Abhijit Dipke introduced a press conference,
He also introduced a new campaign "Adivasi School Thik Karo!"
Let's work together to fix the problem of government school.
'चलो संसद' मार्च पर हुए लाठीचार्ज के इन पीड़���तों ने जो बताया, वो सुन के बहुत कष्ट होगा!
पूरी रिपोर्ट- https://t.co/VU6G1AfXnq
@justrashidd @vikasvermaindia
CJP Protest | Sonam Wangchuk | Delhi Police | Abhijeet Dipke
सोमवार 20 जुलाई को सीजेपी के "संसद मार्च" के लिए दिल्ली की सड़कों पर हज़ारों युवा नज़र आए. उन्हें रोकने के लिए सड़कें बंद थीं, इंटरनेट पर पाबंदी थी, कई मेट्रो स्टेशन बंद थे, बावजूद इसके वो सभी मुश्किलें पार करते हुए जंतर मंतर पहुंचने में सफल रहे. सवाल ये है कि क्या इन युवाओं ने मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं?
रिपोर्ट: प्रवीण
आवाज़: भरत शर्मा
एडिट: दानिश आलम
म���दी सरकार को शर्म आनी चाहिए ! अब 'विपक्ष' नहीं देश के 'बच्चे' सवाल पूछ रहे हैं
कौन किसको बचा रहा है ? मोदी 'शिक्षामंत्री' को बचा रहे हैं या शिक्षामंत्री को मोदी : प्रकाश राज, एक्टर
ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है,
वहीं से बदल���व का सूरज निकलने लगता है।
आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जा��, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
अगर कोई व्यक्ति प्लेटफार्म टिकट लेने के बाद 2 घंटे से ज्यादा समय तक रेलवे स्टेशन पर रहता है. तो 250 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है ���ुर्माने के साथ ही सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन तक का किराया भी लिया जाता है आखिर का इसका जिम्मेदार कौन है जवाब दो @IRCTCofficial @AshwiniVaishnaw
एक व्यक्ति रिश्तेदारों को छोड़ने रेलवे स्टेशन गया था. उसने प्लेटफॉर्म टिकट भी लि���ा, लेकिन फिर भी उसे 500 रुपये का जुर्माना देना पड़ा ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आने वाली ट्रेन 5 घंटे देरी से स्टेशन पहुंची थी. मामला महा��ाष्ट्र के कल्याण जंक्शन का है नियम के मुताबिक,
अभिनय सर,
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ईरान को लेकर चलाई गई खबर का खंडन करने के लिए खुद ईरानी दूतावास को सामने आना पड़ा।
सोचिए, एक विदेशी दूतावास भारतीय मीडिया को पत्रकारिता का पाठ पढ़ा रहा है!
जब न्यूज़ रूम में ���थ्य हार जाएँ और नैरेटिव जीत जाए, तब लोकत��त्र का चौथा स्तंभ मज़बूत नहीं, कमज़ोर होता है।
मीडिया को विशेषाधिकार नहीं, जवाबदेही चाहिए।
जनता अब सवाल पूछेगी।
जिस खबर का जवाब एंकर नहीं, विदेशी दूतावास दे रहा हो... वहाँ जनता को सवाल ज़रूर पूछने चाहिए।
इस भाई ने Mumbai के Kalyan Railway Station पर किसीको छोड़ने गया था ।
उन्होंने Platfrom Ticket भी लिए लेकिन Train आने म��ं 4 घंटा Late कर दिया !
इस लेट के कारण वो भी Station के अंदर रह गए लेकिन जब वो बापस जा रहे थे उनको TTE ने ₹500 फाइन मार दिया !क्योंकि टिकट का वैल्यू 2 घंटा तक रहता है।
लेकिन मुद्दे की बात ये है कि इसमें आम आदमी का दोष कहा है 🤔 Train के लेट के कारण हम क्यों पैसा दें ?Train की बजह से तो ये नौबत आई ना ।
Railway को इस नियम को Change करना चाहिए या Train को Right time पर चलना चाहिए इसके कारण जनता क्यों पैसा दे ?