ये संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
एक महिला जिसने अपना बेटा खोया है योगी जी उनसे कह रहे हैं “भाषण मत दीजिए”
योगी अग्निशमन विभाग का सिपाही आरोप लगा रहा है “3 लाख बुलेट 11 लाख में खरीदी गई”
4 मंजिला इमारत कैसे बन गई?
इन मुद्दों पर आप ही भाषण दे दीजिए योगी जी।
इन सब चेहरों में से किसको आप देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं??
योगी आदित्यनाथ
अखिलेश यादव
नरेंद्र मोदी
राहुल गांधी
2029 में कौन बनेगा बाज़ीगर,
काफी दिनों बाद किसी मंत्री को अपने विभाग से संबंधित दौरा देखने को मिला है।
अगर ये दिखावा नहीं हुआ तो काफी कुछ बदलेगा।
निशांत कुमार ( हेल्थ मिनिस्टर बिहार)
"बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं के सपने दम तोड़ रहे हैं, और सत्ता जश्न मना रही है।" 💔
देख लो उत्तर प्रदेश और बिहार के बेरोजगारों इन लोगों को सत्ता में दोबारा मत आने देना।
एक लड़के ने सिर्फ पूछा, "सर क्लास लाइव है क्या?" और जवाब में गाली मिली बहन को
रौशन यादव हो या राकेश यादव, महिलाओं के प्रति ऐसी सोच शर्मनाक है। वहीं खान सर हमेशा लड़कियों को बहन मानकर सम्मान देते हैं। शिक्षक की पहचान उसकी भाषा से होती है #khan_sir#Khansir
चुनाव आयेंगे, जाएंगे, सरकारें बनती रहेंगी, सांसद विधायक खरीदे जाएंगे, पार्टियां टूटती रहेंगी, घोटाला होता रहेगा, बाबू लोग करोड़ पति होते रहेंगे,
लेकिन गरीब लोग हमेशा ट्रेन में ऐसे ही सफर करेंगे।
कारण - सांसद जी की फर्स्ट एसी में सीट रिजर्व है।
कुमार विश्वास की भी मूर्ति बनाकर मंदिर के लिए चंदा मांगना शुरू कर देना चाहिए ,
प्रसाद में दूध से इनके पैरों को धुलकर इनके भक्तों को पिलाना शुरू कर देनी चाहिए।https://t.co/raAVcOUzR2
इस झोपड़ी वाले को हज़म नहीं हो रहा है कि खान सर के पास पैसे कहां से आए।
बीवी छोड़ गई, घर से भगा दिया गया, विरासत की पॉलिटिक्स को मिट्टी में मिला दिया।
खान सर से बोलूंगा इस चोमू को भी जरा एजुकेशन दीजिए। लालू जी की विरासत को मिट्टी में मिला रहा है।
#khanSir ने विपिन यादव को मुखिया बनवाया, विपिन यादव को रोजी रोटी का जुगाड़ करवाया...
खान सर के खिलाफ विपिन यादव जहर इसलिए उगल रहे हैं क्योंकि. बिहार विधानसभा चुनाव में विपिन यादव के चुनावी प्रचार करने "खान सर" नहीं गए !
बाकी विपिन यादव जाति देखकर रोशन यादव के पक्षधर हो गए हैं!
#gyanbindugsacademypatna
इन टेलीग्राम गैंग को देखिए।
लोअर पीसीएस के नाम पर अंधाधुंध बैच, डेमो क्लास और ऑफर निकाले जा रहे हैं, लेकिन मजाल है कि एक बार भी विद्यार्थियों के हित में आवाज़ उठा दें।
सर्वर डाउन है, आवेदन अटका है, अभ्यर्थी परेशान हैं लेकिन इनकी चिंता सिर्फ़ इतनी है कि अगला बैच कैसे भरा जाए।
विद्यार्थी इनके लिए अभ्यर्थी कम, ग्राहक ज़्यादा है।
लीजिए अब तो विदेशियों को भी मालूम है कि झूठी ख़बरों का चेहरा कैसा है. हम लगभग सब चीजों का - अमूर्त विचारों का भी मूर्तिकरण करने वाला समाज हैं इस आधार पर सोचकर बताइए कि कल को फेकन्यूज या गर्त पत्रकारिता की मूर्ति बनाई जाने लगे तो उसका चेहरा किससे मिलता जुलता होगा?