भाजपा आई टी सेल संयोजक पूर्व -भाजपा युवा मोर्चा पूर्व मीडिया प्रभारी- नगर पालिका चुनाव सह प्रभारी सादडी-भाजपा बूथ पूर्व वसुंधरा राजे समर्थक पाली राजसथान
भले ही इस सीट से बिहार में सत्ता के समीकरण पर कोई प्रभाव न पड़े, लेकिन ये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का गृह विधानसभा क्षेत्र है।
यहाँ से BJP हार रही है। एक तो उम्मीदवार बदलना पड़ा। ऊपर से 40% लोग भी वोट देने नहीं निकले। उसपर से नीरज सिन्हा के बूथ पर ही भाजपा हार गई। अतः, इसे एक बड़ा उलटफेर माना जा सकता है।
बिहार में 4 महीने में 2 कार्यपालक अधिकारियों की हत्या हो चुकी है। निर्दोष भरत तिवारी को मार डाला गया। नीट विरोधी आंदोलन में भी जमकर हिंसा हुई। बिहार को सँभालना आसान नहीं है। सम्राट चौधरी इसमें विफल हो रहे हैं। नीतीश कुमार अस्वस्थ होकर भी इनसे अच्छे से ही राज्य चला रहे थे।
फिर भी, मैं ये दावे नहीं कर सकता कि 'जन सुराज' बिहार में भाजपा-राजद या लोजपा के स्तर की भी ताक़त बन गई है। अभी लंबा रास्ता तय करना है।
पाली लोकसभा के लोकप्रिय सांसद और 'एक राष्ट्र एक चुनाव' जेपीसी के माननीय अध्यक्ष
आदरणीय श्री पी.पी. चौधरी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ और दीर्घायु रखे।
@ppchaudharybjp
"सत्ता जिनका लक्ष्य नहीं, सेवा जिनका धर्म है" – ये लाइन वसुंधरा राजे जी के काम करने के अंदाज़ को सच में पकड़ लेती है। राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री रही हैं, और धरातल पर काम करने के लिए जानी जाती हैं।
@VasundharaBJP
आदरणीय वसुंधरा राजे जी
सादर प्रणाम आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन की वजह से आज मेरी एक अलग पहचान है मैं आपके सच्चे सिपाही के रूप में समाज की सेवा करता रहूंगा।
आपका आशीर्वाद बना रहे।
आपके नेतृत्व में काम करने का सौभाग्य मिला। आपने एक कार्यकर्ता को पहचान दी @VasundharaBJP
टीम बड़ी होने से नही सही समय पर सही कार्य करने से होती है,यह बात समझना आवश्यक है, संगठन को मजबूत बनाने को करते है वे अलग होते है,लेकिन पद बाटतें समय बस अपने प्यारे दूजे लाल दुलारे देखे जायेगें तो समय पर चौकने व जवाबदेही कार्यकर्ता नही मिलेगें @VasundharaBJP
दैनिक भास्कर, जयपुर_ का कटिंग है। हेडलाइन काफी तगड़ी है
भीलवाड़ा के देवदपुरा में PM मोदी का वर्चुअल कार्यक्रम था। सरकार की स्कीमों के असली लाभार्थी "गोपालदास वैष्णव" को बुलाने की जगह, अफसरों ने "फर्जी गोपालदास खेड़ा" को स्टेज पर खड़ा कर दिया @VasundharaBJP
गर्मी का असर इस साल भी काफी तेज है, और मोदी जी ने बार-बार लोगों से अपील की है - पानी ज्यादा पिएं, दोपहर 12-4 के बीच धूप से बचें, ORS रखें, पशुओं का भी ख्याल रखें।
@narendramodi
राजस्थान में संगठन महासचिव अजेय कुमार की नियुक्ति । तेलंगाना में चंद्रशेखर की परीक्षा।
राजस्थान भाजपा में संगठन महामंत्री का पद दो वर्षों से अधिक समय से खाली पड़ा था। अब अजेय कुमार की नियुक्ति के साथ यह रिक्तता समाप्त हो गई है। लेकिन इस नियुक्ति के साथ एक और सवाल चर्चा में है—पूर्व संगठन महामंत्री चंद्रशेखर को तेलंगाना भेजे जाने के पीछे की राजनीतिक कहानी क्या है?
चंद्रशेखर को तेलंगाना किसी सामान्य संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए नहीं भेजा गया है । भाजपा के लिए तेलंगाना दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण विस्तार क्षेत्र है। पार्टी लंबे समय से वहाँ राजनीतिक शक्ति हासिल करने की कोशिश कर रही है ।ऐसे में चंद्रशेखर की नियुक्ति भाजपा नेतृत्व की एक रणनीतिक चाल है जबकि इसके कई अर्थ निकाले गए। मकसद साफ है — अब देखना यह है कि वे संगठन को कितना मजबूत कर पाते हैं और चुनावी परिणामों में कितना योगदान दे पाते हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को तेलंगाना की 17 में से 8 सीटों पर जीत मिली और पार्टी का वोट प्रतिशत लगभग 35 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह भाजपा के लिए उत्साहजनक प्रदर्शन है ।पर विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन लचर और कमज़ोर रहा है । विधानसभा में सिर्फ़ आठ सीटें और 14 फ़ीसदी वोट मिले थे। यही असली परीक्षा है चंद्रशेखर की । लोकसभा में मिले 35 फ़ीसदी वोटों को आगे बढ़ाकर तेलंगाना में पहली बार भाजपा की सरकार बन गई तो भारतीय जनता पार्टी में उनका क़द बहुत बढ़ा हो जाएगा
अब असली परीक्षा विधानसभा चुनावों में होगी। तेलंगाना की राजनीति का गणित लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अलग रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था ।
ओवैसी का अपना एक सीमित दायरा है ।के. चंद्रशेखर राव (KCR) की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) कमज़ोर हो रही है उसका वोट बैंक कांग्रेस की तरफ़ शिफ़्ट हो गया है । कांग्रेस की ताक़त बढ़ा सकता है असल में लगता है मुक़ाबला सीधा भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच रहेगा।
चंद्रशेखर को यही बिसात बिछानी है ।कामकाज का वास्तविक मूल्यांकन भी इसी कसौटी पर होगा। संगठन खड़ा कर उसे विधानसभा चुनावों में सीटों में बदलना कठिन चुनौती है। तेलंगाना में भाजपा की अगली राजनीतिक छलांग इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने बढ़े हुए जनाधार को स्थायी वोट बैंक में बदल पाती है या नहीं। यही वह राजनीतिक प्रयोग है, जिसके सकारात्मक परिणाम के लिए भाजपा ने चंद्रशेखर को तेलंगाना के मैदान में उतारा है ।
अजेय कुमार के लिए भी राजस्थान में चुनौतियां कम नहीं है उसकी चर्चा फिर कभी। @BJP4Rajasthan@BJP4Telangana@chshekharbjp
राजस्थान में नए संगठन महामंत्री की तैनाती तुरंत प्रभाव से क्यों की गई ?
वजह साफ़ है की सरकार और संगठन का तालमेल थोड़ा ठीक नहीं चल रहा था बूथ लेवल से प्रदेश के कार्यकर्ताओं तक में बूस्टर डोज की आवश्यकता थी क्योंकि कार्यकर्ता की सुनने वाले बहुत कम थे काना फूसी करने वाले ज़्यादा बीजेपी के कुछ पदाधिकारी भी बे लगाम हो चुके थे नए नए लोग राज्यसभा की कुर्सी का ख्वाब देख रहे थे पुराने कार्यकर्ता हताश और निराश थे
संघटन से निकल कर सत्ता की कुर्सी पर पहुँचने वाले भजन लाल शर्मा का लगातार फीडबैक दिल्ली पहुँच रहा था
यही कारण था संघटन महामंत्री की तुरंत तैनाती का जिससे कैडर बेस पार्टी अनुशासित तरीक़े से वापस से कार्यकर्ताओं का सम्मान कर सके
संघटन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को अब बूस्टर डोज उनके काम के हिसाब से मिलेगी
सख्त अजेय विजय की प्लानिंग पर काम करेंगे बेहतर कार्यकर्ताओं को समय सम्मान सहयोग दिया जाएगा
अगले एक महीने के अंदर राजस्थान के संघटन में भी मुख्य पद पर बड़ा बदलाव दिखाई देगा
क्योंकि दिल्ली में बैठे संघटन के संतोष राजस्थान के संघटन के लिए कई बार असंतोष जाहिर कर चुके है
राजस्थान भाजपा के नए संगठन महामंत्री @ajaeybjp आप इन बिंदुओं से समझिए कि क्यों निष्क्रिय प्रदेशाध्यक्ष साबित हुए हैं मदन राठौड़? अब आपकी ओर होगी सबकी नज़र।
जनता के बीच लोकप्रिय बने रहने और जनता को संतुष्ट रखने में सरकार का कामकाज ज़रूरी होता है। कई बार जब कुछ मोर्चों पर सरकार फेल होती है तो जिम्मेदारी पार्टी प्रदेशाध्यक्ष की बनती है कि वे कार्यकर्ताओं में जान फुंके और उन्हें शिकायत का मौका ना दे। राजस्थान में हालात ये है कि जनता से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ता दुखी हैं।
1. भाजपा में छोटी से छोटी खबर लीक नहीं होती है। बीजेपी कवर करने वाले पत्रकारों को कल सुबह तक नहीं पता था कि आज राजस्थान भाजपा संगठन महामंत्री का ऐलान होगा, तो नाम पता होना तो दूर की बात है। ऐसे में मदन राठौड़ के प्रदेशाध्यक्ष रहते 5 बार अलग - अलग ( जिला कार्यकारिणी, प्रदेश कार्यकारिणी) लिस्ट लीक हुई है।
2. संगठन में कार्यकर्ता और सरकार के बीच एक ब्रिज की तरह प्रदेशाध्यक्ष काम करता है लेकिन मदन राठौड़ ने इसे बखूबी नहीं निभाया है। पूरे प्रदेश में कार्यकर्ता नाराज़ है। दबे ज़बान सब कहते हैं कि भले ही सरकार ठीक ना चल रही हो लेकिन कम से कम संगठन में तो मजबूत व्यक्ति होना चाहिए।
3. काउंटर करने का कोई प्लान भाजपा संगठन के पास नहीं होता है। RLP सुप्रीमों ने सीएम को "मूर्खाधिराज" कह दिया तो नेताओं से लेकर हर छोटे कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराया और काउंटर किया लेकिन वो उल्टा पड़ गया। सारा फुटेज और सराहना RLP ले गई लेकिन भाजपा के हाथ निराशा ही लगी। जबकि इंदिरा गांधी के लिए अविनाश गहलोत द्वारा दिए गए बयान के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा धरने पर बैठ गए थे।
4. सबसे ज़्यादा आलोचना बयानबाजी को लेकर हो रही है। प्रदेशाध्यक्ष ने समय समय पर अलग थलग बयान देकर संगठन को मुसीबत में डाला है। कभी रविन्द्र भाटी को सांड कह दिया तो राजपूत नाराज़ हुए। बेनीवाल का काउंटर नहीं कर पाए तो जाट नाराज़ हुए। राखी राठौड़ मशाल जुलूस वाले प्रकरण में भद्द पिटी। इसके अलावा और भी ना जाने कितने ऐसे मौके हैं।
5. मंत्रियों का हाल देखिए तो बयानबाजी ने बहुत नुकसान किया है। मदन दिलावर, गौतम दक, संजय शर्मा इनके तो हाल ही निराले हैं। चिकित्सा मंत्री के बारे में क्या ही लिखा जाए। किसी को भी यह समझा नहीं पाते हैं मदन राठौड़ कि ज़बान सोच समझकर खोली जाए।
6. सबसे महत्वपूर्ण कि RSS, पार्टी और सरकार के बीच जो तालमेल होना चाहिए वो बनाने में भी मदन राठौड़ फेल ही साबित हुए हैं। पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा की विधानसभा लक्ष्मणगढ़ में स्वयंसेवक कह रहे हैं कि हमारा काम डोटासरा करते हैं, मदन राठौड़ तो ध्यान भी नहीं देते।
7. अपने करीबियों को सेट करने के चक्कर में पुराने और मास लीडर्स पीछे छूट गए हैं। मदन राठौड़ वही गिने चुने पिछलग्गुओं से घिरे रहते हैं। उन पिछलग्गुओं को समय के साथ सेट भी कर दिया गया है जबकि जिन नेताओं के पास वोट हैं, वो गायब कर दिए गए हैं।
ऐसे में नए संगठन महामंत्री अजेय कुमार अब क्या एक्शन लेते हैं और इन सब चीज़ों पर क्या रिएक्शन देते हैं, यह देखने लायक बात होगी। हालांकि अजेय कुमार को कुशल संगठनकर्ता माना जाता है और अपने कौशल का प्रदर्शन वे उत्तराखंड में कर चुके हैं।
@madanrrathore@BhajanlalBjp@BJP4Rajasthan
राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे का नाम राजस्थान की भागीरथी ये उपमा बिल्कुल सटीक है। सीएम रहते हुए उन्होंने भामाशाह योजना, जल स्वावलंबन जैसी योजनाओं से सीधे लोगों की जिंदगी छुई लाखों कार्यकर्ताओं के लिए वो आज भी प्रेरणा और मार्गदर्शक हैं @VasundharaBJP
यही तो उनकी सबसे बड़ी ताकत है। कुर्सी पर बैठकर भी कार्यकर्ता को नाम से पहचानना और इज्जत देना, हर नेता के बस की बात नहीं होती।
पशुपालक समाज से आए आम कार्यकर्ता को मान देना, मतलब जड़ों से जुड़े रहना। शायद इसी वजह से लोग उन्हें सिर्फ नेता नहीं, अपना मानते हैं।
@VasundharaBJP
आवश्यक जानकारी :~
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किसी लड़की या महिला का बिना उसके अनुमति फोटो खींचना गंभीर अपराध है। यह अपराध और अधिक गंभीर हो जाता है जब गुप्त तरीके से उसकी प्राइवेट फोटो खींचकर इंटरनेट के माध्यम से वायरल कर दिया जाए। इसमें आईपीसी की धारा 354C के तहत सात वर्ष तक के सजा का प्रावधान है।
#RenamingCommission
तिलप्रस्थ को फरीद ने लूटा
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जमदग्निपुरम को जौना खां ने लूटा
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कीर्तिश्वरी को मुर्शीद ने लूटा
नाम रख दिया मुर्शिदाबाद
अजातशत्रु नगर को बेगू ने लूटा
नाम रख दिया बेगूसराय
विंध्याचल को मिर्जा ने लूटा
नाम रख दिया मिर्जापुर
राजस्थान की जनता और भाजपा का हर कार्यकर्ता यही चाहता है कि वसुंधरा जी को फिर से कमान देनी चाहिए हमारी भावनाओं की कदर होनी चाहिए @VasundharaBJP@AmitShah