@the_yadav1 जाने वाले को कौन रोक सकता है।
ममता बनर्जी तो कहीं विदेश नहीं गई थीं, फिर भी उनके सांसदों ने पाला बदल लिया।
टिकट हमेशा अपने समर्पित कार्यकर्ता को ही दिया जाना चाहिए, नहीं तो जीतने के बाद पाला बदलेंगे ही।
@Roshan21rk@KraantiKumar हां, वहीं पर जहां मुगलों का ज्यादा प्रभाव था।
बिहार में केवल पटना राजधानी में और अमीरों के यहां तक सीमित है।
बिहार में करीब 5-6 स्थानीय भाषाएं बोली जाती है।
सभी इलाके की अपनी भाषा है।
मिथिला की मैथिली,भोजपुर,सारण, चंपारण की भोजपुरी, मगध क्षेत्र की मगही,बाकि अंगिका,बज्जी
@gaavkabalak@KraantiKumar हिंदी कि उत्पत्ति उर्दू से हुई है।
स्थानीय भाषाएं हजारों वर्ष पुरानी है। सभी जगह की अपनी स्थानीय भाषाएं हैं।
हिंदी हमारे ऊपर थोपी गई है।
@KraantiKumar@rahulve38903503 हिंदी हम बिहार-यूपी वालों की भी भाषा नहीं है।
हमारी भाषा भोजपुरी, मैथिली,अवधी,मगहि है।
जब तक हमलोग सही से जवाब नहीं देंगे, हिंदी के नाम पर राजनीति चलती रहेगी।
@RubikaLiyaquat@iamliyaquat सिद्धांत अपनी जगह, और नौकरी अपनी जगह।
अगर किसी को चाटने की नौकरी मिल जाये, तो उसे फ़र्ज़ तो निभाना ही पड़ेगा।
बड़े बुजुर्ग कहते थे- 'नौकरी कर...तो ना न कर'!
@RubikaLiyaquat ये वही है ना जो भारत को ऑर्डर देता है कि भारत अपना तेल कहां से खरीदे?
ये वही है ना जिसके सैनिक भारत के 3 निहत्थे निर्दोष लोगों को हमला करके मार दिये?
तुम लोग ही देश के असली गद्दार हो, बिल्कुल वैसा ही जैसा मुगलों के दरबार में कुछ लोग चाटूकारिता करते थे।