दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेन्टर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।
"बहनजी हाय हाय"
यह अगर सपाई, कोंग्रेसी, भाजपाई या अन्य करे तो मान सकते है। लेकिन अनुसुचित जाति का व्यक्ति करे, यह मूर्खता से कम नही है।
एक एससी लड़कीं ने कोर्स में एडमिशन लिया। उसे स्कॉलरशिप नही मिली। 12 हजार की नौकरी करने वाले भाई ने किसी तरह धीरे धीरे फीस भरी, लेकिन अंतिम सेमेस्टर में संस्थान वालो ने प्रैक्टिकल लेने से मना कर दिया, कह रहे कि लगभग 37000 भरो। उसने कल मुझे बताया। मैने कुछ लोगो के नम्बर उन्हें दिए, जिससे उंसकी बहन का प्रैक्टिकल में मदद हो सके।
इसपर मुझे याद आ गया;
1.वर्ष 2007 में बीएड में एडमिशन लिया। पहले हमसे रजिस्ट्रेशन वग़ैरह के नाम पर 15000 रुपये ले लिए। उस समय यह काफी बड़ी रकम होती थीं। उस समय श्री मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। एक दिन संस्थान का मालिक आया, सभी एससी छात्रो को बुलाया, कहने लगा की 42000 रुपया जमा करो, क्योंकि समाज कल्याण विभाग फीस प्रतिपूर्ती नही कर रहा है। नही तो नाम कटवाओ।
2.तब काफी गरीब जो मजदूरी करके किसी तरह पढ़ रहे थे, अधिकतर वो ही थे। हम 4 या 5 ही ऐसी स्तिथी में थे जो दे सकते थे, बाकी 18 की स्तिथि नही थी। काफी ने मन बना लिया कि कोर्स छोड़कर फिर से खेतों में मजदूरी करने लगेंगे। इनमे आधी लडकिया थी, उनका कहना था कि घर वाले शादी करवा देंगे। संस्थान को इससे लाभ था, वो इन सभी को मैनेजमेंट कोटा में परिवर्तित करके डेढ़ लाख तक मे बेचर है था क्योंकि उस समय बीएड का क्रेज था। उत्तर प्रदेश में प्राइमरी टीचर की नौकरियां लग रही थी।
3.तभी एकाएक बहनजी की सरकार बन गयी। बहनजी ने पहला आदेश ही यह दिया कि;
"कोई भी प्रोफेशनल कोर्स ही, एमबीए, बीएड, बीफार्मा, एमफार्मा, से लेकर बीएससी नर्सिंग या अन्य। एक रुपया भी संस्थान एससी/एसटी से नही लगा, उनकी फीस की प्रतिपूर्ती समाज कल्याण विभाग तुरंत करेगा।
4.अब जँहा 18 छात्र/छात्राएं कोर्स छोड़ने की सोच रहे थे, वंही संस्थान के मालिक बहनजी के गुस्से को जानते थे, फिर उन्होंने नही कहा। कुछ महीनों में ही फीस प्रतिपूर्ती हो गयी और 5 हजार के लगभग अलग से स्कॉलरशिप भी मिल गयी। कुल 24 में से;
"अधिकतर बाद में प्राइमरी टीचर बन गए। जो एक समय का खाना बड़ी मुश्किल से खाते थे, इतने गरीब की स्टेशन पर वापस जाने वाली ट्रेन का इतंजार करते समय तक भूखे रहते थे। फिर मेने स्टेशन पर में उन्हें खाना खिलवाता था, वो तक सरकारी टीचर बन गए। आज अच्छी जिंदगी जी रहे है"
5.इसलिए में उन एससी को मंदबुद्धि के साथ साथ अवसरवादी, एहसानफरामोश, मानता हूं जो या जिनके बच्चो, भाइयों, बहनों ने बहनजी द्वारा शरू की गई "जीरो शीट" का लाभ लिया और अब वो सपरिवार बहनजी हाय हाय करते है।
अब यह समाज की लड़कीं व उसका भाई परेशान है कि संस्थान प्रैक्टिकल नही लेगा। स्कॉलरशिप नही मिली। बहनजी के 5 साल के कार्यकाल में ऐसी स्तिथी नही आई।
अब यह हाल है कि पहले पैसे जमा कराओ, फिर 75% तक फीस प्रतिपूर्ती होगी। होगी या नही होगी। यह भी पक्का नही है ।
विकास कुमार जाटव
#BSP#TMC#organization
टीएमसी की बैठक से उसके पदाधिकारी और विधायक गायब है !
ममता बनर्जी किसी को भी पार्टी से बाहर नहीं करेंगी बल्कि इंतजार करेंगी लौट आए उनपर तरस खा जाए !
हारना अलग बात है हार के भी संभले रहना एक लीडर का उच्चतम गुण है !
बहन जी ने संगठन में अनुशासन हीनता के चलते अपने मंत्रिमंडल के लगभग 12 प्रमुख मंत्रियों को बर्खास्त किया था।
इनमें राजेश त्रिपाठी, अवधपाल सिंह यादव, रंगनाथ मिश्रा, बादशाह सिंह और अनीस अहमद खान जैसे नाम शामिल थे।
इसके अलावा 104 विधायक उठा के बाहर फेंक दिए जिसमे दो को गिरफ्तार करवाया था !
अन्य पार्टी प्रमुख एक एक विधायक के हाथ पैर पकड़ के रोकने की कोशिश करते है वही बहन जी MLA निकालने का शतक मार चुकी है !
जब बात संगठन की मजबूती की हो बहन जी ने अपने भतीजे आकाश आनंद को ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने देर नहीं करी !
याकि कारण है सरकार जाने के 15 साल बाद भी संगठन में कोई फूट नहीं डाल सका एक क्या 100 अमित शाह और मोदी अजाए बसपा के संगठन में सेंध नहीं लगा सकते !
यहीं कारण है अन्य दल सरकार के जाते ही अपने संगठन बचाने की हाय तौबा मचाने लगते है !!
डॉ आंबेडकर ने यूंही नहीं कहा होगा संगठन में शक्ति है उसका जीता जागता उदाहरण बसपा है !
#Baba_Manish
"बहनजी क्या कर रही है?
यह प्रश्न रोज मुझसे पूछा जाता है। एक से मेने कहा कि सही बात है। बहनजी के पास
111 विधायक है।
37 लोकसभा सांसद है।
राज्यसभा में 5 सांसद है।
फिर भी बहनजी इन सभी को लेकर सड़को पर विरोध नही कर रही है।
इसपर सामने वाला कहता है कि क्या मजाक कर रहे हो, यह सपा के पास है। मेने कहा कि;
"फिर सपा से प्रश्न काहे नही करते?"
यह अंतर अगर आप नही समझ पाए तो आप मूर्ख, नौशिखिया है। जनता ने सपा को जिम्मेदारी दी। आप प्रश्न बसपा से पूछ रहे है। इसका अर्थ है कि आपको विश्वास भी अन्तिम रूप से बसपा के ऊपर है कि केवल बसपा ही गरीब, शोषित, व्यक्ति की आवाज है।
फिर काहे बसपा के हाथ मजबूत नही करते?
विकास कुमार जाटव
2. जबकि देश की चिन्ता ’ब्लेम गेम’ की बजाय, जलवायु/ पर्यावरण की अनदेखी करके जनसुविधा आदि के नाम पर हो रहे असंतुलित विकास को लेकर है, जिसके लिए कांग्रेस व भाजपा की सरकारें ज्यादातर कसूरवार हैं, किन्तु अब इसके प्रति पूरी तरह से गंभीर होकर सुनियोजित तरीके से काम करने की जरूरत। 2/2
हालाँकि देश भर के पुरुष व महिला मज़दूरों व श्रमिक समाज की हालत में कोई अपेक्षित सुधार लाख कोशिशों के बावजूद अब तक देखने को नहीं मिलता है, और इसीलिये ’मज़दूर दिवस’ के महत्व को आज भी नकारा नहीं जा सकता है और इस मौके़ पर नित्य दिन जीवन संघर्षों में लगे मेहनतकश तबके़ के सभी लोगों को आज ’मई दिवस’ की बधाई तथा उन सबके थोड़े ’अच्छे दिन’ की फिर से शुभकामनायें।
वैसे तो देश निर्माण में मज़दूरों एवं सभी मेहनतकश समाज के लोगों का ज़बरदस्त योगदान रहता है और उनके इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश की आज़ादी से पहले और फिर आज़ादी के बाद भी इन सबके लिये ख़ुश व ख़ुशहाल जीवन की गारण्टी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था, किन्तु अब तो आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतन भोगी तथा हायर एड फायर की प्रथा ने जीवन के हर पहलू में प्रचलित हो जाने से देश के मेहनतकश तबक़ों/समाज को नई मुसीबतों व रोज़गार अनिश्चितताओं का ज़बरदस्त सामना है, जिससे उसके परिवार को पालन-पोषण ही नहीं बल्कि उसकी शिक्षा-दीक्षा, स्वास्थ्य आदि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता हुआ साफ दिखाई पड़ता है अर्थात् विकास की चाह में मज़दूरों का भविष्य ही नहीं बल्कि उनका व उनके परिवार का जीवन दाव पर लगा हुआ दिखता है, जो उचित नहीं प्रतीत होता है।
साथ ही, महिलाओं को इसके लिये वास्तव में सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पाना भी भारत में चिन्ता का विषय बना हुआ है।
कुल मिलाकर, देश के विकास में मज़दूर/श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित हो, ऐसी आज मई दिवस पर सभी सरकारों से अपील है। वैसे भी बी.एस.पी. का संघर्ष उन्हीं मेहनतकश बहुजनों के हक़ के लिये समर्पित है और रहेगा।
देश में कमर्शियल सिलिण्डर की भारी क़िल्लत के बीच उसकी क़ीमत में एक मुश्त 993 रुपयों की फिर की गयी वृद्धि व उसका आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुडी ख़बरें इलेक्ट्रानिक सहित सभी मीडिया जगत की सुर्ख़ियों में हैं और इस आशंका से कि जल्द ही रसोई गैस, पेट्रोल व डीज़ल सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें भी ज़रूर बढ़ेंगी, लोगों में बेचैनी व्याप्त है।
इसका वास्तविक कारण चाहे अमेरिका-इजराइल का ईरान पर युद्ध हो या अन्य कुछ और, सरकार ने जिस प्रकार से राज्यों के विधानसभा आमचुनाव के मद्देनज़र ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि की क़ीमत को काफी कुछ नियंत्रण में रखा, उस नीति को वर्तमान में भी व्यापक जनहित व जनकल्याण के तहत् जारी रखना चाहिये तो यह देशहित में उचित होगा।
दिल्ली में भी नई दर पर कमर्शियल सिलेण्डर की कीमत अब लगभग तीन हजार से अधिक हो जायेगी। पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों के इस प्रकार से बढ़ने से पहले से ही महंगाई से त्रस्त देश के अधिकतर ग़रीब व मध्यम वर्गों के लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका ऑकलन करके ही सरकार अपनी नीतियों का निर्धारण करे तो यह बेहतर।
यूपीएससी इंटरव्यू में घपला होता है, इंटरव्यू बंद होने चाहिए.
सांसद साक्षी महाराज जी की इस बात का हम समर्थन करते हैं! सभी परीक्षाओं से साक्षात्कार बंद होना चाहिए।
राजधानी लखनऊ में बाबासाहेब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर के जन्मदिन के अवसर पर बीएसपी बीएसपी के तत्वावधान में बैनरों व होर्डिंग्स को यह जातिवादी गुण्डा ब्लेड से फाड़ दिया है।
यह बेहद ही शर्मनाक व अति निन्दनीय है।
इस जातिवादी गुण्डे की स्कूटी का नम्बर UP 32 J 3118 है।
प्रिय @lkopolice@Uppolice , कृपया मामला संज्ञान में लीजिए और इस जातिवादी गुण्डे को गिरफ्तार कर जेल में डालिए।
यह जातिवादी गुण्डा बाबासाहेब के बैनर/होर्डिंग्स फाड़कर 14 अप्रैल से ठीक एक दिन पहले सामाजिक सौहार्द्र ख़राब करने की कोशिश कर रहा है।
कल लखनऊ में अंबेडकर जयंती के अवसर पर लाखों समर्थकों का जमवाड़ा है और आज ऐसी घटना को अंजाम देना क्या कहता है ?
पोस्टर फाड़ना किस सभ्यता का हिस्सा है ?
कड़ी कार्रवाई करें और उसका प्रचार भी आवश्यक है ।
@lkopolice