शामली में अपने सीने पर ‘I Love Mohammad लिखने पर जेल में ठूंसने का मुद्दा हो या बरेली में 26 सितंबर को पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज, ये घटनाएं एक धर्म लोगों को बदनाम करके वोट बैंक हासिल करने सुनियोजित साजिश ही नहीं बल्कि सरकार की तानाशाही और घमंड की पराकाष्ठा है।
बरेली में मुस्लिम समाज के लोगों का सिर्फ़ एक शांतिपूर्ण ज्ञापन देने का कार्यक्रम था। इसमें किसी भी तरह की हिंसा का इरादा नहीं था। यदि सामान्य तरीके से ज्ञापन सौंपने दिया जाता तो हालात बिगड़ते ही नहीं। ज्ञापन तो छोड़िए नमाज़ अदा करने तक की अनुमति नहीं दी गई और इसके बाद अपने आका को खुश करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज करके बेगुनाहों को घायल कर दिया।
अब बरेली में मुसलमानों को इसकी आढ़ में सामूहिक सज़ा दी जा रही है। झूठे इल्ज़ाम लगाकर तमंचे, पेट्रोल बम और तेज़ाब की बोतलों से हमले का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि वायरल वीडियो से साफ़ है कि छतों से पत्थरबाज़ी एक सोची-समझी साज़िश थी। मगर पुलिस साज़िशकर्ताओं पर कार्रवाई करने के बजाय बेगुनाहों को परेशान कर रही है।
बेगुनाह मुसलमानों को थानों में बेरहमी से पीटा जा रहा है, मीडिया के सामने परेड कराई जा रही है, उनके घरों पर बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं। दबिश के दौरान महिलाओं और बच्चों तक को निशाना बनाया जा रहा है। मस्जिदों में इमामों और मुअज्ज़िनों का उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे नमाज़ जैसी बुनियादी इबादत भी मुश्किल हो गई है।
मुस्लिम भाईयों और बहिनों पर तानाशाह के इशारे पर किया जा यह अन्याय–अत्याचार न सिर्फ संविधान की प्रस्तावना बल्कि संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 का स्पष्ट उल्लंघन है। जिसमें धर्म और उपासना की स्वतंत्रता को देश के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार बताया गया है।
@UPGovt से हमारी माँगें :
1. बेगुनाह मुसलमानों की गिरफ़्तारी और उत्पीड़न पर तुरंत रोक लगाई जाए।
2. पुलिस की मनमानी दबिश और बुलडोज़र कार्रवाई बंद की जाए।
3. निर्दोषों पर दर्ज झूठे मुक़दमे वापस लेकर उन्हें फ़ौरन रिहा किया जाए।
4. दोषियों की पहचान कर उन पर सख़्त कार्रवाई की जाए।
मैं कल बरेली पहुँचकर मौजूदा हालात का जायज़ा लूँगा और पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात करूँगा।
#iLoveMuhammad
कुशीनगर से आई आम्मा 5 दिन से लखनऊ के KGMU में पड़ी थीं..कोरोना जांच नहीं हो पाई..अस्पतालों ने जांच कम दी है...प्राइवेट में जांच बंद है..
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