@GajendraYdvBJP छत्तीसगढ़ के डीएलएड अभ्यर्थियों की भी अनशन तोड़िए महोदय जी 200 से ऊपर दिन हो चुके है फिर भी आप हमारे लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है ।
डीएलएड को नियुक्ति दो।।
श्री सोनम वांगचुक जी द्वारा अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय स्वागतयोग्य है। केंद्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा जी एवं डॉ. जितेंद्र सिंह जी द्वारा उनसे भेंट कर उनकी चिंताओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार की सकारात्मक प्रतिबद्धता दोहराना विद्यार्थियों के हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का सम्मान किया जाएगा। साथ ही, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर व्यापक चर्चा, परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए सरकार पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। हालिया NEET पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को उपयुक्त सहायता प्रदान करने पर भी सकारात्मक विचार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का स्पष्ट संदेश है कि भारत का युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है और देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यही संकल्प हमारी सरकार की कार्यशैली का आधार है।
@narendramodi@JPNadda@Wangchuk66
*नौकरी की आस में 210 दिन से डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी: अब नियुक्ति की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से भरी हुंकार, केंद्र और राज्य के शिक्षा मंत्रियों से मांगा इस्तीफा*
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जब कोई युवा नौकरी की मांग लेकर 206 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठा रहे और फिर दंडवत् प्रणाम करते हुए विधानसभा तक जाने को मजबूर हो जाए तो सवाल केवल भर्ती का नहीं व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी बन जाता है। यदि वास्तव में न्यायालय के आदेश हैं और रिक्त पद मौजूद हैं तो देरी किस बात की है? अगर आदेशों पर अमल नहीं हो रहातो संविधान और न्यायपालिका की गरिमा का क्या अर्थ रह जाता है? दूसरी ओर यदि सरकार के पास कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया जाता? लोकतंत्र में युवाओं को बैरिकेड और पुलिस नहीं संवाद और समाधान मिलना चाहिए। 206 दिनों का संघर्ष किसी भी सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।
हमें 170 दिन हो गए, हम यहाँ पे मर रहें है लेकिन सरकार हमारी सुध लेने नहीं आ रही है।
हम अपनी जायज़ माँग को लेकर बैठे है, हम नियुक्ति लिए बिना घर भी नहीं जा सकते।
-छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थी।
D.Ed Abhyarthi Protest : D.Ed अभ्यर्थी मन के अनसन जारी हे | अनसन म एक अउ अभ्यर्थी के बिगड़िस तबीयत
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राजधानी @RaipurDistrict के तूता धरना स्थल पर डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 166 दिनों से जारी है। भीषण गर्मी, आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता के बीच युवा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा सांसद @SanjayAzadSln धरना स्थल पहुंचकर समर्थन देते हैं और संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। छत्तीसगढ़ के सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बड़े नेता आखिर कहां हैं? चुनाव के दौरान युवाओं के घर-घर जाकर समर्थन मांगने वाले नेता क्या 166 दिनों से चल रहे इस आंदोलन से अनजान हैं?
यह सवाल केवल डीएड अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों युवाओं का है जो रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। क्या नेताओं के लिए युवाओं का महत्व सिर्फ वोट देने तक सीमित है, या फिर उनकी समस्याओं का समाधान भी राजनीति की प्राथमिकता बनेगा? जनता जवाब चाहती है।