शहर छोटा या बड़ा वहाँ रहने वालों की नींद से होता है । ठिकाना तो कोई भी शहर दे देता है, गहरी नींद कम शहर दे पाते हैं । — #MusfirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes#Hindi
“जिनको कभी-कभी गुस्सा आता है उनको जब गुस्सा आता है तो वो कंट्रोल नहीं कर पाते। इसलिए थोड़ा-थोड़ा गुस्सा करते रहना चाहिए, रिश्तों और जिंदगी चलाते रहने के लिए अच्छा रहता है।” — #MusfirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes#Hindi
“जिंदगी की कोई भी शुरुआत हिचकिचाहट से ही होती है। बहुत थ��ड़ा-सा घबराना इसीलिए जरूरी होता है क्यूँकि अगर थोड़ी भी घबराहट नहीं है तो या तो वो काम जरूरी नहीं है या फिर वो काम करने लायक ही नहीं है।” — #MusafirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes #Hindi
.@divyapdubey की शानदार, नई हिंदी और मॉडर्न ख़्यालों वाली किताब कल पढ़ीं।
किताब से कुछ लाइनें जो दिल को छू गई:
१। बातें जो हमें अच्छी लगती हैं वो हमें धीरे-धीरे सहलाकर शांत कर देती हैं।
२। शॉपिंग करवाना मतलब उतना टाइम देना, उससे कम और उससे ज़्यादा कोई किसी को कुछ दे भी क्या सकता है।
३। जब बातें बात बढ़ाने के लिए नहीं, बस वक्त बढ़ाने के लिए की जाती हैं।
४। किसी को समझना हो तो उसकी शेल्फ में लगी किताबों को देख लेना चाहिए, किसी की आत्मा समझनी हो तो उन किताबों में लगी अंडरलाइन को पढ़ना चाहिए।
५। अपनी ज़िंदगी के बारे में किताब की तरह सोचने से कई सारे भ्रम दूर हो जाते हैं।
६। ग़लतियाँ वो पगडण्डियाँ होती हैं जो बताती है कि हमने शुरू कहाँ से किया था।
“समंदर जितना बेचैन होता है हम उसके पास पहुँचकर उतना ही शांत हो जाते हैं। यही ज़िन्दगी का हाल है - पूरा बेचैन हुए बिना जैसे शांति मिल ही नहीं सकती।” — #MusafirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes#Hindi
हमारी असली यात्रा उस दिन शुरू होती है जिस दिन हमारा दुनिया की हर चीज से, हर रिश्ते से, भगवान पर से विश्वास उठ जाता है और यात्रा उस दिन खत्म होती है जिस दिन ये सारे विश्वास लौटकर हमें गले लगा लेते हैं। — #MusafirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes#Hindi
हमारे सब जवाब हमारे पास खुद है, ये बात समझने के लिये अपने हिस्से भर की दुनिया भटकनी पड़ती ही है। बिना भटके मिली हुई मंजिलें और जवाब दोनों ही नक़ली होते है। — #MusafirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes#Hindi
“गलतियाँ सुधारनी जरुर चाहिए लेकिन मिटानी नहीं चाहिए। गलतियाँ वो पगडंडियाँ होती है जो बताती रहती हैं कि हमने शुरू कहाँ से किया था।” | #MusafirCafe by @divyapdubey | #HindiQuotes#Hindi
कई बार रद्दी में खोए हुए पुराने दिन चाय के निशान के साथ मिल जाते हैं और हम न जाने कितने दिन ऐसे ही रद्दी में कौड़ी के भाव बेच देते हैं !!
- @divyapdubey#MusafirCafe
I read it nd to be honest, There is a lot of luv in the book. For a time, I really felt that Chandar has opened his cafe in Mussoorie nd If I'll go, I will definitely stay there. You are never going to forget this story and its characters.❣️
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