कुछ ज़ख्म शरीर पर नहीं, भविष्य पर लगते हैं।
कुछ दर्द शब्दों में नहीं समाते, बस आँखों से बह निकलते हैं।
please listen- लाखों सपनों की चीख है, टूटते हुए सपनों की गवाही है,एक पीढ़ी की पीड़ा है।
हमारे देश की सोई हुई शिक्षा व्यवस्था जब जागी तो 6 साल बाद नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कक्षा 9 की NCERT सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किया है।
इतिहास जानना जरूरी है, लोकतंत्र को समझना भी जरूरी है।
लेकिन क्या सिर्फ अतीत जानना ही भविष्य बनाने के लिए काफी है?
आज चीन अपने स्कूलों में बच्चों को Artificial Intelligence, Robotics, Computational Thinking, AI Ethics और भविष्य की तकनीकों से परिचित करा रहा है। बीजिंग में तो प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक AI शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है और सरकार 2030 तक इसे पूरे देश में विस्तार देने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
इतना ही नहीं, कुछ दिन पहले ही चीन ने 2021 से 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों में लगभग 12,200 स्नातक (Undergraduate) डिग्री प्रोग्राम बंद या निलंबित किए और उनकी जगह 10,200 नए प्रोग्राम शुरू किए, जिनका फोकस Artificial Intelligence, Robotics, Data Science, Intelligent Manufacturing, Semiconductor और अन्य भविष्य की तकनीकों पर है। यह बदलाव रोजगार, उद्योगों की बदलती जरूरतों और आने वाले समय की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर किया गया।
दूसरी ओर, भारत में नई शिक्षा नीति के तहत इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ना स्वागतयोग्य हो सकता है।
लेकिन क्या उतनी ही प्राथमिकता से स्कूल स्तर पर AI, Robotics, Cyber Security, Data Science, Financial Literacy, Entrepreneurship और भविष्य के रोजगार से जुड़े कौशल भी जोड़े जा रहे हैं अगर छात्रों को ऐसे तकनीकी विषयों की जानकारी दी भी जा रही है तो ऐसे विषयों को पढ़ाने के लिए किस तरह के अध्यापक और लैब का व्यवस्था किया जा रहा है क्या इसका कोई मापदंड तय किया गया है?
अगर हमारा लक्ष्य 21वीं सदी का भारत बनाना है, तो बच्चों को सिर्फ इतिहास नहीं, भविष्य की दुनिया के लिए भी तैयार करना होगा। शिक्षा का उद्देश्य अतीत को समझाना भी है और आने वाले कल के रोजगार, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाना भी।
#NCERT #9THCLASSNCERT #education_system
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में अभी तक 13 छात्रों की मृत्यु की खबर अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है।
जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है,
उनके दुःख की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवारों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
हादसे में घायल सभी छात्रों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनका समुचित उपचार सुनिश्चित हो सके।
साथ ही इस घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि। ॐ शांति।
UPSSSC PET_2022 के माध्यम से वर्ष 2023 में निकाले गए जूनियर असिस्टेंट के 5512 पदों और ग्राम पंचायत अधिकारी के 1468 पदों पर आयोग ने पहले डेढ़ से दो वर्षों की लंबी देरी के बाद परीक्षा आयोजित कराई।
अब स्थिति यह है कि इन भर्तियों का विज्ञापन जारी हुए लगभग 3 वर्ष होने वाले हैं, लेकिन आज तक आयोग ने किसी भी परीक्षा का रिजल्ट जारी नहीं किया है।
युवा साथियों का कहना है कि पहले वैकेंसी के लिए प्रोटेस्ट, फिर एग्जाम डेट के लिए प्रोटेस्ट, एडमिट कार्ड के लिए प्रोटेस्ट, डीवी के लिए प्रोटेस्ट और अब रिजल्ट के लिए भी प्रोटेस्ट करना पड़ रहा है।
छात्रों का यह भी कहना है कि वे कई बार लखनऊ आकर UPSSSC आयोग के सचिव को रिजल्ट जारी करने के लिए ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अभी तक उसका कोई नतीजा नहीं निकला है।
जब आयोग रिजल्ट जारी नहीं कर रहा, किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहा, तो सवाल उठता है कि आखिर इस आयोग को किस लिए बनाया गया है?
क्या यह आयोग सिर्फ इसलिए बनाया गया है कि छात्र यहां आकर अपनी जायज़ मांगों के लिए बार-बार प्रोटेस्ट करते रहें।
आयोग को जल्द से जल्द अभ्यार्थियों का रिजल्ट जारी करना चाहिए।
इस तरह की लगातार लेटलतीफी लाखों युवाओं के भविष्य और मेहनत के साथ खिलवाड़ है।
#UPSSSC #JuniorAssistant #GramPanchayatAdhikari #Result
जब नेतृत्वकर्ता ही अनैतिकता पर उतर आए
तो फिर राष्ट्रहित केवल भाषणों में रह जाता है।
देश में बाहरी ताकतों की वजह से हजारों मुसीबतें आई होंगी पर शायद कभी देश का नेतृत्वकर्ता इतना लाचार या मजबूर नहीं हुआ होगा
कि वह अपने आत्मसम्मान पर किए गए चोट का विरोध भी नहीं कर सके
आखिर क्या मजबूरी है जो देश के आत्म सम्मान और नागरिको की सुरक्षा को दरकिनार करके ऐसे मुस्कुराया जा रहा है
जवाब देना होगा कि इन माता-पिता की क्या गलती है जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को देश की नीतियों के भरोसे छोड़ दिया #G7 #France
करोड़ों रुपए खर्च करके ग्लोबल AI SUMMIT आखिरकार क्यों किया गया था क्या AI SUMMIT केवल PR के लिए किया गया था
कई सालों से हम हजारों करोड़ डिजिटल इंडिया के नाम पर क्यों फूंक रहे हैं जब हम एक पेपर लीक तक नहीं रोक पा रहे हैं
और अगर पेपर लीक रोकने की कोशिश भी कर रहे हैं तो हमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाना पड़ रहा है जिसे लेकर ग्लोबली भारत के आत्मसम्मान पर सवाल उठाए जा रहा है
अब वह लोग कहां गए जो AI SUMMIT और डिजिटल इंडिया के नाम पर पोस्टरो में अपने चेहरे चमकाते हैं बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगवाते हैं और रील्स बनाते हैं आखिर ऐसे जिम्मेदार लोग कहां गए
कभी सोशल मीडिया पर बैन कानून व्यवस्था को बनाए रखने, आतंकवाद जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए लगाए जाते थे पर अब पेपर लीक रोकने के लिए बैन लगाया जा रहा है
जिसका मतलब है कि हमारा सिस्टम इतना कमजोर है जो पेपर लीक माफियाओं से डरता है
आईटी मिनिस्ट्री आखिर क्या कर रही है क्या वह केवल सोशल मीडिया पर बैन लगाने और जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद करने के लिए रह गई है #NEET #TELEGRAM #TELEGRAMBAN
महोदय, जो मार्केट में यह इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल (E22, E25, E27, E30 और E85) मौजूद हैं, इनको बंद करिए! क्योंकि जनता इनसे थोड़ा बहुत परेशान है।
अभी करोड़ों पुरानी मोटर साइकिल और गाड़ियों में इथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने पर—जो गाड़ी पहले 20 किलोमीटर चलती थी, वह अब सिर्फ 6 से 8 किलोमीटर का माइलेज दे रही है। जिस गाड़ी का सर्विसिंग 3 या 6 महीने पर कराया जाता था, अब उसकी सर्विसिंग हर महीने कराना पड़ रहा है। उसके इंजन बस थोड़े बहुत खराब हो रहे हैं, ज्यादा थोड़ी खराब हो रहे हैं!
और हमारे देश में जिनके पास गाड़ियाँ हैं, और बहुत से ऐसे लोग जिनकी रोजी-रोटी इन्हीं गाड़ियों की वजह से चलती है, उनके पास तो बहुत पैसे हैं! उनको फर्क थोड़ी पड़ता है कि गाड़ी माइलेज कम दे रही है या हर महीने सर्विसिंग कराना पड़ रहा है।
क्योंकि देश की जनता सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे पर बोलती है। भले ही हजारों लीटर पानी सिर्फ 1 लीटर इथेनॉल को बनाने में बर्बाद कर दिया जाए, लोग प्यासे मर जाएं, पर जनता महोदय जी से या सरकार से सवाल थोड़ी पूछेगी!
कि महोदय, आप एक समय कहते थे कि अगर इथेनॉल वाला पेट्रोल आया तो हम ₹15 लीटर पेट्रोल देंगे। जितना एवरेज आपको ₹120 लीटर वाले पेट्रोल में मिल रहा है, उतना ही एवरेज हम आपको ₹15 रुपए लीटर वाले इथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल में देंगे।
लेकिन आपने ऐसा नहीं किया! आप इथेनॉल वाला पेट्रोल लाकर भी ₹100 लीटर ही दे रहे हैं और लाखों करोड़ों गाड़ियों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ा रहे।
मैं तो कह रहा हूँ कि आप शत-प्रतिशत पेट्रोल के जगह इथेनॉल को ही लागू करिए, क्योंकि इससे इनडायरेक्टली आपको ही फायदा होगा। और फायदा कैसे होगा, यह हर कोई जानता है, बताने की जरूरत नहीं है... क्योंकि हमारे देश में समझदार लोग बहुत हैं! #Ethanol #E20% #EthnolPetrol
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना का An-32 विमान लैंडिंग के समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें हमारे 5 जांबाज वीर जवान स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम शहीद हो गए हैं।
दिवंगत वीर आत्माओं को नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को यह असीम दुख सहने की शक्ति दे। 🙏
आखिर अयोध्या राम मंदिर के फाइनेंशियल मैनेजमेंट को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं? जब हम देश के अन्य बड़े और ऐतिहासिक मंदिरों की व्यवस्था को देखते हैं, तो जवाब खुद-ब-खुद मिल जाता है।
बाकी मंदिरों का पारदर्शी 'सिस्टम' क्या है?
शिरडी साईं बाबा: बुलेटप्रूफ हॉल में मुख्य कार्यकारी अधिकारी और बैंक अफसरों की निगरानी में गिनती होती है। खास बात यह है कि इसका ऑडिट कोई निजी कंपनी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार का 'लोकल फंड ऑडिट' विभाग खुद करता है।
तिरुपति बालाजी: यहाँ 'परकामणि भवन' नाम का एक शीशे की दीवारों वाला हॉल बना है, जहाँ बाहर खड़े श्रद्धालु पूरी गिनती को लाइव देख सकते हैं। सीसीटीवी कैमरों के बीच, बिना जेब वाले कपड़े पहने केवल रिटायर्ड सरकारी और बैंक कर्मचारी ही यहाँ पैसे गिनते हैं। यहाँ रोजाना 4 से 4.5 करोड़ का चढ़ावा आता है I
पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल): यहाँ सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक समिति और जिला जज की सीधी निगरानी में दानपेटी खुलती है, जिसमें सुरक्षाकर्मी और बैंक अधिकारी शामिल होते हैं।
सांवलिया सेठ (राजस्थान): यहाँ हर महीने खुले हॉल में लाइव वीडियोग्राफी और बैंक कर्मियों की मौजूदगी में दान गिना जाता है। कोई भी आम श्रद्धालु सिर्फ अपना आधार कार्ड दिखाकर इस गिनती को देख सकता है और प्रतिदिन शाम को जारी होने वाली प्रेस रिलीज में गिनी गई नकदी और कीमती धातुओं की मात्रा का खुलासा किया जाता है ।
अब ज़रा अयोध्या की हकीकत को समझिए: राम मंदिर में भी सीसीटीवी की निगरानी में गिनती तो होती है, लेकिन उसे देखने की इजाज़त किसी आम श्रद्धालु को नहीं है और न ही वो फुटेज सार्वजनिक की जाती है। रकम लॉकर से सीधे बैंक जाती है, पर उसकी नियमित जानकारी भक्तों से साझा नहीं होती। आखिरी बार दिसंबर 2025 में 4,575 करोड़ का आंकड़ा आया था, लेकिन जून 2026 तक कोई नया अपडेट नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े आस्था के केंद्र का ऑडिट सरकार के बजाय 'टीसीएस' जैसी एक प्राइवेट कंपनी कर रही है।
यही वजह है कि अब दान के पैसों में कथित विसंगतियों और हेर-फेर की खबरों पर खुद पीएमओ (PMO) को रिपोर्ट तलब करनी पड़ी है। जब देश के तमाम बड़े मंदिरों में जनता के सामने खुला और सख्त सिस्टम हो सकता है, तो अयोध्या में वैसा ही पारदर्शी मॉडल अपनाने में क्या हर्ज है? जहाँ करोड़ों सनातनी भक्तों की अटूट आस्था और समर्पण की गाढ़ी कमाई जुड़ी हो, वहाँ व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता, सरकारी ऑडिट और नियमित आंकड़े सामने आना बेहद ज़रूरी है। #Ayodhya #RamMandir #Transparency
0 से 105600+ फॉलोवर्स बढ़ाने को तैयार हो जाओ सामुहिक रूप से 💯
💦 इस ट्वीट को RT करे.
💦 कमेंट में खुद का हेंडल लिखे.
💦 इस ट्वीट को RT करने वाले 💯 लोगो को फॉलो करें.
💦 जो आपको फॉलो करें उसे तुरन्त FB करे.
💦 मुझे 🌺@036PPSS 🌺फॉलो करे शत प्रतिशत फ़ॉलोबैक जरूर मिलेगा💯🙏🏼
"आओ मिलकर हाथ बढ़ाएं, इस धरती को स्वर्ग बनाएं।
पेड़ लगाएं, हरियाली लाएं, पर्यावरण को बचाएं।"
विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌍✨
#WorldEnvironmentDay 🌱
#WorldEnvironmentDay
Live क्लास में Vivek Sir रोते हुए सरकार से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरी कोचिंग खोल दीजिये
मैं हाथ पैर जोड़ता हूँ 100-200 लोगों का परिवार उससे चल रहा है मैं कर्जे में डूबा हुआ हूँ 4-4 साल घर नहीं जाता!
मैं रोज सडक पर नहीं उतरता हूँ.. योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शिक्षक हों या छात्र सबको खून के आँसू रुला दिए हैं
पेपर लीक को लेकर vivek Sir ने सडक पर उतरकर आंदोलन किया था जिसके बदले प्रशासन ने उनकी कोचिंग को सीज कर दिया!
ये तानाशाही है इतनी तत्परता इतनी चुस्ती पेपर में दिखाओ तो ये पेपर में गड़बडी क्यों हों!
इस अहंकार का अंत जनता करेगी और अपनी वोट की ताकत से अहंकार तोड़ेगी!
देश में मन की बात नाम का एक कार्यक्रम चलता है,
140 करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश में, अलग-अलग राज्यों से लोगों द्वारा देशहित में किए गए अच्छे कार्यों को फिल्टर किया जाता है और उसपर बात की जाती है जो काफी सराहनीय है देशहित में किए गए कार्यों पर चर्चा होनी चाहिए,
पर देश अनहित में हो रहे एक भी मुद्दे पर इस कार्यक्रम में बात नहीं होती, की कैसे 15 से 29 साल के 37 करोड़ से ज्यादा युवा जो देश के 27% आबादी है उनके भविष्य के साथ पेपर लीक, धांधली, भर्ती घोटाला, अव्यवस्था, सिस्टम फेल्योर के नाम पर खिलवाड़ किया जाता है, इस कार्यक्रम को सुन रहे मुख्यमंत्रियो और मंत्रियों को आम की वैरायटी के बारे में बताया जाता है अलग-अलग राज्यों के पेय पदार्थो की खूबियां गिनाईं जाती है पर यह बात नहीं की जाती कि कैसे NEET पेपर लीक हुआ 22 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य से खेला गया, कैसे CBSE बोर्ड के 17 लाख से ज्यादा छात्रों, SSC-GD जीडी में 48 लाख से ज्यादा युवाओं, CUET-UG मे 15 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों, लेखपाल, UPSI, बिहार दरोगा के लाखों अभ्यर्थी जो सरकार और सिस्टम के अव्यवस्था का शिकार हो रहे हैं इस बात पर चर्चा नहीं होती,
मुख्यमंत्रियों से यह नहीं पूछा जाता कि कैसे आपके राज्यों में पेपर लीक हो रहे है शिक्षा मंत्री और आयोगो से यह नहीं पूछा जाता कि कैसे पिछले 10 सालों में 89 से ज्यादा पेपर लीक हुए करोड़ो युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य से खेला गया, ऐसे एक भी मुद्दे पर चर्चा नहीं होती क्योंकि ऐसे मुद्दे देशहित के मुद्दे है ।
31 मई 2026
आज सिकंदराबाद विधानसभा के गाँव हसनपुर जागीर में समाजवादी पार्टी जनकर्तव्य जागरुकता अभियान(Public Duty Awareness) के तहत सफाई कार्यक्रम,वृक्षारोपण,और निःशुल्क शिक्षा कार्यक्रम को सभी ग्रामवासियों के साथ मिलकर पूर्ण किया और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए लोगों को जागरुक किया…..
नवीन शर्मा मसौता(शिक्षक)
सिकंदराबाद विधानसभा के घर-घर की आवाज🚲
मिशन 2027🚲
प्रयागराज में छात्रों और युवाओं की आवाज़ उठाने वाले कोचिंग संस्थानों — क्लाइमैक्स, टारगेट विद रवि तिवारी और एग्जामपुर — को बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, संस्थानों के बाहर पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है।
सवाल यह है कि क्या युवाओं के भविष्य की बात करना अब अपराध बन गया है, क्या छात्रों के हक की आवाज़ उठाने वालों को दबाकर शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
जो लोग देश को "विश्व गुरु" बनाने का दावा करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि विश्व गुरु बनने का रास्ता शिक्षा के मंदिरों पर ताले लगाने से होकर जाता है या शिक्षा को मजबूत करने से,
युवाओं की मांगों का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए, दमन से नहीं। आवाज़ों को बंद करने से समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति अविश्वास और बढ़ता है।
याद रखिए, जब छात्र अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँ, तो सवाल छात्रों पर नहीं, व्यवस्था पर उठते हैं।
क्योंकि किताबों से डरने वाली व्यवस्था कभी ज्ञान का नेतृत्व नहीं कर सकती।
#indianmedia #youtubeteachers #students