जंतर मंतर पर दिन रात एक करके 100 -100 ट्वीट करने वाले,
यूट्यूबर, सोशल मीडिया पत्रकार, इंफ्लूएंसर, झारखंड में हुए पेपर लीक और भर्ती गड़बड़ी में एक भी ट्वीट नहीं कर रहे हैं।
कितना जमीर बिका हुआ है तुम लोगों का धिक्कार है, थू है तुम पर।
पत्रकार सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए, वो चाहे जिस परिस्थित में हो उसे जनता की फिक्र होनी चाहिए,
लेकिन यहां सभी बिके हुए हैं, सभी दलाल हैं, सभी गोदी मीडिया हैं, सभी पालतू मीडिया हैं, सभी दरबारी पत्रकार हैं।
महाराष्ट्र के FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों काफी चर्चा में हैं। वजह है मिलावटी और नुकसान पहुंचाने वाले खाने-पीने के सामान के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोला हुआ है। इस अभियान के लिए उनकी खूब सराहना हो रही है।
इसी क्रम में महाराष्ट्र FDA ने राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में चॉकलेट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और अधिक चीनी, नमक व ट्रांस-फैट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
इसके साथ ही स्कूल कैंटीनों में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और डेयरी उत्पाद जैसे पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह बहुत अच्छा कदम है, लेकिन इसका सही असर तभी होगा जब घरों में भी बच्चों के खानपान की आदतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।
हमारे यहां तो अक्सर बच्चों को बहलाने या खुश करने के लिए कोल्ड ड्रिंक, चिप्स और चॉकलेट ही दे दिए जाते हैं। यहां तक कि बच्चों से मिलने जाने वाले मेहमानों का चॉकलेट और चिप्स लेकर पहुंचना भी एक तरह की संस्कृति बन चुकी है।
अच्छा होगा कि परिवार भी इस बात को समझें। तभी ऐसे कदम का असर कहीं अधिक व्यापक और स्थायी हो सकेगा।
ये लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं।
Merely portraying oneself as a victim won't work, because character serves as a protective shield—yet these people continue to exploit it for their own gain.
RAHUL GANDHI : My mic is off. See Sir.
SPEAKER : You are already speaking. It is not off 😅
Rahul Gandhi then switched off his own mic & said "Look, my mic is of off" 😭😂
अरे रुकिए,
ये जंतर-मंतर नहीं, झारखंड का दृश्य है।
झारखंड में परीक्षा में धांधली को लेकर लाखों छात्र सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
पर मजाल है किसी विपक्ष के नेता का ध्यान झारखंड के छात्रों पर जाए!
HUGE 🚨 SONAM WANGCHUK - "I travel by train, which is my favorite mode of transport.
It was my first experience on the Vande Bharat service from Delhi to Srinagar. So, good experience 😅
I also wanted to see the Chenab Bridge. I am very proud of the Indian Railways 🔥
I am also glad that a bill on exam reforms was introduced in Parliament, I hope Govt will reform education system"
पेपर लीक का मुद्दा तभी जोर शोर से उठाया जाएगा, जब वह बीजेपी शासित राज्यों में होगा,
अगर पेपर लीक विपक्षी राज्यों में होगा तब वह लोकतंत्र की मजबूती माना जाएगा।
चाणक्य ने बुखार ज्यादा होने पर लिख दिया था।
हल्के मजाक के कुछ उदाहरण:
'देश का युवा रोता है, मोदी का लं* छोटा है'
'मेरे सर में दर्द है, मोदी तो नामर्द है'
'इस्तीफ़ा नहीं दे सकते तो अपनी गां* ही दे दो'
पेपर्स लीक की घटना में धर्मेंद्र प्रधान की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी, क्योंकि पेपर लीक उन्होंने नहीं कराया था। लेकिन शिक्षा मंत्री होने के नाते पूरे सिस्टम की जवाबदेही उनके ऊपर बनती थी, इसलिए उनसे उत्तरदायित्व की अपेक्षा की गई और अंततः उन्हें इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी भी लेनी पड़ी।
ठीक उसी तरह, जब किसी आंदोलन या प्रदर्शन का नेतृत्व आप करते हैं और लोगों को उसके लिए संगठित करते हैं, तो उस प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, अराजकता या किसी भी अप्रिय घटना की नैतिक और सार्वजनिक जवाबदेही भी आपसे जुड़ती है। केवल भीड़ जुटाने का श्रेय लेना और फिर हिंसा होने पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेना उचित नहीं है।
जिम्मेदारी केवल सफलता की नहीं होती, परिणामों की भी होती है।
यदि नेतृत्व आपका था, तो जवाबदेही से बचना संभव नहीं है।
🚨 शर्मनाक!
CJP ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को ठुकरा दिया।
हिस्ट्री-शीटरों को राहत न मिलने पर कहा – “हम इसे स्वीकार नहीं करते”
और फिर से प्रदर्शन शुरू करने की धमकी दी।
सुप्रीम कोर्ट पर भी भरोसा नहीं?
अब ये संगठन हदें पार कर रहा है।
#CJP#सुप्रीमकोर्ट#शर्मनाक
CJP की प्रवक्ता रत्ना सिंह से जब यह पूछा गया कि आप लोगों के अनुसार 28 छात्रों ने आत्महत्या किया अभी उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला
और आपके पार्टी के सभी नेता और आप खुद डांस पार्टी कर रहे हैं
इस पर वह कोई जवाब नहीं दे सकी
हालांकि उनसे यह भी पूछना चाहिए था कि जब अहमदाबाद में आत्महत्या करने वाले कहान पटेल के पिता प्रशांत पटेल रोते हुए अपने बेटे का बड़ा सा पोट्रेट अभिजीत दीपके को दिए थे
तो इस गैंग ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद कहान पटेल के पोर्ट्रेट को कूड़ेदान में फेंक कर पार्टी करने चले गए
एक युवक की नजर कहान पटेल के फेके हुए पोट्रेट पर पड़ी तब उसने उसे हाथों में उठाकर रोते हुए वीडियो बनाया
इस वीडियो को भविष्य के लिए सेव कर के रख लीजिए........
क्योंकि अगर कोई बोले की जन्तर-मंतर पर कॉकरोचों ने उत्पात नही मचाया था और वहाँ केवल स्टूडेंट ही आए थे जो शान्ति से प्रदर्शन कर रहे थे l
सरकार ने उनकी गलत सुताई कर दी !
तो इस 14 मिनट की वीडियो में वो सारे कांड हैं जो जन्तर-मंतर पर स्टूडेंट का नाम लेकर किए गए.....
अफसरशाही अपने चर्म पर है मंत्री नेताओं की अब उतनी नहीं चल रही जितनी पहले चला करती थी। अफसर किसी की सुन भी नहीं रहे। ऐसा लगता है पूरा देश duopoly पर चल रहा है। दो शीर्ष लीडर मोदी–अमित शाह, जियो एयरटेल, अदानी अंबानी ... धन्यवाद
इस पूरे घटनाक्रम को शुरू से देखते हैं। 20 दिन से प्रदर्शन चल रहा था सोनम सर भूख हड़ताल पर थे अभिजीत दीपके ने हर उस व्यक्ति को मंच दिया जो देश विरोधी था, उस मंच से क्या कुछ नहीं हुआ यहां तक कि कश्मीर की आजादी की मांग तक उठा डाली। लेकिन अचानक देखते हैं पूरा #instagram#twitter....
सरकार इस पर मौन साधे बैठी है। सारा तंत्र तुम्हारे पास है तुम देश के अंदर पल रहे असंतोष को क्यों नहीं भांप पाए। इसकी भी एक वजह ये भी हो सकती है कि सरकार ने जो पिछली सरकार में जो नेताओं के लेवल पर भ्रष्टाचार हो रहा था उसे रोकने के लिए अफसरशाही को इतना बढ़ावा दिया है कि अफसरशाही...
वही सरकार 20 दिन से कोई भूख हड़ताल पर बैठा है उसे सुन नहीं रही है। डिप्लोमेसी डायलॉग कहां गया सरकार का। 😡😡 क्यों बातचीत नहीं की, यही नकारापन है। आए दिन पेपर लीक हो रहे हैं। SSC में ऐसा कोई पेपर नहीं जाता जो एक दम बिना किसी आरोप या धांधली के हो जाए। सरकार इस पर मौन....
तब तो बिल्कुल ही नहीं कह सकते। जंतर मंतर तक ठीक था वहीं शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन होना चाहिए था।
अब सरकार ने जिस तरह है इस प्रदर्शन को अपने ईगो की लड़ाई बनाया बिल्कुल गलत था। जो सरकार दूसरे देशों को ज्ञान दे रही है ये दौर युद्ध का नहीं बुद्ध का है...