रात के नौ बजे लोगों को टीवी की स्क्रीन से पता चलता है कि कौन पाकिस्तानी है, कौन देशद्रोही और कौन देशप्रेमी। पूरे दिन सत्ता के खिलाफ जितने सवाल उठते हैं, रात में उन्हें साजिश करार दिया जाता है। एंकर सत्ता के ऐसे प्रहरी हैं, जो रात नौ बजे सीटी बजा कर कहते हैं-सोते रहो...सब ठीक है।
रियल समस्या से बरगलाने के लिए रील है न। आज जो मीम होता है कल व्यवस्था उसे सच कर देती है। रील मंत्री, रील मंत्रालय, और अब रील बोर्ड।
रील बनाओ व्यवस्था से बच्चे बचाओ।
है उदधि गरजता बार-बार
प्राची, पश्चिम, भू, नभ अपार
सब पूछ रहे हैं दिग् दिगंत
वीरों का कैसा हो वसंत?
आज के दौर में सुभद्रा कुमारी चौहान होतीं तो सवाल से डराई गई इस पीढ़ी से शायद कुछ ऐसा सवाल करतीं-
कीटों का कैसा हो वसंत?
नीट परीक्षा पेपर लीक पर कोचिंग संस्थानों के यूट्यूबर नायक इतने मुखर हैं, जैसे भारत का शिक्षा महकमा उनके हवाले कर दिया गया हो। जो लोग समस्या की जड़ हैं शिक्षा विभाग की नाकामी ने उन्हें ही नायकत्व दे दिया है।
जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति ने सत्तर के दशक में देश की राजनीति का चरित्र बदल दिया था। कांग्रेस के एकल प्रभुत्व को नकार कर क्षेत्रीय क्षत्रपों का उदय हुआ। बिहार से ‘संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस’ ट्रेन चलती है, जो दिल्ली पहुंचती है। अब ‘संपूर्ण क्रांति’ का इंजन बदल गया है।
चुनाव आयोग के समांतर भाजपा का खान-पान विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। नवरात्रि के समय बंगाल के नेता हाथ में मछली लेकर ऐसे घूम रहे थे, जैसे उनका चुनाव निशान कमल नहीं मछली हो।
पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कहना है कि दिल्ली के लोगों ने झाड़ू से जो कूड़ा निकाला, आम आदमी पार्टी ने वह सारा पंजाब में डाल दिया।
@sunilkjakhar
मेरा पति सुंदर, मैं सुंदरी
बाकी दुनिया बंदर-बंदरी
इस लोकोक्ति का अकादमिक साहित्यिक विस्तार, भावार्थ आज के बेबाक बोल में। राजनीति के बाद साहित्य पर लिखने के लिए भी व्यंग्य ही एकमात्र शैली बच गई है। जब साहित्य में सिद्धांत खत्म होते हैं तो सिर्फ व्यंग्य बचता है।
कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेनामी संपत्ति की तरह छोड़ दिया। कोई भी राजनीतिक दल आए और इन पर मालिकाना हक जमाए, पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। राज्यसभा चुनावों का अंजाम देख कर लग रहा, न आपको वोट से मतलब है और न उसकी कथित चोरी से।