कुरावली, मैनपुरी उत्तर प्रदेश में वारिश अली की हत्या को वक्त बीत रहा है, लेकिन आरोपी अभिषेक भदौरिया और बिल्ला अब भी फरार हैं। न बुल्डोजर चला, न कोई सख्त कार्रवाई दिखी। ऊपर से आरोपी पक्ष का अमन प्रधान खुलेआम धमकियां दे रहा है।
क्या कानून का डर सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है?
जब किसी मुस्लिम का एनकाउंटर होता है, तब एक बड़ा तबका बिना सवाल किए उसे सही ठहराने लगता है, जांच की मांग करने वालों को भी निशाना बनाता है और पुलिस व सरकार की वाहवाही में जुट जाता है। लेकिन जैसे ही एनकाउंटर किसी अपने समाज या जाति के व्यक्ति का होता है, वही लोग निष्पक्ष जांच, सबूत, कानून और मानवाधिकारों की बात करने लगते हैं।
सवाल यह है कि न्याय का पैमाना आखिर अलग-अलग क्यों हो? अगर किसी एक मामले में एनकाउंटर पर सवाल उठाना ज़रूरी है, तो हर मामले में होना चाहिए। कानून धर्म, जाति और पहचान देखकर नहीं चलना चाहिए। न्याय तभी सच्चा कहलाएगा, जब उसका तराजू सबके लिए बराबर हो।
#EqualJustice #RuleOfLaw #JusticeForAll
उत्तर प्रदेश: मुजफ्फरनगर अदालत परिसर में अपनी लापता बेटी की तलाश में भटक रहे सहारनपुर के बुजुर्ग सलीम को जेब काटने के शक में पकड़कर बेरहमी से पीटा गया।
सलीम का कहना है कि बटुआ जमीन पर पड़ा था, जिसे वह उठाने के लिए झुके थे। बेटी की जुदाई का दर्द झेल रहे, मुश्किल से चल पाने वाले इस बुजुर्ग को बिना जांच-पड़ताल के भीड़ ने आरोपी बना दिया।
एक बेबस बाप अपनी बेटी को ढूंढने निकला था, लेकिन खुद जुल्म का शिकार हो गया।
#Muzaffarnagar #Salim #MobViolence #JusticeForSalim #HumanityFirst #StopMobJustice #RuleOfLaw #India #UttarPradesh #Insaniyat
ट्रेन में मुस्लिम यात्री से मारपीट, 'जय श्री राम' न बोलने पर थप्पड़ मारने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप।
देश में भीड़ द्वारा पहचान और धार्मिक नारों को लेकर हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम नागरिकों को अपनी आस्था और पहचान की वजह से निशाना बनाया जाता रहेगा?
#MobLynching #HateCrime #IndianMuslims #JusticeForAll
#islamophobiaIndia
यह वीडियो कई रोज़ से वायरल है। क्या किसी पुलिस अफसर में इतनी हिम्मत है कि इस वीडियो में कही गई बातों को, दलील के साथ काटकर दिखाए? क्या सत्ताधारी दल का कोई बड़ा नेता इस वीडियो में कही गईं बातों को झुठला सकता है? वास्तविकता यह है कि सत्ताधारी दल के समर्थक, नेता, मंत्री, विधायक और यहां तक कि कई मुख्यमंत्री भी अघोषित तौर से मुसलमान को दोयम दर्जे का नागरिक मान चुके हैं। ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं, जिसमें किसी मुसलमान का कोई दोष नहीं था, लेकिन फिर भी उसे पुलिस द्वारा जेल इसलिए भेजा गया क्योंकि पुलिस पर सत्ताधारी दल के अनुषांगिक संगठनों ने दबाव बनाया था।
हालिया उदाहरण मुजफ्फरनगर का है। अनस अहमद नामी एक फूड ब्लॉगर ने, एक नॉनवेज रेस्टोरेंट का वीडियो बनाया। चूंकि उस नॉनवेज होटल का पता बताने के लिए शहर का नाम भी फिल्माना था, तो उसने शहर के शिव चौक के भी एक आध सेकेंड के विजुअल उस वीडियो में डाल दिए। बस फिर क्या था, हिन्दुवादी संगठनों ने हंगामा कर दिया, पुलिस ने अनस को गिरफ्तार कर उसका चालान कर दिया।ऐसी घटनाएँ आए दिन सामने आती रहती हैं।
जब किसी मुस्लिम का एनकाउंटर होता है, तब एक बड़ा तबका बिना सवाल किए उसे सही ठहराने लगता है, जांच की मांग करने वालों को भी निशाना बनाता है और पुलिस व सरकार की वाहवाही में जुट जाता है। लेकिन जैसे ही एनकाउंटर किसी अपने समाज या जाति के व्यक्ति का होता है, वही लोग निष्पक्ष जांच, सबूत, कानून और मानवाधिकारों की बात करने लगते हैं।
सवाल यह है कि न्याय का पैमाना आखिर अलग-अलग क्यों हो? अगर किसी एक मामले में एनकाउंटर पर सवाल उठाना ज़रूरी है, तो हर मामले में होना चाहिए। कानून धर्म, जाति और पहचान देखकर नहीं चलना चाहिए। न्याय तभी सच्चा कहलाएगा, जब उसका तराजू सबके लिए बराबर हो।
#EqualJustice #RuleOfLaw #JusticeForAll
योगी आदित्यनाथ ने जब शपथ लिया था तो कहा था बिना पक्षपात के सभी जाति धर्मों का न्याय एक समान करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
गाजीपुर के विनीत राय हत्याकांड में पिछड़े समाज से कमलेश बिंद का योगी सरकार ने एनकाउंटर कर दिया वही मुख्य आरोपी शंकर पांडे को सरकार बचा रही है।
कमलेश बिंद का परिवार और गाजीपुर की जनता चीख़ चीख कर कह रही है ये एनकाउंटर फर्जी है, मुख्य आरोपी शंकर पांडेय है सरकार उसे अपने संरक्षण में लेकर बचा रही है।
योगी आदित्यनाथ के जातिगत न्याय ने जनता के बीच इतना भारी असंतोष पैदा कर दिया है कमलेश बिंद का शव जैसे ही गांव आया वहां की जनता उग्र हो गई पुलिस पर पथराव कर दिया।
योगी आदित्यनाथ जी से निवेदन है आप सामने आईये और जो आरोपी है उसे सजा दीजिए और जो निर्दोष है उसे बख्श दीजिए।
जब किसी मुस्लिम का एनकाउंटर होता है, तब एक बड़ा तबका बिना सवाल किए उसे सही ठहराने लगता है, जांच की मांग करने वालों को भी निशाना बनाता है और पुलिस व सरकार की वाहवाही में जुट जाता है। लेकिन जैसे ही एनकाउंटर किसी अपने समाज या जाति के व्यक्ति का होता है, वही लोग निष्पक्ष जांच, सबूत, कानून और मानवाधिकारों की बात करने लगते हैं।
सवाल यह है कि न्याय का पैमाना आखिर अलग-अलग क्यों हो? अगर किसी एक मामले में एनकाउंटर पर सवाल उठाना ज़रूरी है, तो हर मामले में होना चाहिए। कानून धर्म, जाति और पहचान देखकर नहीं चलना चाहिए। न्याय तभी सच्चा कहलाएगा, जब उसका तराजू सबके लिए बराबर हो। #EqualJustice #RuleOfLaw #JusticeForAll
@ndtvindia@ravishranjanshu अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है:
"जिसने एक इंसान की जान बचाई, तो मानो उसने पूरी इंसानियत की जान बचाई।"
क़ुरआन 5:32
इस्लाम इंसानी जान, रहम और इंसाफ़ की तालीम देता है। ❤️
#NDTVExclusive | ‘दो लाख रुपये के गद्दे मैंने लोगों को बचाने के लिए बिछा दिए... मुझे सुकून है कि इस वजह से 8-12 लोगों की जान बच गई...'- NDTV से बोले गद्दे की दुकान के मालिक रियाजुद्दीन
@ravishranjanshu | #Delhi | #MalviyaNagar
हाजीपुर, बिहार: एक मुस्लिम भिखारी को जबरदस्ती "जय श्री राम" लगवाने की कोशिश की गई। मना करने पर गंदी गालियाँ और अपमान किया गया।
राम का नाम दिल से लिया जाता है, डराकर नहीं। जबरदस्ती भक्ति नहीं होती।
ऐसे काम राम के नाम को कलंकित करते हैं।
@Bihar_Police@SpVaishali
इसकी जांच कर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
- @TheMuslim786
#IslamophobiaInIndia #HateSpeech #MuslimsInIndia #DelhiMosque #HindusVsMuslims #IndiaUnderAttack
“20 लठ्ठ नाम के, 20 लठ्ठ दाढ़ी के” — अगर इंसाफ़ की जगह पहचान देखकर सज़ा तय होने लगे, तो समझ लीजिए कि कानून नहीं, नफ़रत राज कर रही है।
किसी इंसान को उसके मज़हब, नाम या दाढ़ी से नहीं, उसके कर्म से परखा जाना चाहिए।
अफ़सोस ये है कि आज कुछ लोग इस भेदभाव पर खुश होते हैं, जबकि एक सभ्य समाज की पहचान बराबरी और इंसाफ़ से होती है, न कि नफ़रत और पक्षपात से।
#JusticeForAll #StopHate
#MuslimLivesMatter #EqualCitizenship #RuleOfLaw #StandForJustice #HumanRights #NoToHate #SaveConstitution #IndiaForAll #JusticeNotBias #EndDiscrimination
ट्रेन में मुस्लिम यात्री से मारपीट, 'जय श्री राम' न बोलने पर थप्पड़ मारने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप।
देश में भीड़ द्वारा पहचान और धार्मिक नारों को लेकर हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम नागरिकों को अपनी आस्था और पहचान की वजह से निशाना बनाया जाता रहेगा?
#MobLynching #HateCrime #IndianMuslims #JusticeForAll
#islamophobiaIndia
“20 लठ्ठ नाम के, 20 लठ्ठ दाढ़ी के” — अगर इंसाफ़ की जगह पहचान देखकर सज़ा तय होने लगे, तो समझ लीजिए कि कानून नहीं, नफ़रत राज कर रही है।
किसी इंसान को उसके मज़हब, नाम या दाढ़ी से नहीं, उसके कर्म से परखा जाना चाहिए।
अफ़सोस ये है कि आज कुछ लोग इस भेदभाव पर खुश होते हैं, जबकि एक सभ्य समाज की पहचान बराबरी और इंसाफ़ से होती है, न कि नफ़रत और पक्षपात से।
#JusticeForAll #StopHate
#MuslimLivesMatter #EqualCitizenship #RuleOfLaw #StandForJustice #HumanRights #NoToHate #SaveConstitution #IndiaForAll #JusticeNotBias #EndDiscrimination
हाजीपुर, बिहार: एक मुस्लिम भिखारी को जबरदस्ती "जय श्री राम" लगवाने की कोशिश की गई। मना करने पर गंदी गालियाँ और अपमान किया गया।
राम का नाम दिल से लिया जाता है, डराकर नहीं। जबरदस्ती भक्ति नहीं होती।
ऐसे काम राम के नाम को कलंकित करते हैं।
@Bihar_Police@SpVaishali
इसकी जांच कर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
- @TheMuslim786
#IslamophobiaInIndia #HateSpeech #MuslimsInIndia #DelhiMosque #HindusVsMuslims #IndiaUnderAttack
⚠️ सांप्रदायिक आग भड़काने वाला शख्स फिर सक्रिय!
हाथरस जंक्शन थाना क्षेत्र के गांव पहाड़पुर का रहने वाला सीटू खुलेआम मुस्लिम समाज को गंदी-गंदी गालियां दे रहा है, बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।
UP Police अब और कितना इंतजार करेगी?
तुरंत FIR दर्ज करें, इस शख्स को गिरफ्तार करें और सख्त से सख्त कार्रवाई करें।
@hathraspolice@Uppolice@dgpup
#Hathras #SactionLo #CommunalHarmony #LawAndOrder
25 जून से तेलंगाना में SIR शुरू होने जा रहा है। ऐसे समय में बहुत से नेता सिर्फ बयान देते हैं, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी (@asadowaisi) खुद सड़कों पर उतरकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, घर-घर पहुँच रहे हैं और हर नागरिक की आवाज़ मज़बूत करने में लगे हैं।
दारुस्सलाम और AIMIM की हेल्प डेस्क भी पूरी तरह तैयार है ताकि किसी को अपने अधिकारों के लिए भटकना न पड़े।
जब बात आवाम की हो, तो असद ओवैसी हमेशा सबसे आगे नज़र आते हैं।
@asadowaisi #AsaduddinOwaisi #AIMIM #TelanganaSIR
उत्तर प्रदेश मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में शर्मनाक क्रूरता!
विधवा मां ने डीएम के आदेश पर 14 साल की मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी का टूटा पैर मुफ्त इलाज कराने गई। डॉक्टर पी.के. चतुर्वेदी ने ₹25,000 मांगे। ₹8,000 देने पर नाराज होकर डॉक्टर ने जांच के बहाने बच्ची का पैर जबरन मोड़कर हड्डी दोबारा तोड़ दी।
डॉक्टर बोले- “पागल है, मर भी गई तो क्या हुआ?”
सरकारी अस्पताल में यह बर्बरता? दोषी डॉक्टरों को तुरंत जेल भेजो!
#Muzaffarnagar #DoctorCruelty #JusticeForGirl
⚠️ सांप्रदायिक आग भड़काने वाला शख्स फिर सक्रिय!
हाथरस जंक्शन थाना क्षेत्र के गांव पहाड़पुर का रहने वाला सीटू खुलेआम मुस्लिम समाज को गंदी-गंदी गालियां दे रहा है, बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।
UP Police अब और कितना इंतजार करेगी?
तुरंत FIR दर्ज करें, इस शख्स को गिरफ्तार करें और सख्त से सख्त कार्रवाई करें।
@hathraspolice@Uppolice@dgpup
#Hathras #SactionLo #CommunalHarmony #LawAndOrder
Uttar Pradesh: According to an NDTV report from Muzaffarnagar District Hospital, a Muslim widow mother says that ₹25,000 was first demanded for the treatment of her 14-year-old mentally ill daughter. She says ₹8,000 was later taken for the operation, and when the remaining money was not paid, the girl’s leg was allegedly broken again.