@iMohdAnsar Samajhdari is men hai k is tarah ki bayan baazi k bajaye UP mn jahan se aapke candidate khade hone waale hen wahan mahnat kijiye khoob
Aapki yh bayan baazi nuqsan degi fayda nahi degi
Mahnat kren zameeni shaukat bhai ki tarah
Halke bayan mt den bilkul
@ChandanSharmaG "आपके विचार में करुणा है, लेकिन कृपया समझें कि बकरीद की कुर्बानी किसी हिंसा की नहीं, बल्कि आज्ञापालन, त्याग और आस्था की परंपरा है, जिसे एक केक से नहीं बदला जा सकता।"
@ChandanSharmaG "जीव हत्या पाप है" — यह बात सटीक हो सकती है जब हत्या अन्यायपूर्ण हो। लेकिन जब वह धार्मिक परंपरा, ज़रूरत, और करुणा के साथ की जाए, तो वह पाप नहीं, बल्कि ईमान का हिस्सा मानी जाती है।
किसी भी धार्मिक परंपरा पर टिप्पणी करते समय हमें एक-दूसरे की आस्था और भावना का सम्मान करना चाहिए।
@ElahiNazia1@AmitShah@asadowaisi@AIMPLB_Official "इस्लामी ज़बह क्रूर नहीं, बल्कि सबसे रहमदिल तरीका है — तेज़ चाकू, झटके में नसें, जानवर बेहोश हो जाता है। खून पूरी तरह निकलता है, मांस शुद्ध होता है। नर्मी और इंसाफ़ सिखाया गया है, ज़ुल्म नहीं।"
@ElahiNazia1@AmitShah@asadowaisi@AIMPLB_Official "अल्लाह रहमदिल है, इसलिए जानवरों को ज़ुल्म से नहीं, ज़रूरत और इबादत के लिए ज़बह करने की इजाज़त दी। क़ुर्बानी गोश्त के लिए नहीं, बल्कि आज्ञा पालन और भक्ति का प्रतीक है।"
@Sudhir_mish "अगर जिसे हम जीवन नहीं दे सकते, उसे मारना गलत है — तो फिर मच्छर, साँप, कीटाणु, और पौधे भी नहीं मारने चाहिए। खेती, दवाइयाँ, और निर्माण सब बंद हो जाएगा। यह सोच अव्यावहारिक है।"