@VoiceofRavindra@KraantiKumar@shailrajsingh40 Thank you @VoiceofRavindra for showing your true color. Could you please let me know the percentage of Muslims voted for TMC? And also could you please let me know what your govt did for the upliftment of Muslims.
एक मुस्लिम प्रोफेसर को किस तरह बेबुनियाद तरीके से फंसाया गया, और आखिर में वो निर्दोष साबित हुए, पढ़िए पूरी कहानी…
डॉ. इनामुर रहमान (58 वर्ष) दिसंबर 2022 में इंदौर के गवर्नमेंट न्यू लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल थे।
1 दिसंबर 2022 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP, RSS की छात्र शाखा) के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि,
डॉ. रहमान कॉलेज में "लव जिहाद", "इस्लामी कट्टरवाद" को बढ़ावा दे रहे हैं और मुस्लिम प्रोफेसरों का तुष्टिकरण कर रहे हैं।
कैंपस में हंगामा मच गया। प्रोफेसर के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक नारे लगाए जाने लगे।
भोपाल के कुछ पत्रकारों ने, जिनकी हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की "दुकान" ठंडी चल रही थी, इस मुद्दे को खूब हवा दी।
लाइव कवरेज से लेकर फर्जी आरोप तक सब चलाए गए।
तब मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा थे, जो रोज सुबह पत्रकारों का दरबार लगाते थे। उन्होंने भी इस मुद्दे को खुब भुनाया और "कठोर कार्रवाई" के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय मीडिया में उन्हें खूब कवरेज मिली।
पूरे जीवन कानून पढ़ाने वाले 58 वर्षीय डॉ. रहमान इन निराधार आरोपों से विचलित हो गए। उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं था।
उनके अलावा कॉलेज में पढ़ाने वाले पांच मुस्लिम प्रोफेसरों को भी टारगेट किया गया।
डॉ. रहमान ने भारी मन से इस्तीफा दे दिया और मीडिया से बात करते हुए भावुक होकर रो पड़े। शायद यह उनके जीवन का सबसे कठिन समय था।
उनके अलावा पांच मुस्लिम प्रोफेसरों पर भी कार्रवाई हुई, जिसमें एक सीनियर प्रोफेसर भी शामिल थे।
इस्तीफे के तुरंत बाद डॉ. रहमान और सीनियर प्रोफेसर के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई और विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
उन्होंने मीडिया से कहा:
प्रदर्शन करने वाले ABVP छात्र बिना कॉलेज आए अटेंडेंस की मांग करते थे और बिना फीस दिए परीक्षा में बैठना चाहते थे। जब हमने उन्हें परीक्षा में न बैठने की चेतावनी दी, तब यह षड्यंत्र रचा गया।
और कुछ मीडिया ने भी इस षड्यंत्र में उनका पूरा समर्थन किया।
मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई 2024 को उनके खिलाफ दर्ज FIR को खारिज कर दिया।
डॉ. रहमान मई 2024 में सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उनकी पैशन सहित कई चीजें विभागीय जाँच की वजह कर रुक गई।
मार्च 2025 में उनके खिलाफ विभागीय जांच पूरी हुई।
विभागीय जांच में उनके खिलाफ सारे आरोप निराधार पाए गए।
8 दिसंबर 2025 को विभाग ने आदेश जारी कर उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट दे दी और निलंबन अवधि को ड्यूटी पीरियड मान लिया।
बाकी प्रदेश में शांति है और दिन दोगुनी रात चौगुनी पर तरक्की कर रहा है।
जय हिंद…
रिपोर्ट: @KashifKakvi भाई
@darab_farooqui@darab_farooqui You claimed that Ibn e Arabi said that if anyone who reject oneness of Allah and the prophethood of Muhammad (pbuh) he/she can enter Jannah. Reference Plz??????
आपके सामने दो तस्वीरें हैं। पहली तस्वीर RSS के नेता भावेश पटेल की है। भावेश पटेल अजमेर ब्लास्ट का दोषी है। वह जब ज़मानत लेकर अपने घर पहुंचा तो रास्ते में हिंदूवादियों ने उसका ऐसे स्वागत किया, मानो वह कोई वीर हो, जंग जीतकर आया हो। बम फोड़ने के जुर्म में सज़ायाफ्ता आतंकी की इस तस्वीर को देखकर किसी एंकर/एंकराइन/ को ‘डरावना’ नहीं लगा।
अब दूसरी तस्वीर देखिए! यह तस्वीर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर मुतक्की की है। वे कोई आतंकवादी नहीं हैं। बीते रोज़ देवबंद गए, वो आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि अपने मुल्क से अमेरिका को खदेड़ने वाले सेनानी हैं। वो जब देवबंद पहुंचे तो उनका भव्य स्वागत किया गया। अब इस तस्वीर को देखकर कई एंकर/एंकराइन ‘डरावना’ बता रहे हैं।
डर! डर एक धंधा है! दुनिया में जितने भी शातिर लोग हैं। वो सब इस धंधे को कर रहे हैं। दक्षिणपंथी बहुसंख्यकों को अल्पसंख्यकों का डर दिखा रहे हैं। जहां सब एक ही धर्म और कल्चर को मानने वाले हैं, वहां उन्हीं के बीच बंटवारा करके उन्हें एक दूसरे से डराया जा रहा है। कोई सोचने को तैयार नहीं है। कोई यह नहीं कह रहा कि किसी को किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है।
“When I saw her [Sakina Begum] on the video crying and begging to bring her back home, I reassured her that I would bring her home,” Rasia Begum said, her smile betraying her sadness. “But my mother does know that in between her and us, there is a border and two different countries.”
@arshadreports reports
https://t.co/oHMi93ZCAs
Muzaffarnagar, Uttar Pradesh; 13-Year-Old Muslim Boy Partially Loses Eyesight After Alleged Police Brutality, Father Threatened for Speaking Out.
In Muzaffarnagar, UP Police allegedly picked up a minor, tied his legs, and beat him till he lost sight in one eye, just because he used a mosque mic to announce a chicken discount after Navratri.
His father says the Inspector now threatens to jail him if he files a complaint. And yet, the same police say, “He already had an eye problem.” #IndianMuslims
धार्मिक अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता का गला घोंटा जा रहा है। #ILoveMuhammadﷺ को पोस्टर को @Uppolice ने ‘अपराध’ मान लिया है। कोई यह पूछने वाला नहीं है भारतीय न्याय संहिता की किस धारा के तहत यह अपराध है? भारतीय संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, उसका प्रचार प्रसार करने का अधिकार देता है। संविधान के बजाय ‘ऊपर’ का आदेश मानने वाले पुलिस अफसर क्या संविधान से भी ऊपर हैं? लोकसभा चुनाव में विपक्ष बार-बार यही तो कह रहा था कि भाजपा सत्ता में लौटी तो संविधान बदल देगी! क्या संविधान रूपी पुस्तक को बदल देने को ही संविधान बदलना माना जाएगा? संविधान की शपथ लेकर ‘मालिक’ के अलिखित संविधान को मानना भी तो संविधान की हत्या है?
मेरठ के मवाना में घरों पर लगे ILoveMuhammad के पोस्टर को पुलिस ने हटाया, पुलिस वाले ने ग्रामीणों से कहा- मना किया था उसके बाद भी लगाया किसके घर है इनके नाम नोट करो तुम्हारा दिमाग खराब है साम्प्रदायिकता बढ़ाना चाहते हो तुम लोग.
#ILoveMuhammad
📍 Meerut, Uttar Pradesh (India)
In Mavana, several houses displayed posters with the message #iLoveMuhammad – a peaceful expression of faith and love for the Prophet Muhammad (Saw).
🚨 Shockingly, local police not only tore down these posters but also registered cases against five individuals.
A viral video shows a police officer angrily scolding villagers, saying:
"We had warned you not to put this up… note down the names of the house owners… are you trying to create communal tension?"
But the question is:❓
How is writing “I Love Muhammad” an act of communal provocation?
Is loving your Prophet a crime in the world’s largest democracy?
👉 Freedom of faith and peaceful expression are being criminalized, while hate speeches against minorities often go unchecked.
This raises serious concerns about selective justice and the shrinking space for religious freedom in India.
#ILoveMuhammad #ReligiousFreedom #StopIslamophobia
बदायूं पुलिस ने I Love Mohammad पर वीडियो बनाने के लिए समीर नामक युवक को गिरफ्तार किया है, पुलिस का कहना है कि वीडियो से शांतिभंग होने की आशंका थी, अब @budaunpolice साफ़ करे कि कैसे इस वीडियो से शांतिभंग हो सकती है? बस मुसलमान दिखा तो गिरफ्तार कर लिया ?