वो मित्रों जैसे मित्र कहाँ
वो गुरुओं जैसे शिष्य कहाँ
जिनसे रिश्ते भी महक उठें
उन फूलों जैसा इत्र कहाँ
- बालेन्द्र शर्मा
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कि बस अब क़ैद हैं,हम भी तुम्हारी आरज़ू के
न कोई सूरज जलेगा और न तारे जमीं के
नहीं कोई हमारी आंख से अब ख़्वाब देखेंगे
नहीं देखेंगे कोई ज़ख्म अब किसी आदमी के
हम देखेंगे बस तेरा इल्म तेरी बात के दम को
न दिल को आजमाना तुम मोहब्बत की नमी से
~ बालेन्द्र शर्मा 'अनन्त'
@MPArunYadav There is no one here for the OBCs.
If justice is delayed, it is no justice at all.
Many candidates have become overage, yet neither the government is concerned nor does politics care about justice.
There is no one for the OBCs.
सब कुछ खतम हो जाएगा
लेकिन ये "वाद" खतम नहीं होगा
इसने अमृत की
दो चार बूंदें पी लीं होंगी
इस राक्षस को
सूर्य और चंद्र भी नहीं देख पाए होंगे
सुदर्शन चक्र अगर इसका
कुछ हिस्सा काट देता
तो शायद ये "वाद" हर पल,
हर जगह नहीं होता
उसे कुछ महीनों में
एक साल में बांट देता
तुम्हें मालूम है,मेरी बस तुम ही जरूरत हो
चेहरा नहीं,दिल से बला की खूबसूरत हो
ग़र मैने तेरी सीरत पे दिल को आजमाया है
जो करे राज हर दिल पर,तुम वो हुकूमत हो
तेरी शख्सियत जिस शख्स के भी नाम होगी,
वो
शीशे की तरह ढूंढेगा,तुझमें अपनी सूरत को
~ बालेन्द्र शर्मा 'अनंत'
मेरे जाने के बाद
रोकर क्या करोगे
देखकर तस्वीर मेरी
मजबूर होकर क्या करोगे
आंखे नम होंगी
दिल में प्यार जागेगा
मुर्दा पड़ा है वो अब
उसका होकर क्या करोगे
कुछ बकाया भी अगर रह जाएगा
मेरी याद का तुझमें
जब प्रश्न ही नहीं रहा
तो उत्तर होकर क्या करोगे
~ बालेन्द्र शर्मा 'अनंत'
न सही तूफां
हल्की हवा का झोंका सही
हम वो नहीं
जो आएं और गुजर जाएं
हम रह रह कर
हल्का हल्का याद आते रहेंगे
हमारी ग़मों से
दोस्ती कुछ ख़ास है
ऐसे-वैसे,जैसे मिलेंगे
झेलेंगे,मुस्कुराते रहेंगे
~ बालेंद्र शर्मा 'अनंत'
गर हमारी आरजू है
इक नज़र तुझको ही देखूं
ये बड़ी तकलीफ है कि
तू अभी मशरूफ है
हम नज़ाकत आजमाकर
ग़र तेरे नज़दीक आयें
दुकूल से रुख़ को छुपाकर
कहते हो
बड़ी तेज़ ज़ालिम धूप है
~ बालेन्द्र शर्मा 'अनंत'
तू क़ैद कर
हर सख्श,हर बात
हर ईमान को
तू मूक बना दे
इतिहास,समाज
हर इंसान को
तू बना दे एक मिसाल
जो तोड़ी न जा सके
तू कर ज़ुल्म इस कदर
तेरा नाम ही काफी हो
ज़ुल्म की पहचान को
बालेंद्र शर्मा 'अनंत'
मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षा को सुधारने की नहीं, सब्र की परीक्षा लेने की ठान ली है। वर्ग-1 शिक्षक भर्ती 2023 में 8720 पद निकले, लेकिन चयन सिर्फ 2901 का—बाकी 5720 पद खाली, फिर भी योग्य अभ्यर्थी वेटिंग में सड़ते रहें। यही नहीं, कई विषयों में उम्मीदवार कम थे, पद ज्यादा—फिर भी नियुक्ति नहीं!
नतीजा यह कि शिक्षक बनने के सपने लिए युवा भोपाल की सड़कों पर अर्धनग्न होकर न्याय मांगने को मजबूर हुए। सरकार के लिए यह शायद प्रक्रियागत देरी हो, लेकिन युवाओं के लिए यह जीवन की बर्बादी है।
जो सरकार शिक्षकों को सड़क पर लिटा दे, वह शिक्षा सुधार की बात किस मुंह से करती है?
खाली पद, खाली वादे—और भरी हुई संवेदनहीनता।
कुछ तो,
लफ़्जों का भार रहा होगा?
या फ़िर,
लहजा बेकार रहा होगा?
ऐसे क्यों छोड़ेगा कोई भला ?
बेस्कीमती चीजों को
तुम होगे दिल से काले ?
या बेहद अच्छा किरदार रहा होग
~बालेंद्र शर्मा "अनंत"
दो सखी मिलें और क्या कह दें
अब कब जाने मिलना होगा
ऐसा करते हैं रहने दें
रहने दें उन बातों को
जो अब भी ठहरी हैं मन में
जो स्नेह बचा है शेष अभी
उसको आधा आधा कर लें
फिर मिला वक्त तो बात करें
क्या पूर्व जन्म की हम हैं बहनें
~ बालेंद्र शर्मा "अनंत"
मैं मेरे दिल से कहूँ की
किस तसल्ली में लगा है
जो हो गया सो हो गया
आगे का किसको पता है
तूं कहाँ पर देखता है?
किस तरफ तेरी नजर है?
तेरा लक्ष्य तेरे सामने
जो सो गया,सो खो गया है
फ़िर भी तुझे संदिग्ध लगती
बात नैतिकता भरी हुई
जो चला है सो खड़ा है
जो पड़ा सो गिर गया है
~ बालेंद्र
देख तुम्हारी सीरत चल दिया प्रेम की आस जगाने
मन की वर्षों से दबी जली बिरहा की आग बुझाने
सुलग सुलग कर आँखों की तुम नींद चुरा लेती हो
जब याद तुम्हारी आती है,हम सुनते हैं गीत पुराने
मगर हमें मालूम न तुम बंजर दिल की रखवाली हो
हम प्रेम रोग के ठहरे रोगी,गए पत्थर में फूल उगाने
~ "अनंत"
आदरणीय शिक्षा मंत्री @dpradhanbjp जी हाल ही में #EMRS में शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी हुआ है,जिसमे PGT के पदों हेतु अर्हता में UG और PG में "समान विषय का होना" शर्त रखी गयी है
आदरणीय जी मेरी PG और UG में विषय अलग अलग हैं,मुझे फॉर्म भरने को नहीं मिल रहा है
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