न्याय हमारा संकल्प है, न्याय होकर रहेगा! राजस्थान की बेटी रितु बराला को इंसाफ़ दिलाकर ही दम लेंगे।
लेकिन भाजपा सरकार का अहंकार और राजस्थान पुलिस का रवैया देखिए... 3 दिन से चल रहे कांग्रेस के सत्याग्रह के बावजूद राजस्थान की बेटी रितु बराला न्याय दिलाने एवं FIR दर्ज करने से इनकार साफ इनकार कर दिया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) एवं सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए, लिखित जवाब में कानून के प्रावधानों की गलत व्याख्या कर FIR से इनकार करना दुर्भाग्यपूर्ण और कानून का उल्लंघन है। आखिर एक देश में एक ही कानून के तहत 2 राज्यों में अलग-अलग रवैया कैसे हो सकता है?
केरल में इसी मामले से जुड़ी अन्य पीड़ित छात्रा की Zero FIR दर्ज हो सकती है, लेकिन राजस्थान पुलिस ने उसी मामले में कानून के प्रावधानों की गलत व्याख्या करते हुए FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता पूरे देश में लागू है, तो फिर केरल में कानून के तहत कार्रवाई और राजस्थान में उसी कानून के प्रावधानों से इनकार कैसे किया जा सकता है? क्या कानून का पालन राज्य सरकार और पुलिस की मर्जी पर निर्भर करेगा? इस सवाल का जवाब राजस्थान की भाजपा सरकार और पुलिस को देना ही होगा।
इसीलिए राजस्थान कांग्रेस ने पुलिस के लिखित जवाब को न्यायालय में चुनौती देने और न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। 3 दिन से जारी सत्याग्रह को स्थगित किया गया है, लेकिन न्याय का संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है।
भाजपा सरकार कान खोलकर सुन लें.. सत्याग्रह स्थगित हुआ है, संघर्ष नहीं! कांग्रेस अध्यक्ष @kharge जी एवं हमारे नेता @RahulGandhi जी के नेतृत्व में राजस्थान कांग्रेस रितु बराला को न्याय दिलाने के लिए हर कानूनी लड़ाई लड़ेगी। FIR दर्ज करने से इनकार करने, कानून की गलत व्याख्या करने और अपने दायित्वों से मुंह मोड़ने वाले हर जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही भी तय कराई जाएगी। सत्ता का संरक्षण किसी को कानून से ऊपर नहीं बना सकता।
हमारा संकल्प स्पष्ट है, न्याय की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी, जवाबदेही तय कराई जाएगी और अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया जाएगा। हम राजस्थान की बेटी रितु बराला को न्याय दिलाकर ही दम लेंगे।
@INCIndia@priyankagandhi@kcvenugopalmp@Jairam_Ramesh
#JusticeForRituBarala
आज सीकर आवास पर सांगलिया में तेजा दशमी के शुभ अवसर पर 21 सितंबर को आयोजित होने वाले "तेजा संगम 2026" के पोस्टर का विमोचन किया एवं निमंत्रण के लिए आयोजकों का आभार जताया।
सर्वे की ओट में अधिकारों पर चोट.. आखिर भाजपा सरकार की भर्तियों में ये कैसी आरक्षण व्यवस्था है?
नागौर जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती के 146 पदों में सामान्य वर्ग के लिए 126, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए 12, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए 8, जबकि SC और OBC वर्ग के लिए 0 पद। आखिर आरक्षण का ये कैसा वर्गीकरण है? ये कैसी व्यवस्था है जहां दो वर्गों के हिस्से में एक भी पद न आए?
क्या सामाजिक न्याय का अर्थ यही रह गया है कि किसी वर्ग का प्रतिनिधित्व शून्य कर दिया जाए? अगर सर्वे के आधार पर ऐसी स्थिति बन रही है, तो सरकार बताए कि फिर आरक्षण व्यवस्था का वास्तविक उद्देश्य क्या रह जाता है?
ये पहला मौका नहीं है, भाजपा सरकार की भर्तियों में लगातार आरक्षण के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। LDC, चतुर्थ श्रेणी, वनपाल एवं द्वितीय श्रेणी की जैसी कई भर्तियों में आरक्षण से छेड़छाड़ करके अधिकारों को छीना गया है। ये बेहद गंभीर है कि सरकार विसंगतियां दूर करने की जगह संवैधानिक हक छीनने में लगी है। सरकार को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
@BhajanlalBjp@RajCMO
किरोड़ी लाल जी के द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह फर्जी एवं निराधार साबित हो चुके हैं। फिर भी अगर सरकार को लगता है कि किसी ने भी गलत प्रमाणपत्र से नौकरी प्राप्त की है, तो पुन: निष्पक्ष जांच कराए, मुझे किसी जांच से कोई आपत्ति नहीं है।
1999 से आज तक OBC के वही नियम लागू हैं, जो सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। जिस 2019 के परिपत्र का हवाला देकर भ्रम फैलाया गया, वो कोई परिपत्र नहीं था बल्कि एक गलत चिट्ठी थी, जिसका 2021 में सरकार द्वारा स्पष्टीकरण देकर RPSC को अवगत करा दिया गया।
लेकिन सवाल ये है कि क्या किरोड़ी जी ने फर्जी आरोप इसलिए लगाए क्योंकि मैं कृषि मंत्री के नाम पर हुई करोड़ों की वसूली का मुद्दा उठा रहा हूं? क्या कृषि विभाग में हुए घोटाले के जवाब में ये फर्जी आरोप मढ़े गए हैं? कृषि विभाग में मंत्री जी के नाम पर चल रहे वसूली के खेल में ACB ने 2.43 करोड़ की बरामदगी की है। मंत्री जी के करीबी पकड़े गए हैं, 1200 छापों की पूरी जांच और इस्तीफा की बात नहीं करते।
आरोप लगाने का अधिकार उसी को है, जो खुद जांच से भागे नहीं। राजनीति की शुचिता तभी बचेगी, जब हर आरोप का जवाब तथ्यों और निष्पक्ष जांच से दिया जाएगा, न कि ध्यान भटकाने के लिए पुराने कागजों की धूल झाड़कर फर्जी आरोप लगाए जाएंगे।
बीजेपी और उन नेताओं को माफी मांगनी चाहिए जिन्होंने झूठ के सहारे गोविंद डोटासरा को बदनाम किया था और अब डबल इंजन सरकार आने के बाद पेपर लीक पर सीबीआई जांच नहीं करवा रहे हैं
खरा सोना हैं आदरणीय गोविन्द सिंह डोटासरा जी।
डोटासरा जी पर आरोप लगाने वालों को पहले अपना दामन देखना चाहिए। जो लोग स्वयं भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों का सामना कर चुके हैं, वे दूसरों पर उंगली उठाने से पहले आत्ममंथन करें।
बेबुनियाद आरोपों से सच्चाई नहीं बदलती।
कोटपुतली के कुजेता गांव में अवैध खनन के खिलाफ शांतिपूर्ण धरने पर बैठे ग्रामीणों पर फायरिंग और पथराव जैसी घटनाएं सामने आना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है, हमले में कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली है।
जायज़ बात मनवाने के लिए जनता को करीब 300 दिन तक धरने पर बैठना पड़े, और फिर भी जवाब में उन्हें हिंसा मिले, तो ये सरकार और सिस्टम की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भाजपा के कुशासन में राजस्थान के हालात दिन-ब-दिन भयावह होते जा रहे हैं, कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। सरकार को पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई एवं पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि कानून का राज कायम रहे।
ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।
@RajCMO
भाजपा सरकार के मानसिक दिवालिया मंत्री मदन दिलावर की भाषा RSS की नफ़रती मानसिकता, सस्ती सियासत और संस्कारहीन परवरिश का परिचय है।
नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी पर की गई उनकी घटिया और अमर्यादित टिप्पणी बताती है कि सत्ता के अहंकार में भाजपा नेताओं का मानसिक संतुलन और राजनीतिक स्तर दोनों गिरकर रसातल में पहुंच गया है।
मदन दिलावर तुरंत देश से माफी मांगें, नहीं तो ये माना जाएगा कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष की सहमति से विपक्ष के नेता का अपमान और ज़हरीले बोल बोले जा रहे हैं।
याद रहे, देश देख रहा है.. लोकतंत्र में विपक्ष को गाली देना ताकत नहीं, राजनीतिक दिवालियापन और डर का सबसे बड़ा सबूत होता है।
@INCIndia@kharge@priyankagandhi@kcvenugopalmp@Jairam_Ramesh
10 दिन में तीसरी बार पेट्रोल-डीजल महंगा…
न पेट्रोल-डीजल संभल पा रहा है
न रुपया संभल पा रहा है
न अर्थव्यवस्था संभल पा रही है
और न ही देश संभल पा रहा है
मोदी का मतलब.. महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक संकट और बदहाली का दलदल।
#PetrolDieselHike#FuelPricesHike
किसानों के हितों एवं अधिकारों के लिए जीवनभर समर्पित रहने वाले किसान स्वाभिमान के प्रतीक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि।
भारतीय किसान यूनियन की स्थापना कर उन्होंने देश के किसान आंदोलनों को एक नई ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसान हितों की रक्षार्थ हेतु उनका समर्पण भाव, त्यागमय जीवन, संघर्ष और विचार आज भी हम सभी के लिए अमूल्य धरोहर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले कानून पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मोदी सरकार की मंशा को देश के सामने बेनकाब कर दिया है।
"ये बहुमत की तानाशाही है"... सुप्रीम कोर्ट की ये तल्ख टिप्पणी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले अधिनियम और इस पर न्यायिक बहस से घबराई मोदी सरकार पर है।
माननीय कोर्ट द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से ये मोदी सरकार के उस निर्णय का कटाक्ष है, जिसमें देश का लोकतंत्र लूटने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली कमेटी से चीफ जस्टिक को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है।
अब चयन समिति में सिर्फ प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और नेता प्रतिपक्ष हैं, यानी बहुमत पूरी तरह सरकार के हाथों में है। इसका मतलब साफ है कि भाजपा स्वतंत्र चुनाव आयोग नहीं, "सरकारी आयोग" चाहती है, ताकि एक के बाद एक राज्यों में लोकतंत्र लूट सके।
आज देश में हर चुनाव में EVM की लूट, मतदाता सूची में बेईमानी, एजेंसियों का दुरुपयोग और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा लोकतंत्र नहीं, चुनावी तंत्र पर कब्जा चाहती है।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, कानून के शासन और संविधान के अनुच्छेद 14 की मूल भावना से जुड़े हैं। अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष व स्वतंत्र रहेगा, तो भाजपा हर चुनाव पर कब्जा नहीं कर पाएगी। ये देश का दुर्भाग्य है कि संविधान ने जिस चुनाव आयोग को लोकतंत्र का निष्पक्ष प्रहरी बनाया था, मोदी सरकार ने कानून बदलकर उसे अपनी राजनीतिक कठपुतली बना लिया और एक के बाद एक राज्यों में लोकतंत्र लूटने के लिए उसका इस्तेमाल कर रही है।