जब एक बैंक ने मीणा समाज के किसानो की जमीन नीलामी के लिए सूचना निकाली तो मोहित #दुबे उर्फ मोहित भारत की खुशी देखिए।
ये sc st obc में फुट डालने आया था अपना नाम बदलकर लेकिन अब इसका बाप राजेंद्र दुबे जान की भीख माँग रहा है?
ये है #आमेर किले मे #राजा_भारमल द्वारा बनवायी गयी #अकबरी_मस्जिद...
संन 1569 ई. मे #राजा_भारमल ने अपने दामाद और #राजा_मानसिंह ने अपने बहनोई बादशाह ए हिंदुस्तान #जलाउदद्दीन_मोहम्मद_अकबर के सम्मान मे बनवाई थीं ताकि उनके दामाद बादशाह अकबर अपने आमेर प्रवास के दौरान नमाज़ अदा कर सके...
वैसे तो इसका इतिहास और भी बड़ा है लेकिन इतने मे ही बहुत से लोगो को पसीना आ जयेगा
जब मैं जयपुर गया तो मैंने इस इतिहास को अपने कैमरा मे क़ैद कर लिया
23 साल पहले सेक्स रैकेट में
मधु अग्रवाल,रानी चौहान,रश्मि दीक्षित, रिया सक्सेना,दिनेश गुप्ता गिरफ्तार हुए थे।
मतलब इनका ये धंधा पुराने समय से ही रहा है ??
@grok
*खुद का बच्चा नहीं था, खाटूश्यामजी से मासूम को चुराया:* रोने पर दूध पिलाया, बिस्किट खिलाए; हरियाणा में किराए के मकान में रखा था
https://t.co/l1zgHPM6s6
पिंकी राजपूत ने बच्चा नहीं हो रहा था तो बच्चा चोरी कर लिया
दलपत विलास में लिखा है कि दलपत सिंह राठौड़ का एक भाई था जिसका नाम मदन सिंह राठौड़ था, दलपत विलास का लेखक लिखता है कि जब मदन सिंह राठौड़ ने अकबर को देखा तो बन्ना की "गांडि फाटी अर लिपरका करणै लागी"।
अर्थात बन्ना की गांड फट गई और लिपरका करने लगी। @prthwii@Samantimarxist
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यदि आप राजस्थान से हो, तो आपने लोककथाओं में "डोला प्रथा" के बारे में काफ़ी सुना होगा!
मध्यकालीन भारतीय इतिहास में राजपूत सामंती जाति के उदय के साथ एक नई प्रथा का जन्म हुआ, जिसको "डोला" अथवा "क्षेत्रपाल" प्रथा कहा था। इस प्रथा को फ्रांसीसी भाषा में "droit de seigneur" एवं
Page 202, written by Jawaharlal Handoo, published by Central Institute of Indian Languages, Mysore (1998)
(3) मुँहणोत नैणसी की ख्यात, भाग द्वितीय, पृष्ठ 6, रामनारायण दूगड़ द्वारा अनुवादित एवं संपादित, काशी नागरीप्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित (1925)
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यदि आप राजस्थान से हो, तो आपने लोककथाओं में "डोला प्रथा" के बारे में काफ़ी सुना होगा!
मध्यकालीन भारतीय इतिहास में राजपूत सामंती जाति के उदय के साथ एक नई प्रथा का जन्म हुआ, जिसको "डोला" अथवा "क्षेत्रपाल" प्रथा कहा था। इस प्रथा को फ्रांसीसी भाषा में "droit de seigneur" एवं
मुंहणोत नैणसी ने अपनी ख्यात में इस प्रथा को "क्षेत्रपाल" नाम दिया। Source:
(1) The Making of the Indo-Islamic World: c.700–1800 CE, Page 178, written by André Wink, published by Cambridge University Press (2020)
(2) Folklore in Modern India,