कांग्रेस के नए मुख्यालय "इंदिरा भवन" में बैठक करना पार्टी को बहुत महंगा पड़ रहा है..नए भवन के एक महीने का बिजली बिल 15 लाख रुपया आ गया है। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद तय हुआ है कि जितना हो सके बैठक 24 अकबर रोड, एआईसीसी में ही किया जाय..कल कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक एआईसीसी में ही बुलाई गई है..
आज ED ने तथाकथित कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) घोटाले में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल कर दी।
सालों तक भाजपा की इकोसिस्टम ने 2G, CWG, श्री रॉबर्ट वाड्रा और कोयला मामलों को लेकर कांग्रेस को बदनाम करने के लिए झूठ का हथियार बनाया। आज सच्चाई मज़बूती से खड़ी है और उनके झूठ धराशायी हो चुके हैं।
ये मामले कभी न्याय के लिए नहीं थे; ये केवल राजनीतिक प्रताड़ना, सुर्खियों में बने रहने और अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाने का षड्यंत्र थे।
इन गढ़े हुए मामलों का पतन सिर्फ कानूनी विजय नहीं है, बल्कि भाजपा की झूठे विमर्श की राजनीति पर एक नैतिक और राजनीतिक अभियोग है।
सच टीवी स्टूडियोज़ में चिल्लाता नहीं है; वह शांति से, सशक्त रूप से और अनिवार्यता के साथ सामने आता है।
क्या अब प्रधानमंत्री देश से माफी मांगेंगे?
क्या अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता से माफी मांगेंगे?
गुजरात के मोरबी में पुल गिरा था। 100 से ज़्यादा लोग मरे थे।
इस आदमी ने कहा हादसों पर राजनीति नहीं करूँगा। सभी मृतकों को श्रद्धांजलि और उनके और घायलों के परिवार को मदद मिले।
मैंने एक बार इस आदमी को जेएनयू में चुप करा दिया था। एक बहुत कठिन सवाल पूछ के।
ये आदमी स्तब्ध था।
अब लल्लनटॉप वाला सौरभ द्विवेदी, मेरा छोटा भाई, तब नवभारत टाइम्स में था। उसने एक विस्तृत रिपोर्ट लिखी थी। नवभारत टाइम्स के प्रिंट में छपी थी।
ये आदमी फिर कश्मीर गया। घायलों से मिला।
इसने फिर मृतकों पर कोई राजनीति नहीं की।
इस आदमी से आज मैं निजी माफ़ी माँगता हूँ। मैं ही नहीं समझ पाया था तब कि किस मिट्टी का बना आदमी है ये।
- समर अनार्य की पोस्ट
माई डियर फ्रेंड डोनाल्ड ट्रम्प कल रात भारत पर 26% टैरिफ़ लगा रहे थे इसलिए हमारे प्रधानमंत्री जी रात के 2 बजे तक संसद चला रहे थे।
ज़रूरी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिये फिर से मुसलमानों के नाम का सहारा लेना पड़ा सरकार को।
The cold blooded murder of over 400 innocent civilians including 130 children by the Israeli government, shows that humanity means nothing to them.
Their actions reflect an inherent weakness and inability to face their own truth.
Whether western powers choose to recognise this or to acknowledge their collusion in the genocide of the Palesitinian people or not, all citizens of the world who have a conscience (including many Israelis), see it.
The more criminally the Israeli government acts, the more they reveal themselves for the cowards they truly are.
On the other hand, the bravery of the Palestinian people prevails. They have endured unimaginable suffering yet their spirit remains resilient and unwavering.
Satyamev Jayate 🙏🏼
"नेहरू: एक सेलेब्रिटी बाप, जो घर भी संभाला और दुनिया भी!"
नेहरू महज़ एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि भारतीय राजनीति के पहले सेलेब्रिटी थे।
उनका सूट, उनकी टोपी, उनकी मुस्कान—सब कुछ ट्रेंड बन जाता था।
सोचिए, अगर इंस्टाग्राम उनके जमाने में होता, तो #ChachaNehru ट्रेंडिंग में टॉप पर होता!
लेकिन सेलेब्रिटी बाप की एक दिक्कत होती है—
बच्चे उसकी छाया में जीते हैं, उसकी शोहरत को अपना मानते हैं।
जवानी भले फटेहाली में गुज़रे, लेकिन बाप का जमाना एक सुखद स्मृति बना रहता है।
"सेलेब्रिटी बाप की संतानें!"
इंदिरा गांधी— सख्त माँ, जो सुबह 4 बजे उठा देती, कसरत करवाती, और ज़रूरत पड़े तो थप्पड़ भी लगा देती।
राजीव गांधी— दोस्त की तरह के पिता, जिससे बहस भी हो सकती थी, पर प्यार भी था।
नरसिंह राव— सौतेले पिता, जो घर संभालते तो रहे, मगर अपनापन नहीं दे पाए।
बाजपेयी जी— बाप कम, दादाजी ज्यादा, जो कहानियां सुनाते थे लेकिन घर के बिल कौन भरेगा, ये नहीं बताते थे।
मनमोहन सिंह— वो आम भारतीय बाप, जो दिन-रात चुपचाप मेहनत करता रहा, घर में सुख-सुविधाएं आती रहीं, लेकिन कोई उनके होने की कद्र नहीं करता था।
"नेहरू को याद करना क्यों ज़रूरी है?"
नेहरू वही पिता थे, जिन्होंने
नया घर (देश) बनाया,
नई नौकरी (योजना आयोग) दी,
अच्छी पढ़ाई (IIT, AIIMS, IIM) करवाई,
और पूरी दुनिया में नाम भी कमाया (गुटनिरपेक्ष आंदोलन, UNO में भारत की पहचान)!
और बदले में संतान क्या कर रही है?
घर की दीवारें तोड़कर, टुकड़ों में बेच रही है।
नेहरू ने देश को स्टील प्लांट, IITs, बड़े डैम, और आधुनिक लोकतंत्र दिया।
आज के हुक्मरान— रेल बेच रहे हैं, एयरपोर्ट गिरवी रख रहे हैं, बुलेट ट्रेन के सपने दिखा रहे हैं, और गंगा में लाशें तैर रही हैं।
"सेलेब्रिटी बाप की विरासत"
सेलेब्रिटी बाप की सबसे बड़ी दिक्कत होती है—
बेटे अपने निकम्मेपन को छुपाने के लिए, बाप को ही गाली देने लगते हैं।
आज, जब हर सरकारी संपत्ति बिक रही है,
देश बेरोज़गारी और महंगाई से कराह रहा है,
तो अचानक लोगों को मनमोहन सिंह और नेहरू का दौर याद आ रहा है।
अब "नेहरू ने क्या किया?" का सवाल करने वालों से एक सवाल—
"तुमने नेहरू के बनाए देश का क्या किया?"
अगर कुछ नहीं किया, तो कम से कम बाप की विरासत को बेचने से पहले "थैंक्स" ही बोल दो!
पूर्व PM मनमोहन सिंह की अंतिम विदाई में रो पड़े राहुल गांधी
◆ कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर शेयर किया वीडियो
#DrManmohanSingh | Manmohan Singh | Rahul Gandhi | #RahulGandhi
घटना 2005 की है । मनमोहन सिंह जी JNU में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु जी की प्रतिमा का अनावरण करने आए थे।
छात्र उनके संबोधन के समय विरोध कर रहे थे। उन्होंने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री को काले झंडे दिखाए।
घंटा के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया और कुछ पर प्रॉक्टोरियल इंक्वायरी बैठी।
जब #ManmohanSingh जी को इसके बारे में पता चला उन्होंने VC को फ़ोन कर छात्रों के साथ नर्मी से व्यवहार करने कहा ।
इतना ही नहीं वाल्टेयर का क्वोट दोहराते हुए कहा
“I may not agree with what you say but I will protect till death your right to say so”
फ़र्क़ संवाद करने की इच्छा और क्रिटिसिज्म सुनने की ताक़त का है।
इस देश को मनमोहन जी के बाद मोदी जी को ज़रूरत थी, ताकि अभिव्यक्ति की आज़ादी, लोकतंत्र की ख़ूबसूरती और डिबेट डिसेंट के कल्चर का महत्त्व समझ आए।
You made the Nation realise your importance Sir.
जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एम्स में भर्ती थे तब राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थे और उन्हें देखने एम्स में गए थे।
निधन पर सोनिया गांधी और राहुल ने घर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
राहुल गांधी ने उन्हें भारत मां का महान सपूत बताया था।
यह कांग्रेस की उच्च परंपराएं हैं। और परिवार की भी। सुषमा स्वराज जिन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ बहुत गंदा बोला था उनके निधन पर भी सोनिया उनके घर गई थीं।
2004 में वाजपेयी के प्रधानमंत्री न रहने पर कांग्रेस ने उनके खिलाफ कभी कोई बात नहीं की।
मगर 2014 में मनमोहन सिंह के हटने के बाद उनके घर सीबीआई पहुंचा दी गई थी। और प्रधानमंत्री रहते हुए उनके खिलाफ सारे घटिया आरोप लगाए गए। यहां तक की लोकसभा में चोर चोर के नारे भी लगाए गए।
कुछ भी साबित नहीं कर सके और अंत में उनकी वही बात सबको याद आ रही है की इतिहास मेरे साथ न्याय करेगा।
मनमोहन सिंह ने देश को वास्तविक रूप से आर्थिक शक्ति बनाया था। 2007- 08 में जब पूरा विश्व आर्थिक मंदी में गिर गया था तब उन्होंने भारत को इसमें नहीं डूबने दिया था।
विश्व गुरु कहते नहीं थे खुद को मगर दुनिया कहती थी की आर्थिक मामलों में हम उनकी तरफ देखते हैं।
अलविदा डॉ. साहब,
आपका जाना मुल्क का बहुत बड़ा नुक़सान है।
आप जैसे लोग सदियों में एकाध पैदा होते हैं।
लगा सका ना कोई उसके क़द का अंदाज़ा,
वो आसमां था मगर सर झुकाये फिरता था।