनिवास जी डायरेक्टर हैं। इस कंपनी ने करीब 8 करोड़ रुपए का लेनदेन दिखाया है।
2. हीलियोबल्ड वेंचर्स - 11/03/2026 यानी की 3 महीने पहले यह कंपनी बनी जो कि कंस्ट्रक्शन का काम करती है। कंपनी में आपके अकाउंटेंट दोस्त ओमप्रकाश जी और आपके बचपन के दोस्त बाबू सिंह जी डायरेक्टर है।
3. श्री राणा माइनस - 2 महीने पहले 02/04/2026 को यह कंपनी बनी जिसमें आपके अकाउंटेंट दोस्त ओमप्रकाश और एक अन्य व्यक्ति गौरव सोलंकी डायरेक्टर है।
4. प्रतिष्ठा माइनस - 26/04/2026 को बनी इस कंपनी में खास बात है कि मंत्री अविनाश गहलोत के अकाउंटेंट दोस्त ओमप्रकाश जी की माताजी रामकन्या जी को डायरेक्टर बनाया गया है।
अब कुछ सबसे खास चीज़ें। अविनाश गहलोत के मंत्री बनने के बाद जितने लोग डायरेक्टर हैं सभी के व्यापार बदल गए हैं। ओमप्रकाश एक साधारण अकाउंटेंट थे जो आज कई कंपनियों में डायरेक्टर हैं। बाबू सिंह मंत्री जी के बचपन के दोस्त हैं और सहपाठी है तो उनकी भी प्रगति हुई है। किशोर गहलोत, मंत्री जी के भाई किशोर गहलोत की कपड़ों की दुकान थी लेकिन अब कंपनियों में डायरेक्टर है। मंत्री जी के साले साहब, रामनिवास जी पहले हैदराबाद में फैंसी स्टोर चलाते थे जो अब कंपनी में डायरेक्टर है। सबसे खास बात की अकाउंटेंट ओमप्रकाश की माताजी रामकन्या जी पहले जैतारण में सब्जी की दुकान चलाती थीं जो अब कंपनी में डायरेक्टर है।
नोट - मंत्री जी के अकाउंटेंट ओमप्रकाश जो ऑफिस एड्रेस जैतारण में चलाते हैं उसी पर हीलियोबिल्ड वेंचर्स और राणा माइनस कंपनी चल रही है।
इसके अलावा कई अन्य कागज़, लेनदेन रिसिप्ट और सबसिडी वाली कंपनी की जानकारी जल्द ही आपके साथ साझा करूंगा।
मंत्री जी यह कोई आरोप नहीं है, सिर्फ प्रमाण है आपने अच्छी तरक्की की है। उम्मीद है विभाग "सामाजिक न्याय" की संरचना के मुताबिक आप काम कर रहे हैं।
@AvinashGehlot_@BhajanlalBjp@AmitShah@narendramodi@blsanthosh
संगठन सृजन शिविर सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं है।
कल राहुल गांधी जी की मौजूदगी में यह शिविर प्रारंभ हुआ। उन्होंने हमेशा कहा है कि कांग्रेस की जड़ें ज़िलों में हैं, दिल्ली में नहीं। यह शिविर उसी सोच का हिस्सा है।
जो साथी ज़िला अध्यक्ष बनकर यहाँ बैठे हैं, उनके कंधों पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी है। यह नई भूमिका है, लेकिन संघर्ष पुराना है। इस शिविर में हम मिलकर सीखेंगे: संगठन कैसे चलता है, बूथ कैसे मज़बूत होता है, जनता से जुड़ाव कैसे बनता है। यह ज्ञान किताबों में नहीं मिलता। यह मैदान में मिलता है, साथियों के बीच मिलता है।
राहुल गांधी जी की यह सोच है कि नेतृत्व ऊपर से नहीं सौंपा जाता। वह ज़मीन से उठता है, कार्यकर्ता से उठता है।
यह ऊर्जा, यह जोश, यही हमारी सबसे बड़ी पूँजी है।
जनता की उम्मीदें बड़ी हैं। और यह शिविर उन्हीं उम्मीदों को पूरा करने की तैयारी है।
#SangathanSrijanShivir #NayiSoch #SachinPilot #Congress #ZilaAdhyaksh #KaryakartaHiNeta #CongressOrganisation #JantaKiBaat #RahulGandhi #HamareZile
#WATCH | Ajmer, Rajasthan: On a media report that his own ministry gave him Rs 99-lakh subsidy, under a scheme, for his cucumber farm, MoS Agriculture Bhagirath Choudhary says, "I am a farmer and have been in agriculture since my childhood days...I have not hidden anything. Thousands of farmers polyhouses and avail subsidies. So, I did too. I had applied in 2018. I have installed a board there and mentioned all the loans and subsidies I took. I also train farmers there in new techniques and natural farming...All local officials have visited the spot. So, what did I hide?..."
मोदी सरकार के मंत्री भागीरथ चौधरी का बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है।
कृषि राज्य मंत्री भागीरथ ने अपने ही मंत्रालय से 99 लाख रुपए की सब्सिडी उठा ली - खीरे की खेती के लिए।
मंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद ये खेल किया गया। भागीरथ ने अप्रैल 2025 में सब्सिडी मांगी और सिर्फ 14 दिन में अप्रूवल भी मिल गया।
ये सीधे तौर से पद के दुरुपयोग का मामला है। मंत्री बनकर जनता के पैसों की लूट का मामला है।
नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को खुली छूट दे रखी है। संदेश साफ है - खुद खाओ, मुझे भी खिलाओ, जमकर लूट मचाओ।
इस खुलासे के बाद भागीरथ चौधरी को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
उनका इस्तीफा लिया जाए और उनके भ्रष्टाचार की जांच की जाए।
Indian Express में प्रकाशित खबर बेहद चौंकाने वाली है कि केंद्रीय कृषि मंत्री को उन्ही की मंत्रालय की योजना के तहत ₹99 लाख की सब्सिडी मिली है!
जब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री स्वयं NHB बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं, तो क्या यह मामला Conflict of Interest से जुड़ा हुआ नहीं है?
इसी प्रकार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और उनके परिजनों पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद से जुड़े बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला भी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के मंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से जुड़े आरोप और उनकी संलिप्तता लगातार उजागर हो रहे हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।
इन सभी मामलों की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, जिससे देश की जनता के सामने सच्चाई आए।
गरीब किसानों के नाम पर योजनाएं.. और लाभ किसे मिल रहा है?
मंत्री जी ने कृषि मंत्रालय से ₹99 लाख रुपए की सब्सिडी उठाई - खीरे की खेती के लिए। अप्रैल 2025 में सब्सिडी मांगी और सिर्फ 14 दिन में अप्रूवल भी मिल गया। ये सीधे तौर से पद के दुरुपयोग का मामला है।
गरीब कल्याण और किसान हित की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार से अब एक सीधा सवाल है – आखिर इन योजनाओं का वास्तविक लाभार्थी कौन है?
बड़े-बड़े बजट, करोड़ों-अरबों की घोषणाएं और जनकल्याण के दावे... लेकिन जब जमीन पर हकीकत देखी जाती है तो सवाल खड़े होते हैं।
एक ओर देश का सामान्य किसान कुछ हजार रुपये की सब्सिडी के लिए महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है... वहीं दूसरी ओर ऐसी खबरें सामने आती हैं कि सत्ता और व्यवस्था से जुड़े लोगों को लाखों रुपये की सब्सिडी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
अगर किसान के नाम पर बनी व्यवस्था का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसान तक नहीं पहुंचता, बल्कि वही लोग उसका फायदा उठाने लगें जो उस व्यवस्था का हिस्सा हैं, तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और नैतिकता का गंभीर प्रश्न है।
कृषि इस देश की अर्थव्यवस्था की आत्मा है। किसानों को सशक्त बनाने के लिए दी जाने वाली हर सहायता का उद्देश्य उस किसान तक पहुंचना चाहिए, जो अपनी मेहनत से देश का पेट भरता है।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा सिर्फ नियम बनाने की नहीं होती, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करने की भी होती है।
#ExpressInvestigation
क्या कारण है CUT ऑफ 🤔- पोस्ट कम हो या ज्यादा किसी भी भर्ती की CUT ऑफ 80%+ ही जा रही है 🤔🤔🤔
पेपर हार्ड आए सरल आए आउट ऑफ़ सिलेबस सवाल आए ,सवाल डिलीट हो ,
कुछ भी CUT ऑफ वही रहती है
आपके अनुसार इसका मुख्य कारण क्या हो सकता है
🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔
एक जीता हुआ संसद का जनप्रतिनिधि ऐसी भाषा बोलता है जैसे कोई 8 बजे बाद पव्वा मारकर आ गया हो 🤣
मखा भिया ऐसे तो पव्वा मारने वाले भी न बोले !
एक विधायक बोलता है हम नक्सली है 😭🤣
कर्नल साब ने और मैने ऐसी ऐसी बाते दबाकर रखी है अगर बाहर आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे ध्यान रखना 🫣😎
आरक्षण आंदोलन में इन्हीं नेताओ ने लड़ाई करवा दी नहीं गुर्जर मीणा एक ही रोटी खाते थे पहले और लड़ाई कराने वाले भी वही है जो बोल रहे हैं मुख्यमंत्री आप कुछ करो नहीं में कूद रहा हूं... मखा कूद जा भिया 🤣😂 ~ विजय सिंह बैंसला
भाईचारे की बात आप कर रहे हो?
आपका भाषण सबने सुना हैं, आप राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए #पाँचना बांध विवाद को गुर्जर मीणा विवाद बनाने में लगे हो l
कभी बेनिवाल साहब के साथ तो कभी नमोनारायण जी के साथ कभी नरेश मीणा के साथ हुए जब दाल नहीं गली तो गुर्जर मीणाओं में आग लगा रहे हो l
विजय बैसला जी, राजनीति में हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा होती है।
साल 2009 में आपके पिताजी Namo Narain Meena से चुनाव हारे थे, और 2023 में आप Harish Meena से पराजित हुए। हार और जीत दोनों राजनीतिक जीवन का हिस्सा हैं।
आप जिस तरह अपने प्यादों के कंधों पर बंदूक रखकर, जो भाषा के रूप में गोले दाग रहे हो, वह दो समाजों के बीच में खाई पैदा कर रहे हैं, जो कभी नहीं भर पाएगी।
लेकिन यदि राजनीतिक पराजय की निराशा को समाजों के बीच वैमनस्य फैलाकर निकाला जाए, तो यह न केवल लोकतंत्र बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी नुकसानदायक है।
गुर्जर और मीणा समाज के बीच भाईचारा और एकता पूर्वी राजस्थान की ताकत रही है। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समाजों को आपस में लड़ाने का प्रयास किसी के हित में नहीं है।
राजनीति सेवा और समाधान का माध्यम होनी चाहिए, समाजों में विभाजन का नहीं। @VijaySBainsla