If @elonmusk is publicly challenging India's law of land before receiving Starlink licence, what guarantees will Indian citizens have that their data and national security interests will be protected once the service begins operating?
आप बोले थे कि 'इंडियन इकॉनोमी डेड है.' हमारी अर्थव्यवस्था मुर्दा है तो क्या एलन मस्क यहां आकर घास छीलेगा?
अच्छा चल रहा है तभी तो सब आना चाहते हैं?
तीन कंपनियां लाइन में हैं. यहां भंडारा नहीं चल रहा है कि एलन आओ, खाकर जाओ?
नियम से आना पड़ेगा. नियम सबके लिए समान है.
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
- उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे जी की सभा के बाद RSS के गिरिश पांडेय एवं अन्य ने मैदान का शुद्धिकरण किया।
- संसद में जेपी नड्डा ने कार्रवाई का झूठा आश्वासन दिया।
- BJP प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट शुद्धिकरण को सही बता रहा।
अपराधी, सरकार, संरक्षक, यहां सभी पक्ष ब्राह्मण ही है।
वंचितों की हिस्सेदारी के विरोधियों का दोहरा चरित्र देश के सामने है। पहले ‘आरक्षण हटाओ’ और अब ‘आरक्षण में सुधार’ की मांग करने वालों से तत्काल “सौहार्दपूर्ण वार्ता” लेकिन अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज, आख़िर ये कैसा सौहार्द है, नड्डा जी?
एक तरफ वार्ता की तस्वीरें, दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियाँ, यह दोहरा चरित्र अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।
24 सितंबर 1982 को मान्यवर कांशीराम साहब ने पूना पैक्ट के 50 साल पूरे होने पर पूरे देश में “धिक्कार दिवस” मनाया था। यह कोई साधारण विरोध नहीं था, बल्कि एक अकाट्य राजनीतिक और सामाजिक समझ का नायाब उदाहरण था।
परम पूज्य बाबा साहेब ने जिस पूना पैक्ट पर बड़े दुखी मन से हस्ताक्षर किए थे, आज उसी पूना पैक्ट का दुष्परिणाम “Depressed Classes (वंचित वर्ग)” के सामने है। यही कारण है कि जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जी आरक्षण विरोधियों से मुलाकात करते हैं, तो बहुजन समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
किसान आंदोलन पर जिस सरकार ने 13 महीने बाद सुध ली, पेपर लीक के जनव्यापी आंदोलन के आंदोलनकारियों से नड्डा जी एक महीने बाद मिलने का समय निकाल पाए, लेकिन जैसे ही जातीय वर्चस्व बनाए रखने की जिद लिए कुछ मुट्ठीभर लोग भाजपा-RSS के दिल में छुपे एजेंडे को लेकर इकट्ठा होते हैं, तो तुरंत “सौहार्दपूर्ण वार्ता” होने लगती है।
सरकार को जवाब देना होगा कि ऐसे लोगों से आखिर क्या बात हुई और आरक्षण को लेकर सरकार का रुख क्या है?
आरक्षण कोई राजनीतिक खैरात नहीं, बल्कि सामाजिक गैर-बराबरी के रहते संविधान द्वारा सुनिश्चित प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की व्यवस्था है। जब तक भेदभाव और गैर-बराबरी कायम है, तब तक आरक्षण भी कायम रहेगा।
मुट्ठीभर जातंकवादियों की आड़ में वंचितों की संवैधानिक हिस्सेदारी को कमजोर करने की साजिश कर रहे सरकार के पिट्ठुओं, कान खोलकर सुन लो! भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) 24 सितंबर, पूना पैक्ट दिवस पर दिल्ली में एक बड़ा जनांदोलन करके संविधान की ताकत का एहसास कराएगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!
श्रीमान @JPNadda जी, आपने ‘आरक्षण हटाओ’ आंदोलन के प्रतिनिधियों से क्या बातचीत की और उन्हें दोबारा मिलने का भरोसा क्यों दिया? क्या उस बैठक में आरक्षण को लेकर कोई आश्वासन या समझौता हुआ? भाजपा आरक्षण विरोधी ताकतों को राजनीतिक संरक्षण दे रही है अगर नहीं, तो आपकी इस मुलाकात को देश का बहुजन समाज किस रूप में समझे?
SC/ST/OBC कार्यकर्ता यदि ट्विटर पर आरक्षण-विरोधी पोस्ट करने वाले ट्विटर हैंडल्स को इग्नोर कर देंगे, तो उनकी रीच 3–4 दिनों में घट जाएगी। उनके रीपोस्ट फ़ेक अकाउंट्स से हैं और उनकी रीच आपकी वजह से है।
मेलोनी पर मगरमच्छ के आंसू रोने वाले BJP IT सेल एवं पत्रकार मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुए "शुद्धिकरण यज्ञ" की घटना पर अन्ना हजारे बनकर मौन व्रत रखें हुए हैं।
अपराधी गिरीश चंद्र पांडेय RSS से जुड़ा हुआ है। अतः सब मौन हैं। इनके हिंदुत्व का असली रंग पूरा देश देख रहा है।
आरक्षण से SC, ST और OBC समाज का काफी नुकसान हुआ है, क्योंकि सरकार ने उन्हें आरक्षण तो दिया, लेकिन उसे भी ठीक से लागू नहीं किया है। दूसरी ओर, देश के बाकी संसाधनों, अवसरों और आर्थिक लाभों को इन्हें छोड़कर दूसरों के हवाले कर दिया गया है। जबकि देश के बाकी संसाधन आरक्षण से मिलने वाले लाभों से लाखों गुना अधिक हैं।
इसलिए आरक्षण का छोटा-सा लाभ देकर SC, ST और OBC समाज को देश की मुख्यधारा से बाहर रखा गया। यह ऐसा है जैसे संविधान इनके लिए लागू नहीं किया गया है। इनके वोट लिए जाते हैं, इनके भरोसे सरकारें बनाई जाती हैं, लेकिन सरकारें इनके लिए नहीं, बल्कि किसी और के हितों के लिए चलाई जाती हैं।
इसलिए आरक्षण के साथ-साथ देश के संसाधनों, अवसरों और आर्थिक विकास में SC, ST और OBC समाज की उचित हिस्सेदारी और अधिकार भी सुनिश्चित होना चाहिए।
अगली सरकार बनाते समय SC, ST और OBC समाज इस बात का जरूर ध्यान रखें।
कांग्रेस की सोच हमेशा से कन्याकुमारी से कश्मीर तक और बंगाल से गुजरात तक देश की जनता को जोड़ने की रही है। लेकिन आज सत्ता में बैठे लोग समाज में फूट डालकर देश को बांटना चाहते हैं और महात्मा गाँधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों को चूर-चूर करने में लगे हैं।
देश में बदलाव केवल सामाजिक संघर्ष से नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति से आता है। इसलिए हमें पूरी ताकत से एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
देश को एक रखना है, आज़ादी को कायम रखना है और संविधान को बचाना है। यही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
मैं इस बात को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं वर्षों से इस सदन का सदस्य हूं और निचले सदन में भी रहा।
मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मैं दलित हूं, मेरी रक्षा करो और न ही किसी के सामने गिड़गिड़ाया। मुझ में लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूं।
लेकिन हल्द्वानी में स्टेज का शुद्धिकरण कर मुझे Untouchability का एहसास कराया गया और मेरा अपमान किया गया।
: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @kharge
दलित समाज के बड़े नेता एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी ने उत्तराखंड में एक कार्यक्रम कर दिया तो हिंदू समूहों ने उस जगह का शुद्धिकरण किया।
क्या किसी हिंदू संगठन ने छुआछूत की इस घटना के खिलाफ कुछ बोला? नहीं। क्योंकि वे दलितों को हिंदू मानते ही नहीं।
उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे जी ने एक सभा में भाषण दिया, तो मनुवादियों ने उनकी जाति देखकर उस जगह के शुद्धिकरण के लिए हवन का आयोजन किया।
RSS, बजरंग दल, हिंदू महासभा.. किसी ने भी इसकी निंदा नहीं की। हिंदू धर्म में दलितों की यही हैसियत है।
मैं इस बात को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता।
मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मैं दलित हूँ, मेरी रक्षा करो और न ही किसी के सामने गिड़गिड़ाया। मुझ में लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूँ।
लेकिन हल्द्वानी में स्टेज का शुद्धिकरण कर मुझे Untouchability का एहसास कराया गया और मेरा अपमान किया गया।
मेरी माँग है —
हल्द्वानी में जिन लोगों ने स्टेज का शुद्धिकरण किया, उन पर Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएँ।
आरक्षण तब तक जरूरी है, जब तक समाज में समानता और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व स्थापित नहीं हो जाता।
SC, ST और OBC की भागीदारी केवल आँकड़ों में नहीं, बल्कि न्यायपालिका, विश्वविद्यालयों, प्रशासन, संस्थानों और निर्णय लेने वाली सभी संस्थाओं में दिखाई देनी चाहिए।
SC, ST और OBC को केवल जनसंख्या के आंकड़ों में नहीं, सत्ता एवं संस्थानों में भी दिखाई देना चाहिए।
प्रशासन, शिक्षा, न्यायपालिका और सार्वजनिक संस्थानों में उनकी पर्याप्त भागीदारी लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगी। बस इसीलिए आरक्षण जरूरी है।
आरक्षण किसी की योग्यता छीनने की व्यवस्था नहीं है। यह उन समुदायों के लिए अवसर का दरवाजा खोलने की व्यवस्था है, जिनके लिए सदियों तक दरवाजे बंद रखे गए।
धर्म-संस्कृति के नाम पर लोगों का हक छीनकर खाने वाले और स्वयं को श्रेष्ठ बताने वाले आरक्षण का विरोध न करें।