ये भाजपा शासित बंगाल की तस्वीर है जहॉं 12 साल की बिटिया के साथ गैंगरेप करके उसकी हत्या की गई और पूरा प्रशासन हत्यारों को बचाता रहा क्योंकि उनके सत्ताधारी पार्टी से रिश्ते थे।
इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में इस वक्त चारों तरफ इस बिटिया के परिवार की चीखें गूँज रही हैं।
बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री जी और उनके चहेते मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हैं।
@WBPolice@narendramodi
अमेरिका के मशहूर इस्लामी दाई (धर्म प्रचारक) शेख उस्मान बिन फारूक कई वर्षों से पश्चिमी देशों में इस्लाम का संदेश पहुंचाने का काम कर रहे हैं। 2022 के क़तर फीफा वर्ल्ड कप के दौरान भी उन्होंने और उनकी टीम ने अलग-अलग जगहों पर दावत-ए-इस्लाम कैंप लगाए थे। वहां लोगों को इस्लाम के बारे में बताया गया, क़ुरआन के अनुवाद बांटे गए और सवाल-जवाब के कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनकी टीम का दावा है कि इन गतिविधियों के दौरान सैकड़ों लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया।
अब अमेरिका में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप के दौरान भी शेख उस्मान बिन फारूक अपनी संस्था One Message Foundation के साथ "World Cup Dawah Tour" चला रहे हैं। स्टेडियमों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को इस्लाम के बारे में जानकारी दी जा रही है और दुनिया भर से आए लोगों से बातचीत की जा रही है।
शेख उस्मान की टीम से जुड़े एक नव-मुस्लिम अमेरिकी युवक ने दावा किया कि वर्ल्ड कप शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका के अलग-अलग शहरों में 400 से अधिक लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया है। उसने बताया कि केवल एक दिन में बोस्टन में 10–11 लोगों ने इस्लाम अपनाया, जबकि उससे एक दिन पहले भी 10 लोगों ने कलिमा पढ़ा था। उसके अनुसार अब यह संख्या 400 से अधिक हो चुकी है।
उसने यह भी कहा कि कुछ लोग दावा करते हैं कि इस्लाम तलवार के दम पर फैला, लेकिन उसका कहना है कि जब लोगों को इस्लाम को सीधे समझने और मुसलमानों से मिलने का मौका मिलता है, तो वे अपनी मर्जी से इसे स्वीकार करते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 400 से अधिक लोगों के इस्लाम स्वीकार करने का यह दावा शेख उस्मान बिन फारूक और उनकी टीम का है। इसका उद्देश्य उनकी दावती गतिविधियों के प्रभाव को बताना है।
फिरोज़ाबाद के ASP इंच टेप से ताजिया का साइज नाप रहे हैं। सरकार ने ताजिया का साइज निर्धारित किया हुआ है, तो फिरोज़ाबाद के ASP इंच टेप लेकर ताजिया का साइज नापने पहुंच गए। सही भी है! ज्यादा ऊंचा ताजिया दुर्घटना का सबब भी बन जाता है। अब सवाल यह है कि क्या कांवड़ का भी साइज निर्धारित होगा? क्या ऐसे ही इंच टेप लेकर उसकी भी ऊंचाई नापी जाएगी?
Ashura is a time of remembrance, sacrifice and reflection.
Today, on the 10th day of Muharram, we are reminded of Imam Hussain's unwavering commitment to truth and dignity. His timeless legacy reminds us of the enduring values of faith, service to one another, and the belief that justice is always worth fighting for.
Our City’s strength comes from the many faith traditions that shape it — and our shared struggle against injustice and oppression.
May we carry these values forward as we continue building a more just City for every New Yorker.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए।
इन दो सालों का हर दिन एक ही काम रहा - हर भारतीय की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाना।
NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा।
सड़क से संसद तक, आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है। सफ़र लंबा है, पर संकल्प वही, आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूँगा।
जय हिंद। जय संविधान। 🇮🇳
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