बलोचिस्तान में गूंजता “ॐ नमः शिव���य”।
एक बलोच बेटी महादेव और हिंगलाज माता से अपने वतन की आज़ादी की पुकार कर रही है।
इस गीत के शब्द भले पूरी तरह समझ न आएँ, लेकिन इसकी भावना और स्वर सीधे दिल तक पहुँचते हैं।
सुनकर आनंद आ जाएगा, ये प���्का है।
याद है वो 2014 वाला दौर जब रे���वे स्टेशन पर बोलते थे लावारिस चीज मत छूना बम हो सकती है
आज 2026 में वही प्लेटफॉर्म पर देशभक्ति के गाने
ये देखकर चमचे बुरा मानेंगे और कहेंगे AI है 😅
पहले नक्सलियों के हथियार छोड़ने पर भी नरमी बरती जाती थी।
लेकिन आज मोदी सरकार में तस्वीर बिल्कुल अलग है—हथियार छोड़कर पूर्व नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं, नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
सम्मान हमारे व्यक्तित्व का सबसे अहम् अंश है, ये एक निवेश की तरह है, जितना हम दूसरो को देते है वो हमें ब्याज सहित वापस मिलता है।
PDA का अलाप गाने बालों को समझना चाहिए कि वह सत्ता से दूर क्यों है जनता उन्हें क्यों ठुकरा देती है।
रवींद्र नेगी की अभिजीत दीपके को कड़ी चेतावनी
इस बार जंतर मंतर सीजन 2 होने नहीं देंगे और हुआ
तो सारे सनातनी इलाज करके ही मानेंगे तुम्हारा
प्रधानमंत्री एक बार माफ करेंगे लेकिन हम नहीं
दिल्ली समझ गई इसका मालिक केजरीवा�� हे जैसे केजरीवाल को बाहर फेंका इसका भी वही हाल होगा
सर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एक भी कॉकरोच को नहीं छोड़ना जिन लोगों ने हमारी आर्मी हमारे प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहे है उनसब पर कार्रवाई होनी चाहिए 🙏🏻
रचनात्��क कांग्रेस के मंच पर किसी महिला को लेकर की गई टिप्पणी फूहड़ता नहीं तो और क्या है?
राहुल जी, आपने भी साबित कर ही दिया कि मुद्दा कोई भी हो… दुश्मन कोई भी हो… औरत को हथियार बनाकर, उसके सम्मान को ठेस पहुँचाकर, उस पर गैरज़रूरी टिप्पणी करके अपनी ego satisfy करना कितना आसान है।
आपके पास मुद्दों की कोई कमी नहीं थी। प्रधानमंत्री मोदी जी को घेरने के लिए बहुत कुछ था। ��नके काम पर सवाल करते, उनकी नीतियों पर सवाल करते, उनके फैसलों पर सवाल करते।
लेकिन आपने और आपके मित्र नेता ने चुना सबसे आसान रास्ता…एक महिला पर फूहड़ टिप्पणी करना।
क्यों?
क्योंकि महिला को निशाना बनाना शायद मुद्दे पर लड़ने से आसान है।
और यक़ीन मानिए, सबसे हैरानी की बात ये है कि इस पर कोई मलाल भी नहीं होगा।
राहुल गांधी की भाषा और राजनीतिक आचरण का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री और इटली की राष्ट्राध्यक्ष जैसी संवैधानिक एवं सम्मानित शख्सियतों के लिए जिस तरह की आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है, वह किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक और राजनीतिक संस्कृति के लिए शर्मनाक है।
राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन अशोभनीय भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणी और संवैधानिक पदों का अपमान राजनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कारों के पतन का प्रमाण है।
यह भारत की महान लोकतांत्रिक परंपरा की भाषा नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति पर सीधा प्रहार है, जिसने हमेशा असहमति के बावजूद मर्यादा और सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया है।
देश की जनता सब देख रही है, शब्द भी, संस्कार भी और सोच भी। यही कारण है कि जनता ने बार-बार राहुल गांधी की राजनीति को नकारा है और आगे भी उनके अहंकार, अमर्यादित भाषा और नकारात्मक राजनीति को करारा जवाब देती रहेगी।
Bike No: WB 60 AD 0095
Bike No: WB 60 AB 2367
@WBPolice@BJP4Bengal Kindly look into this matter and arrest these Chapries asap and give them with some belt treatment